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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल' (GWP) तथा विभिन्न ग्रीनहाउस गैसों (GHGs) के पर्यावरणीय प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल' (GWP) किसी विशिष्ट ग्रीनहाउस गैस की ऊष्मा-धारण क्षमता को कार्बन डाइऑक्साइड ($ ext{CO}_2$) के सापेक्ष एक निश्चित समय क्षितिज (सामान्यतः 100 वर्ष) में मापता है, जिसका अर्थ है कि $ ext{CO}_2$ का GWP मान हमेशा 1 होता है।
  2. 2. वायुमंडल में मीथेन ($ ext{CH}_4$) का GWP मान 100 वर्ष की अवधि में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में काफी अधिक होता है, किंतु मीथेन का वायुमंडलीय जीवनकाल (Atmospheric Lifetime) $ ext{CO}_2$ की तुलना में बहुत कम (लगभग 12 वर्ष) होता है।
  3. 3. क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौते के अंतर्गत विभिन्न देशों द्वारा अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) और उत्सर्जन रिपोर्टिंग में ग्रीनहाउस गैसों के प्रभावों को मानक रूप से मापने के लिए इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) द्वारा अनुशंसित GWP मूल्यों का उपयोग किया जाता है, जिसमें नाइट्रस ऑक्साइड ($ ext{N}_2 ext{O}$) का GWP मान मीथेन से भी कम होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल (GWP) एक माप है जो यह बताता है कि किसी ग्रीनहाउस गैस की एक निश्चित मात्रा (आमतौर पर 1 किलोग्राम) द्वारा उत्सर्जित ऊष्मा, समान मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड ($ ext{CO}_2$) द्वारा अवशोषित ऊष्मा की तुलना में कितनी अधिक है। संदर्भ मानक के रूप में $ ext{CO}_2$ का GWP हमेशा 1 होता है। कथन 2 सही है: मीथेन ($ ext{CH}_4$) का 100-वर्षीय GWP मान लगभग 28 से 36 (IPCC की रिपोर्ट के अनुसार) होता है, जो $ ext{CO}_2$ से बहुत अधिक है, लेकिन मीथेन का वायुमंडल में जीवनकाल केवल लगभग 12 वर्ष होता है, जबकि $ ext{CO}_2$ सदियों तक वायुमंडल में बनी रह सकती है। कथन 3 गलत है: नाइट्रस ऑक्साइड ($ ext{N}_2 ext{O}$) का GWP मान 100 वर्ष की अवधि में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में लगभग 265 से 298 गुना अधिक होता है, जो कि मीथेन ($ ext{CH}_4$) के GWP मान से काफी अधिक है। अतः कथन 3 का यह कहना कि $ ext{N}_2 ext{O}$ का GWP मान मीथेन से कम होता है, गलत है।
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