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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'सतत विकास लक्ष्य' (Sustainable Development Goals - SDGs) और 'बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Multidimensional Poverty Index - MPI) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए गए 2030 एजेंडा के 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में से 'SDG 1' का उद्देश्य केवल वैश्विक स्तर पर अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) का पूर्ण उन्मूलन करना है, और इसके तहत वैश्विक परिभाषा के अनुसार प्रतिदिन 2.15 अमेरिकी डॉलर से कम पर जीवनयापन करने वाले सभी व्यक्तियों की संख्या को आधा करना शामिल है।
  2. 2. नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा जारी किया जाने वाला 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (National MPI) स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन समान रूप से भारित आयामों का उपयोग करता है, जिन्हें कुल 12 संकेतकों (Indicators) के माध्यम से मापा जाता है (जैसे कि पोषण, बाल एवं किशोर mortality, मातृ स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा के वर्ष, और बैंक खाता आदि)।
  3. 3. वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित किया जाता है, तथा इसके अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति कुल भारित संकेतकों के कम-से-कम 20 प्रतिशत (यानी 1/5वें हिस्से) से वंचित है, तो उसे बहुआयामी रूप से गरीब माना जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: SDG 1 का उद्देश्य 'सभी जगह हर रूप में गरीबी का अंत करना' है। इसके तहत केवल अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) को मापना ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय परिभाषाओं के अनुसार सभी आयामों में गरीबो से जूझ रहे पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के अनुपात को कम-से-कम आधा करना शामिल है, न कि केवल 2.15 डॉलर प्रति दिन के मानक तक सीमित रहना। इसके अतिरिक्त, वैश्विक अत्यधिक गरीबी की वर्तमान अंतरराष्ट्रीय रेखा 2.15 अमेरिकी डॉलर प्रति दिन (2017 क्रय शक्ति समता - PPP) है, किंतु SDG 1 के लक्ष्य व्यापक हैं। कथन 2 सही है: नीति आयोग द्वारा प्रकाशित राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI) ऑक्सफोर्ड पावर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) और UNDP की वैश्विक पद्धति पर आधारित है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 3 मुख्य आयाम शामिल हैं, जिन्हें 12 संकेतकों (राष्ट्रीय MPI में पारंपरिक वैश्विक 10 संकेतकों में 'मातृ स्वास्थ्य' और 'बैंक खाता' को जोड़कर 12 किया गया है) के माध्यम से मापा जाता है। कथन 3 गलत है: वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) में किसी व्यक्ति को बहुआयामी रूप से गरीब तब माना जाता है जब वह कुल भारित संकेतकों के कम-से-कम 33.3% (यानी एक-तिहाई या 1/3rd) या उससे अधिक अभावों (Deprivations) का सामना करता है। यदि कोई व्यक्ति 20% से 33.3% के बीच वंचित है, तो उसे 'कमजोर' (Vulnerable to poverty) श्रेणी में रखा जाता है, न कि गरीब।
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