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भारतीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के संदर्भ में, भारत में जलवायु परिवर्तन, कार्बन बाज़ार और उससे जुड़ी पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत सरकार द्वारा स्थापित 'कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना' (Carbon Credit Trading Scheme - CCTS) के अंतर्गत, देश में घरेलू कार्बन बाज़ार को विनियमित करने का सांविधिक उत्तरदायित्व भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को सौंपा गया है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता को कम करने के लिए प्रमाणित कार्बन क्रेडिट के व्यापार का अधीक्षण करता है।
- 2. 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' (National Green Hydrogen Mission) के तहत भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 5 मिलियन मैट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता का विकास करना है, जिसके साथ ही लगभग 125 गीगावाट (GW) की संबंद्ध अक्षय ऊर्जा क्षमता का विस्तार भी शामिल है।
- 3. ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 के माध्यम से केंद्र सरकार या उसके द्वारा अधिकृत एजेंसी को यह शक्ति प्रदान की गई है कि वह भारत में पंजीकृत संस्थाओं और उद्योगों को कार्बन क्रेडिट प्रमाण पत्र जारी कर सके तथा ऊर्जा के गैर-जीवाश्म स्रोतों के उपयोग के लिए न्यूनतम हिस्सेदारी के मानदंड निर्धारित कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: भारत में घरेलू कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) को विनियमित करने का उत्तरदायित्व 'भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड' (SEBI) का नहीं है, बल्कि ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत संशोधित प्रावधानों के अनुसार 'विद्युत मंत्रालय' (Ministry of Power) के अंतर्गत 'ऊर्जा दक्षता ब्यूरो' (BEE - Bureau of Energy Efficiency) और केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (CERC) इसकी प्रशासनिक और विनियामक रूपरेखा तैयार करते हैं। SEBI प्रतिभूति बाज़ार का नियामक है, कार्बन बाज़ार का नहीं।
कथन 2 सही है: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक भारत में 5 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) प्रति वर्ष हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए लगभग 125 GW की अतिरिक्त अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी जाएगी।
कथन 3 सही है: ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 ने केंद्र सरकार (या अधिकृत एजेंसी जैसे BEE) को कार्बन क्रेडिट प्रमाण पत्र जारी करने और नामित उपभोक्ताओं के लिए गैर-जीवाश्म स्रोतों से ऊर्जा के उपयोग की न्यूनतम हिस्सेदारी तय करने की वैधानिक शक्ति प्रदान की है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) तथा 'गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान' (PM Gatikshakti National Master Plan) के प्रावधानों और उद्देश्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वर्ष 2019 में लॉन्च किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की पहचान करना, उन्हें वित्तपोषित करना और देश में विश्व स्तरीय अवसंरचना का समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित करना है, जिसमें कुल अनुमानित व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों के लिए आवंटित किया गया है।
2. 'पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान' (PM Gatikshakti) मुख्य रूप से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी (Multi-modal Connectivity) के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे NIP के तहत परिकल्पित सभी लॉजिस्टिक और आर्थिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को एकीकृत योजना (Integrated Planning) और समन्वित कार्यान्वयन (Coordinated Execution) प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।
3. गतिशक्ति योजना के अंतर्गत 'लॉजिस्टिक लागत' (Logistics Cost) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के वर्तमान स्तर से घटाकर वैश्विक मानकों के अनुरूप लगभग 15% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है, और इसके तहत किसी भी बुनियादी ढांचा परियोजना के पर्यावरणीय और वन मंजूरी (Environmental and Forest Clearances) से जुड़े मामलों को पूरी तरह से स्वचालित रूप से छूट दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) और 'अनुच्छेद 226' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय केवल 'मूल अधिकारों' (Fundamental Rights) के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, और इसके विपरीत अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को न केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बल्कि 'किसी अन्य प्रयोजन' (यानी सामान्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन पर भी) के लिए रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है।
2. 'चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालयों की अनुच्छेद 226 के अंतर्गत प्राप्त रिट अधिकारिता संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे संसद द्वारा किसी भी सामान्य विधि या संवैधानिक संशोधन के माध्यम से छीना या समाप्त नहीं किया जा सकता है।
3. उत्प्रेषण (Certiorari) और प्रतिषेध (Prohibition) रिटें केवल न्यायिक और अर्द्ध-न्यायिक निकायों (Judicial and Quasi-judicial Bodies) के विरुद्ध ही जारी की जा सकती हैं, और ये किसी भी परिस्थिति में प्रशासनिक अधिकारियों (Administrative Authorities) या निजी व्यक्तियों (Private Individuals) के विरुद्ध जारी नहीं की जा सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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