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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महाद्वीपीय मग्नतट' (Continental Shelf) और महासागरीय उच्चावच से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. महाद्वीपीय मग्नतट वास्तव में महाद्वीपों का ही डूबा हुआ विस्तारित भाग होता है, जिसकी औसत प्रवणता (Gradient) बहुत कम होती है और यह सामान्यतः 1 से 3 डिग्री के बीच होती है।
  2. 2. विश्व के सभी महाद्वीपीय मग्नतटों का विस्तार एक समान होता है, और इनका मग्नतट का ढाल समाप्त होने वाला बिंदु यानी 'शेल्फ़ ब्रेक' (Shelf break) सभी महासागरों में ठीक 200 मीटर की गहराई पर ही स्थित होता है।
  3. 3. महाद्वीपीय मग्नतट भू-राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि विश्व के प्रमुख मत्स्य क्षेत्र (Fishing grounds) यहीं पाए जाते हैं तथा यहाँ पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और विभिन्न खनिज संसाधनों के अपार भंडार भी स्थित होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: महाद्वीपीय मग्नतट (Continental Shelf) प्रत्येक महाद्वीप का उथला और डूबा हुआ सीमांत भाग होता है। इसकी ढाल या प्रवणता काफी मंद होती है, जो सामान्यतः 1° से 3° के बीच होती है। कथन 2 गलत है: सभी महाद्वीपीय मग्नतटों का विस्तार एक समान नहीं होता है। इनका विस्तार भूभाग की बनावट के अनुसार कुछ किलोमीटर से लेकर सैकड़ों किलोमीटर (जैसे साइबेरियन शेल्फ़) तक हो सकता है। यद्यपि औसत गहराई लगभग 200 मीटर मानी जाती है, किंतु 'शेल्फ़ ब्रेक' (जहाँ से ढाल अचानक तीव्र हो जाता है) की गहराई सभी स्थानों पर एक समान नहीं होती है और यह स्थानीय भू-आकृतिक कारकों पर निर्भर करती है। कथन 3 सही है: महाद्वीपीय मग्नतट अत्यधिक आर्थिक महत्व के होते हैं। उथला पानी होने के कारण सूर्य का प्रकाश तल तक पहुँचता है, जिससे फाइटोप्लांकटन का विकास होता है और यह विश्व के सबसे समृद्ध मत्स्य क्षेत्रों (जैसे ग्रैंड बैंक्स, डॉगर बैंक) का निर्माण करता है। इसके अलावा, दुनिया के अधिकांश अपतटीय (Offshore) पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के भंडार यहीं पाए जाते हैं।
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