BaalVikas
Menu
Civil services
Asked 2 months ago · Viewed 13 times

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान की 'सातवीं अनुसूची' के अंतर्गत 'अवशिष्ट विधायी शक्तियों' (Residuary Legislative Powers - अनुच्छेद 248) तथा विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार संसद को किसी भी ऐसे विषय के संबंध में विधि बनाने की अनन्य (Exclusive) शक्ति प्राप्त है जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में शामिल नहीं है, और इस अवशिष्ट शक्ति के अंतर्गत कर लगाने (Taxation) की शक्ति भी संसद में ही निहित है।
  2. 2. भारत की संघीय प्रणाली में अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और ऑस्ट्रेलिया के संविधान के मॉडल पर आधारित हैं, जहाँ ये शक्तियाँ स्पष्ट रूप से संघ सरकार के बजाय राज्यों या प्रांतों को प्रदान की गई हैं।
  3. 3. यदि कोई नया विषय उत्पन्न होता है जो संघ, राज्य या समवर्ती किसी भी सूची में प्रत्यक्ष रूप से प्रगणित (Enumerated) नहीं है, तो इस बात का अंतिम निर्णय लेने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय के पास है कि वह विषय किस सूची के अंतर्गत आएगा, और सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या के पश्चात ही संसद या राज्य विधानमंडल उस पर कानून बना सकते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार, संसद को किसी भी ऐसे विषय के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है जो समवर्ती सूची (List III) या राज्य सूची (List II) में प्रगणित नहीं है। इसमें कर लगाने की शक्ति (Power to make laws with respect to any tax not mentioned in either List II or List III) भी शामिल है। यह व्यवस्था कनाडा के संविधान से प्रेरित है। कथन 2 गलत है: भारत में अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ अमेरिकी (USA) या ऑस्ट्रेलियाई मॉडल पर आधारित नहीं हैं (जहाँ अवशिष्ट शक्तियाँ राज्यों को दी गई हैं), बल्कि यह 'कनाडा के संविधान' के मॉडल पर आधारित हैं, जहाँ अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र सरकार (संघ) को प्रदान की गई हैं। कथन 3 गलत है: यह निर्णय लेने का अधिकार कि कोई विषय अवशिष्ट शक्तियों के अंतर्गत आता है या नहीं, अंतिम रूप से 'संसद' के पास है न कि सीधे सर्वोच्च न्यायालय के पास। सर्वोच्च न्यायालय केवल न्यायिक समीक्षा के दौरान यह परीक्षण करता है कि क्या संसद द्वारा बनाया गया कानून विधायी क्षमता के भीतर है या नहीं। यदि कोई विषय किसी भी सूची में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है, तो अनुच्छेद 248 और प्रविष्टि 97 (संघ सूची) के तहत संसद उस पर कानून बनाने के लिए सक्षम है।
Share:
अगला प्रश्न → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के… ← पिछला प्रश्न भारतीय राजव्यवस्था के संदर्भ में, भारतीय संविधान की…

Related Questions

→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329A) तथा 'निर्वाचन आयोग' (Election Commission) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार संसद, राज्य के विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति निर्वाचन आयोग में निहित है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त शामिल होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद की एक उच्च-स्तरीय चयन समिति की संस्तुति के आधार पर की जाती है। 2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से नहीं हटाया जा सकता। 3. संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत चुनाव मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक (Bar to interference by courts in electoral matters) का प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार संसद या राज्य विधानमंडल के लिए निर्वाचन से संबंधित किसी भी कानून की वैधता को केवल नियमित चुनाव याचिका (Election Petition) के माध्यम से ही उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, और चुनाव प्रक्रिया के बीच में किसी भी न्यायालय द्वारा कोई अंतरिम आदेश या रोक नहीं लगाई जा सकती। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघ की न्यायपालिका' (Supreme Court - अनुच्छेद 124 से 147) तथा सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों और क्षेत्राधिकार के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय का 'आरंभिक क्षेत्राधिकार' (Original Jurisdiction) संघ और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी भी कानूनी विवाद में अनन्य रूप से लागू होता है, बशर्ते यह विवाद किसी ऐसी संधि, समझौते या प्रसंविदा से उत्पन्न हुआ हो जो संविधान के लागू होने से पहले की गई थी और अभी भी प्रवृत्त है। 2. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह विधि या तथ्य के किसी ऐसे व्यापक सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय की राय मांग सकता है, और सर्वोच्च न्यायालय के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसे प्रत्येक संदर्भ पर अपनी राय राष्ट्रपति को प्रेषित करे। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर आबद्धकर (Binding) होता है, और संविधान के अनुच्छेद 142 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए यह शक्ति प्राप्त है कि वह अपने समक्ष लंबित किसी वाद या विषय में 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक कोई भी डिक्री पारित कर सकता है या आदेश दे सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'मुस्फीति' (Inflation), 'मुद्रास्फीति जनित मंदी' (Stagflation) तथा केंद्रीय बैंकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले मौद्रिक नीति उपकरणों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुद्रास्फीति जनित मंदी (Stagflation) एक ऐसी आर्थिक स्थिति है जहाँ अर्थव्यवस्था में उच्च मुद्रास्फीति (High Inflation) के साथ-साथ आर्थिक विकास की गति धीमी (Stagnant Economic Growth) हो जाती है और बेरोजगारी का स्तर भी उच्च बना रहता है। 2. जब केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए 'मात्रात्मक मौद्रिक नीति उपकरणों' (Quantitative Monetary Policy Tools) के तहत बैंक दर और रेपो रेट में वृद्धि करते हैं, तो वाणिज्यिक बैंकों के लिए ऋण लेना महंगा हो जाता है, जिससे समग्र माँग में कमी आती है और इसे मौद्रिक नीति का 'संकोचकारी रुख' (Contractionary Stance) कहा जाता है। 3. भारत में खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) का आकलन मुख्य रूप से 'थोक मूल्य सूचकांक' (WPI) के आधार पर किया जाता है, जिसका संकलन और प्रकाशन आर्थिक सलाहकार कार्यालय, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा मासिक आधार पर किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण के संदर्भ में, 'प्रवाल भित्तियाँ' (Coral Reefs) और उनके विरंजन (Coral Bleaching) तथा इससे जुड़ी पारिस्थितिकीय प्रक्रियाओं के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रवाल (Corals) मुख्य रूप से समुद्री जीव हैं जो फाइलम 'सिनेडेरिया' (Cnidaria) से संबंधित हैं, और रीफ-निर्माण करने वाले (Hermatypic) प्रवालों के ऊतकों में 'जूजैन्थेली' (Zooxanthellae) नामक सूक्ष्म शैवाल सहजीवी रूप से निवास करते हैं, जो प्रवालों को उनका विशिष्ट रंग प्रदान करने के साथ-साथ उनके कुल पोषण का अधिकांश हिस्सा प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से प्रदान करते हैं। 2. जब महासागरीय जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है या समुद्र में अम्लीकरण (Ocean Acidification) की समस्या बढ़ती है, तो प्रवाल तनावग्रस्त होकर अपने ऊतकों में रहने वाले जूजैन्थेली शैवाल को निष्कासित कर देते हैं, जिससे प्रवालों का रंग सफेद हो जाता है और इस स्थिति को प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) कहा जाता है, तथा यदि यह तनाव लंबे समय तक रहे तो प्रवाल की मृत्यु भी हो सकती है। 3. 'अल नीनो' (El Niño) दक्षिणी दोलन की घटना का प्रवाल विरंजन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, क्योंकि अल नीनो केवल वायुमंडलीय परिसंचरण और मानसूनी वर्षा को प्रभावित करता है, जबकि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और प्रवाल स्वास्थ्य पूरी तरह से स्थानीय प्रदूषण और लवणता के स्तर पर निर्भर करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था। 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है। 3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.