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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) के गठन, शक्तियों और कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित एनजीटी (NGT) पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए एक विशेष वैधानिक निकाय है, तथा यह दीवानी प्रक्रिया संहिता (CPC), 1908 की सख्त प्रक्रियाओं से बंधा नहीं है बल्कि 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है।
- 2. एनजीटी के पास पर्यावरण से संबंधित किसी भी मामले में आदेश पारित करने का पूर्ण अधिकार है, किंतु यह अधिकरण अपने निर्णयों या आदेशों के विरुद्ध 'समीक्षा याचिका' (Review Petition) या अपने आदेशों के क्रियान्वयन की निगरानी करने की अपनी अंतर्निहित शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता है।
- 3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के किसी भी आदेश, निर्णय या पुरस्कार (Award) के विरुद्ध अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय में ही दाखिल की जा सकती है, क्योंकि इस अधिनियम के तहत उच्च न्यायालयों के अपीलीय क्षेत्राधिकार को पूरी तरह से अपवर्जित (Exclude) कर दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के अंतर्गत पर्यावरण संबंधी कानूनों के प्रभावी और तीव्र निस्तारण के लिए की गई थी। अधिकरण दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) की सख्त और तकनीकी प्रक्रियाओं से बाध्य नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' के आधार पर कार्य करता है।
कथन 2 गलत है: सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों (जैसे 'भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन मामला') के अनुसार, एनजीटी के पास अपने निर्णयों की समीक्षा (Review) करने की अंतर्निहित शक्ति (Inherent Power) है। यह अपने द्वारा दिए गए आदेशों की समीक्षा कर सकता है और पर्यावरण अनुपालन की निगरानी भी कर सकता है।
कथन 3 सही है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 22 के अनुसार, NGT के किसी भी आदेश, निर्णय या पुरस्कार के विरुद्ध अपील सीधे 90 दिनों के भीतर भारत के सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकती है। इस अधिनियम ने उच्च न्यायालयों (High Courts) के क्षेत्राधिकार को इस मामले में अपवर्जित कर दिया है, हालांकि उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकारिता का सीमित उपयोग कर सकते हैं, किंतु वैधानिक अपील केवल सर्वोच्च न्यायालय में ही होती है।
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राष्ट्रपति का निर्वाचन किस अनुच्छेद के अंतर्गत होता है?
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (National Clean Air Programme - NCAP) और वायु प्रदूषण नियंत्रण रणनीतियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया NCAP देश के सभी जिलों में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए एक दीर्घकालिक, समयबद्ध और राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2024 तक पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) सांद्रता में 20-30% की कमी लाना था, जिसे बाद में वर्ष 2026 तक 40% तक की कमी करने के लक्ष्य के साथ संशोधित किया गया है।
2. इस कार्यक्रम के तहत 'गैर-प्राप्ति शहर' (Non-attainment cities वे शहर हैं जो पिछले पाँच वर्षों से लगातार राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों - NAAQS को पूरा करने में विफल रहे हैं) की पहचान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा की जाती है, और इन शहरों के लिए विशिष्ट 'शहर कार्य योजनाएं' (City Action Plans) तैयार करना अनिवार्य किया गया है।
3. NCAP के तहत निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना और प्राप्त परिणामों का मूल्यांकन करना अब पूरी तरह से केवल शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के वित्तीय प्रदर्शन पर निर्भर करता है, और इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा कोई प्रत्यक्ष बजटीय सहायता या प्रदर्शन-आधारित अनुदान प्रदान नहीं किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की संरचना, नियुक्ति प्रक्रिया और उसकी स्वतंत्रता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल संविधान के अनुसार, निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय (Multi-member body) था जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्त होते थे, जिन्हें बाद में कुछ राजनीतिक विवादों के कारण एक-सदस्यीय बना दिया गया और पुनः 1993 में बहु-सदस्यीय कर दिया गया।
2. मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा पारित एक विशिष्ट कानून के अधीन की जाती है, और संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
3. निर्वाचन आयोग के अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की संस्तुति (Recommendation) अनिवार्य होती है, और उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त की तरह महाभियोग जैसी जटिल प्रक्रिया के बिना केवल मुख्य चुनाव आयुक्त की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा कभी भी हटाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 161' के अंतर्गत 'राज्य के राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति' (Pardoning power of the Governor) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की तरह राज्यपाल को भी किसी भी मामले में दी गई 'मृत्युदंड' (Death sentence) को माफ करने, कम करने या उसका परिहार करने की पूर्ण संवैधानिक शक्ति प्राप्त है, भले ही वह मामला राज्य सूची या समवर्ती सूची के अंतर्गत आता हो।
2. राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति का विस्तार उन सभी मामलों तक है जिन पर राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु राज्यपाल किसी 'सैन्य न्यायालय' (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड या सजा के मामले में क्षमादान की शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता है।
3. राज्यपाल द्वारा क्षमादान की शक्ति का प्रयोग करने का निर्णय पूरी तरह से उसका अपना स्वविवेक (Discretion) होता है, और इसके लिए उसे राज्य के मंत्रिपरिषद की सलाह या सहायता की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
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