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Civil services
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - अनुच्छेद 36 से 51) तथा 42वें एवं 44वें संविधान संशोधनों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कुछ नए सिद्धांत जोड़े गए, जिनमें बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना, समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता, तथा उद्योगों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल था।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 48-क के अंतर्गत पर्यावरण का संरक्षण तथा संवहन और वन तथा वन्यजीवों की रक्षा करने का प्रावधान मूल संविधान में ही वर्ष 1950 से विद्यमान था, जिसे बाद में 42वें संशोधन द्वारा और अधिक कड़ा किया गया।
- 3. वर्ष 1978 के 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में एक नया खंड (अनुच्छेद 38 का खंड 2) जोड़ा गया, जिसके तहत राज्य को विशेष रूप से आय की असमानताओं को कम करने और विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले या विभिन्न पेशों में लगे लोगों के समूहों के बीच प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता को समाप्त करने का निर्देश दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में चार नए प्रावधान जोड़े गए: (a) बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना (अनुच्छेद 39), (b) समान न्याय और गरीबों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करना (अनुच्छेद 39-क), (c) उद्योगों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी सुनिश्चित करना (अनुच्छेद 43-क), और (d) पर्यावरण का संरक्षण तथा वनों और वन्यजीवों की रक्षा करना (अनुच्छेद 48-क)।
कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 48-क (पर्यावरण संरक्षण तथा वन और वन्यजीवों की रक्षा) मूल संविधान में शामिल नहीं था, बल्कि इसे वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा ही पहली बार नीति निर्देशक तत्वों में जोड़ा गया था।
कथन 3 सही है: जनता पार्टी सरकार द्वारा लाए गए 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 ने अनुच्छेद 38 में एक नया खंड (2) जोड़ा, जिसमें यह प्रावधान किया गया कि राज्य, विशिष्टतया, आय की असमानताओं को कम करेगा और न केवल व्यक्तियों के बीच बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले या विभिन्न पेशों में लगे हुए लोगों के समूहों के बीच भी प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता को समाप्त करने का प्रयास करेगा।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय लवणीयता' (Ocean Salinity) के वितरण, नियंत्रण करने वाले कारकों और उसके प्रादेशिक प्रतिमानों (Spatial Patterns) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरों में लवणीयता की मात्रा को निर्धारित करने वाले प्रमुख कारकों में वाष्पीकरण, वर्षण, नदियों द्वारा मीठे पानी का अंतःप्रवाह (Runoff) और महासागरीय धाराएं शामिल हैं, तथा भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ने पर महासागरीय लवणीयता में निरंतर और एकसमान रैखिक (Linear) वृद्धि होती जाती है।
2. खुले महासागरों की तुलना में आंशिक रूप से घिरे हुए बंद समुद्रों (Enclosed Seas) में लवणीयता का स्तर अत्यधिक उच्च हो सकता है यदि वहां वाष्पीकरण की दर उच्च हो और मीठे पानी का प्रवेश न्यूनतम हो, जैसा कि लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी के मामलों में देखा जाता है।
3. जल की गहराई के साथ लवणीयता में परिवर्तन की जो क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर परत पाई जाती है, उसमें 'हैलोक्लाइन' (Halocline) वह क्षेत्र या परत होती है जहां गहराई के साथ लवणीयता में तीव्र परिवर्तन (अक्सर तीव्र वृद्धि) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services - Article 312) और लोक सेवाओं से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित करती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है, तो संसद विधि द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अतिरिक्त किसी भी नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन का प्रावधान कर सकती है, और ऐसा संकल्प पारित करने की अनन्य शक्ति केवल राज्य सभा के पास है।
2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति और सेवा की शर्तें निर्धारित करने की अंतिम शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, किंतु इन सेवाओं के अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और उन्हें पदच्युत (Dismiss) करने का अधिकार केवल संबंधित राज्य सरकारों के पास होता है, केंद्र सरकार का इसमें कोई प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं होता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग (UPSC) और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का प्रावधान किया गया है, तथा अनुच्छेद 317 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य को उनके पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा ही कदाचार के आधार पर हटाया जा सकता है, जिसके लिए उच्चतम न्यायालय की जाँच और प्रतिवेदन अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'अनुच्छेद 20' (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 20(1) के तहत किसी भी व्यक्ति को ऐसे किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जाएगा जो उस समय लागू किसी कानून के उल्लंघन से अधिक या भिन्न नहीं था, और यह 'भूविकासी या पूर्व प्रभावी आपराधिक कानून' (Ex-post facto criminal law) के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, जिसे दीवानी (Civil) और कर कानूनों पर भी समान रूप से लागू किया गया है।
2. अनुच्छेद 20(2) के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जा सकता है, जिसे 'दोहरे खतरे' (Double Jeopardy) से संरक्षण कहा जाता है, और यह सुरक्षा केवल न्यायालयों या न्यायिक अधिकरणों के समक्ष शुरू की गईवाहियों पर ही लागू होती है, न कि विभागीय या प्रशासनिक प्राधिकरणों के समक्ष।
3. अनुच्छेद 20(3) के तहत किसी भी अपराध के लिए अभियुक्त व्यक्ति को स्वयं अपने विरुद्ध साक्ष्य देने या गवाही देने के लिए बाध्य (Self-incrimination) नहीं किया जा सकता है, और यह सुरक्षा मौखिक साक्ष्यों के साथ-साथ दस्तावेजों, अंगुलियों की छाप (Fingerprints), रक्त के नमूनों और हस्ताक्षर के अनिवार्य प्रस्तुति पर भी पूरी तरह लागू होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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किस शासक ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय के परामर्शदात्री अधिकारक्षेत्र' (Advisory Jurisdiction - Article 143) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि उन्हें यह प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है, जो लोक महत्व का है, तो वे उस प्रश्न को विचार के लिए उच्चतम न्यायालय के पास भेज सकते हैं और न्यायालय ऐसी किसी भी संदर्भिका (Reference) पर राष्ट्रपति को अपनी राय देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
2. उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 143 के अंतर्गत दी गई परामर्शदात्री राय न तो एक न्यायिक निर्णय होती है और न ही यह राष्ट्रपति या सरकार पर बाध्यकारी होती है, तथा न ही यह देश के अन्य अधीनस्थ न्यायालयों के लिए एक पूर्व दृष्टांत (Precedent) के रूप में प्रवर्तनीय होती है।
3. यदि कोई मामला संविधान लागू होने से पूर्व की किसी संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य इसी प्रकार के दस्तावेजों से उत्पन्न विवाद से संबंधित है, तो ऐसे मामलों में उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए परामर्श पर अपनी राय देना अनिवार्य (Compulsory) कर दिया गया है।
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