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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान मुद्रा प्रणाली, वित्तीय प्रशासन और 'मलिक-उल-उमरा' या बाजार नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सल्तनत काल में सर्वप्रथम इल्तुतमिश ने शुद्ध अरबी सिक्कों की शुरुआत की, जिसके तहत उसने चांदी का 'टका' और तांबे का 'जीतल' चलाया, तथा इन सिक्कों पर टकसाल के नाम और खलीफों के प्रति निष्ठा अंकित करने की परंपरा को स्थापित किया।
- 2. मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा चलाई गई 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) की योजना पूरी तरह सफल रही थी, क्योंकि उसने तांबे और कांसे के सिक्कों के मूल्य को सोने और चांदी के दीनार व टका के बराबर वैधानिक दर्जा दे दिया था, जिससे राजकोष में सोने का भंडार कई गुना बढ़ गया था।
- 3. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी विशाल सेना के भरण-पोषण के लिए बाजार नियंत्रण नीति (Market Control Policy) लागू की थी, जिसके तहत उसने विभिन्न वस्तुओं (अनाज, वस्त्र, घोड़ों आदि) के मूल्य सख्ती से तय किए और इस व्यवस्था की देखरेख के लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: इल्तुतमिश (1210-1236 ई.) दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसने शुद्ध अरबी सिक्के चलाए। उसने चांदी का 'टका' (लगभग 175 ग्रेन) और तांबे का 'जीतल' प्रचलित किया तथा सल्तनत की मुद्रा व्यवस्था को आर्थिक स्थिरता प्रदान की।
कथन 2 गलत है: मुहम्मद बिन तुगलक की 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency - 1329-30 ई.) योजना अपने समय से आगे होने और प्रशासनिक मशीनरी की विफलता के कारण पूरी तरह असफल साबित हुई। तांबे और कांसे के सिक्कों की बड़े पैमाने पर जाली नकल (Counterfeiting) होने लगी, जिससे अर्थव्यवस्था चरमरा गई और सुल्तान को अंततः सोने-चांदी के सिक्के देकर तांबे के सिक्के वापस लेने पड़े।
कथन 3 सही है: अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी एक स्थायी और विशाल सेना को कम वेतन में बनाए रखने के लिए क्रांतिकारी 'बाजार नियंत्रण नीति' लागू की थी। इसके तहत अनाज, कपड़े, दासों और पशुओं के दाम निश्चित कर दिए गए थे। इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 'दीवान-ए-रियासत' (बाजार का अधीक्षक) और 'शहना-ए-मंडी' (बाजार का बाजार अधिकारी) जैसे महत्वपूर्ण अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं - अनुच्छेद 308 से 323) तथा अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 312 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह राज्य सभा द्वारा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से समर्थित संकल्प के आधार पर, राष्ट्रहित में एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं (जिनमें वर्तमान में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा शामिल हैं) के सृजन का उपबंध कर सके।
2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति और सेवा शर्तें निर्धारित करने का अंतिम और अनन्य संवैधानिक अधिकार संबंधित राज्य सरकारों के पास होता है, क्योंकि वे राज्य के प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत कार्य करते हैं, और केंद्र सरकार केवल उनके अनुशासनात्मक मामलों में ही हस्तक्षेप कर सकती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग (UPSC) और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का प्रावधान किया गया है, तथा इसके साथ ही दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर संसद कानून द्वारा उन राज्यों के लिए एक 'संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग' (JSPSC) का गठन कर सकती है, जिसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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कुरोशियो जलधारा किस महासागर में बहती है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124' के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति' और 'कॉलेजियम प्रणाली' (Collegium System) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल संविधान में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में राष्ट्रपति को केवल 'भारत के मुख्य न्यायमूर्ति' (CJI) से परामर्श करने का प्रावधान था, और वर्ष 1993 के द्वितीय न्यायाधीश मामले (Second Judges Case) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि CJI के परामर्श का अर्थ 'कॉलेजियम की सहमति' है, जिसमें CJI और उच्चतम न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होंगे।
2. राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम (NJAC Act, 2014) और उससे संबंधित 99वें संविधान संशोधन अधिनियम को उच्चतम न्यायालय ने अपने एक ऐतिहासिक निर्णय (चौथा न्यायाधीश मामला, 2015) में इस आधार पर असंवैधानिक और शून्य घोषित कर दिया कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) का उल्लंघन करता है।
3. संविधान के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होने के लिए किसी व्यक्ति का न्यूनतम आयु मानदंड 35 वर्ष निर्धारित किया गया है, और उसे किसी उच्च न्यायालय में कम से कम 10 वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में अभ्यास करना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) और 'प्रधानमंत्री गति शक्ति' (PM GatiShakti) योजना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वर्ष 2019 में देश के आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए शुरू किया गया था, जिसके अंतर्गत सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर होने वाले कुल पूंजीगत व्यय में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग समान रूप से (प्रत्येक की एक तिहाई) परिकल्पित की गई है।
2. 'प्रधानमंत्री गति शक्ति - राष्ट्रीय मास्टर प्लान' एक डिजिटल मंच है जो अर्थव्यवस्था के सात प्रमुख इंजनों (सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे, बंदरगाह, मास ट्रांसपोर्ट, जलमार्ग और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचा) के विकास को समेकित करने और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को सुगम बनाने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के डेटा को एक मंच पर लाता है।
3. NIP और PM GatiShakti दोनों ही पहलों का मुख्य उद्देश्य केवल केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष बजट आवंटन पर निर्भर रहना है, और इन परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल या विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 131' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के 'मूल आरंभिक क्षेत्राधिकार' (Original Jurisdiction) तथा इससे संबंधित सीमाओं और प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय को भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या एक तरफ भारत सरकार और कोई राज्य या राज्य और दूसरी तरफ एक या अधिक अन्य राज्यों के बीच किसी कानूनी विवाद में मूल आरंभिक क्षेत्राधिकार प्राप्त है।
2. अनुच्छेद 131 के अंतर्गत आने वाले मूल आरंभिक क्षेत्राधिकार में ऐसे किसी भी विवाद को शामिल किया गया है जो किसी राजनीतिक प्रकृति के समझौते, संधि या सनद (Covenant) से उत्पन्न हुआ हो, बशर्ते वह समझौता संविधान लागू होने से पहले या बाद में किया गया हो।
3. 'कर्नाटक राज्य बनाम भारत संघ (1977)' और अन्य मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 131 के अंतर्गत 'राज्य' शब्द में केंद्र शासित प्रदेश (Union Territories) और स्थानीय प्राधिकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) भी शामिल हैं, यदि उनका केंद्र सरकार के साथ कोई विधिक विवाद उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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