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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'अनुच्छेद 21' (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) तथा इसके न्यायिक विस्तार के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता' के अधिकार में न केवल शारीरिक अस्तित्व का संरक्षण शामिल है, बल्कि मानवीय गरिमा के साथ जीने का अधिकार, स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, और त्वरित सुनवाई का अधिकार भी इसके व्यापक दायरे में निहित है।
- 2. वर्ष 1978 के ऐतिहासिक 'मेनका गांधी बनाम भारत संघ' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया था कि अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को केवल 'विधี द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) के आधार पर छीना जा सकता है, और इसमें अमेरिकी संविधान की तरह 'विधि की उचित प्रक्रिया' (Due Process of Law) के सिद्धांतों को शामिल नहीं किया जा सकता है।
- 3. निजता का अधिकार (Right to Privacy) को सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा 'के. एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ' (2017) के निर्णय में अनुच्छेद 21 और भाग III के अन्य स्वतंत्रताओं के अंतर्गत एक अंतर्निहित मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मेनका गांधी मामला, हुसैनारा खातून मामला आदि) के माध्यम से अनुच्छेद 21 के दायरे का अभूतपूर्व विस्तार किया है। इसके अंतर्गत मानवीय गरिमा के साथ जीने का अधिकार, प्रदूषण मुक्त जल और वायु का अधिकार (स्वच्छ पर्यावरण), त्वरित सुनवाई, और गोपनीयता या निजता का अधिकार जैसे कई आयाम जोड़े गए हैं।
कथन 2 गलत है: वर्ष 1978 के 'मेनका गांधी बनाम भारत संघ' मामले से पहले तक भारत में केवल 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (जो ब्रिटिश कॉन्सेप्ट है) का सख्ती से पालन किया जाता था। किंतु मेनका गांधी मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह क्रांतिकारी निर्णय दिया कि अनुच्छेद 21 के तहत केवल 'विधี द्वारा स्थापित प्रक्रिया' ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वह प्रक्रिया 'न्यायोचित, निष्पक्ष और तार्किक' (Just, Fair and Reasonable) होनी चाहिए। इसका अर्थ यह है कि सर्वोच्च न्यायालय ने व्यावहारिक रूप से अमेरिकी संविधान के 'विधि की उचित प्रक्रिया' (Due Process of Law) के तत्वों को भारतीय न्यायशास्त्र में समाहित कर लिया है। अतः कथन 2 गलत है क्योंकि इसमें कहा गया है कि Due Process को शामिल नहीं किया जा सकता।
कथन 3 सही है: वर्ष 2017 में 'के. एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ' (K. S. Puttaswamy v. Union of India) के ऐतिहासिक सर्वसम्मत निर्णय में नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने स्पष्ट रूप से यह घोषित किया कि निजता का अधिकार (Right to Privacy) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 तथा भाग III के तहत गारंटीकृत स्वतंत्रताओं का एक अंतर्निहित और अभिन्न अंग है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 52 से 151) तथा 'भारत के महान्यायवादी' (Attorney General for India - अनुच्छेद 76) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा ऐसे व्यक्ति को की जाती है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित (Qualified) है, तथा संविधान में महान्यायवादी के लिए कोई निश्चित कार्यकाल निर्धारित नहीं किया गया है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) पद धारण करता है।
2. भारत के महान्यायवादी को देश के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों और संसद की किसी भी समिति (जिसका वह सदस्य नामित किया गया हो) में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
3. महान्यायवादी भारत सरकार का पूर्णकालिक विधि अधिकारी (Full-time legal officer) होता है, और संविधान के नियमों के अनुसार वह किसी भी निजी कानूनी प्रैक्टिस या मुक़दमे में सरकार के विरुद्ध पैरवी नहीं कर सकता है, क्योंकि यह उसके पेशेवर आचरण के विरुद्ध एक सांविधिक प्रतिबंध है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 359' के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों के प्रवर्तन के निलंबन और इसके संवैधानिक निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की उद्घोषणा प्रवर्तन में होने पर, राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा भाग III द्वारा प्रदत्त किसी भी मूल अधिकार (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन के लिए न्यायालय जाने के अधिकार को उस आदेश में विनिर्दिष्ट काल के लिए निलंबित कर सकता है।
2. अनुच्छेद 359 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया ऐसा प्रत्येक आदेश संपूर्ण भारत में या उसके किसी भाग में लागू हो सकता है, तथा इस आदेश को संसद के दोनों सदनों के समक्ष अनुमोदन के लिए रखना अनिवार्य है, अन्यथा यह संसद के अनुमोदन के बिना एक महीने की समाप्ति पर स्वतः समाप्त हो जाता है।
3. '44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978' के पश्चात यह प्रावधान किया गया कि अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) के प्रवर्तन को निलंबित करने वाला कोई भी आदेश राष्ट्रपति द्वारा कभी जारी नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत जारी की जाने वाली 'रिट अधिकारक्षेत्र' (Writ Jurisdiction) तथा इसके प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत केवल उच्चतम न्यायालय को ही मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और संसद विधि द्वारा किसी अन्य न्यायालय को भी स्थानीय सीमाओं के भीतर ऐसी रिट जारी करने की शक्ति प्रदान कर सकती है।
2. 'अधिकार पृच्छा' (Quo-Warranto) रिट का शाब्दिक अर्थ 'किस प्राधिकृत या वारंट द्वारा' है, जिसे किसी भी सार्वजनिक पद पर किसी व्यक्ति के अवैध रूप से कब्जा करने के खिलाफ जारी किया जा सकता है, और इसके लिए यह आवश्यक नहीं है कि याचिकाकर्ता स्वयं उस पद से सीधे तौर पर प्रभावित या पीड़ित हो।
3. 'परमादेश' (Mandamus) रिट एक ऐसा आदेश है जो किसी सार्वजनिक अधिकारी, लोक निकाय, अवर न्यायालय, निगम या सरकार को उसके सार्वजनिक कर्तव्यों का पालन करने या न करने के लिए जारी किया जाता है, तथा यह रिट किसी निजी व्यक्ति या निजी निकाय (Private Individual or Body) के विरुद्ध भी आसानी से जारी की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के संदर्भ में, 'हरित आवरण' (Green Cover), 'कार्बन सिंक' (Carbon Sinks) तथा इससे संबंधित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत की राष्ट्रीय वन नीति, 1988 के अनुसार देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का न्यूनतम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) भाग वनों और वृक्षों के आवरण के अंतर्गत होना अनिवार्य है, जिसमें पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए यह लक्ष्य 60 प्रतिशत निर्धारित किया गया है ताकि पारिस्थितिक स्थिरता और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
2. भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा द्विवार्षिक रूप से प्रकाशित होने वाली 'भारत की वन स्थिति रिपोर्ट' (ISFR) के अनुसार, 'वन आवरण' (Forest Cover) के अंतर्गत एक हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल की ऐसी सभी भूमि शामिल की जाती है जिसका वृक्ष घनत्व 10 प्रतिशत से अधिक हो, भले ही उस भूमि का विधिक स्वरूप (Legal Status) कुछ भी हो और वह निजी या सरकारी स्वामित्व के अधीन हो।
3. पेरिस समझौते (Paris Agreement) के तहत भारत की राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अंशदान (NDC) प्रतिबद्धताओं में वर्ष 2030 तक अतिरिक्त ढाई से तीन अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर एक अतिरिक्त कार्बन सिंक (Additional Carbon Sink) का सृजन करना शामिल है, जिसे प्राप्त करने का मुख्य दायित्व केवल और केवल सरकारी रिजर्व फॉरेस्ट और राष्ट्रीय उद्यानों के विस्तार पर निर्भर करता है, जिसमें निजी भूमि या कृषि वानिकी की कोई भूमिका नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मौर्योत्तर काल (Post-Maurya Period) की वास्तुकला और मूर्तिकला शैलियों — विशेष रूप से 'गांधार' (Gandhara), 'मथुरा' (Mathura) और 'अमरावती' (Amaravati) कला शैलियों — के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गांधार कला शैली पर यूनानी (हेलेनिस्टिक) प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसके तहत बुद्ध की मूर्तियों में यथार्थवादी शारीरिक संरचना, घुंघराले बाल, और रोमन शैली के वस्त्रों (Toga) जैसी विशेषताएँ प्रदर्शित की गईं, तथा इस शैली में मूर्तियों के निर्माण के लिए मुख्य रूप से काले-नीले शिस्ट (Schist) पत्थर का उपयोग किया गया था।
2. मथुरा कला शैली पूरी तरह से स्वदेशी थी और इस पर जैन, बौद्ध तथा ब्राह्मण धर्म तीनों का प्रभाव देखने को मिलता है, जिसमें बुद्ध की पहली बार मानव रूप में मूर्तियाँ गांधार शैली से भी पहले गढ़ी गईं और इसके निर्माण में मुख्य रूप से धब्बेदार लाल बलुआ पत्थर (Spotted Red Sandstone) का प्रयोग किया गया था।
3. अमरावती कला शैली मुख्य रूप से कृष्णा-गोदबारी घाटी में सातवाहन शासकों के संरक्षण में विकसित हुई, जिसमें संगमरमर (White Marble) का व्यापक उपयोग किया गया तथा इसमें बुद्ध के जीवन की घटनाओं को मुख्य रूप से स्वतंत्र और एकल मूर्तियों के रूप में दर्शाया गया है, न कि आख्यानात्मक रिलीफ (Narrative Reliefs) के रूप में।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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