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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, प्राचीन भारत की प्रमुख बौद्ध वास्तुकला और स्थापत्य कला (Buddhist Architecture) के अंतर्गत 'चैत्य' (Chaitya) और 'विहार' (Vihara) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्राचीन बौद्ध वास्तुकला में 'चैत्य' वस्तुतः एक आयताकार प्रार्थना हॉल या पूजा गृह होता था जिसके अंत में एक स्तूप स्थित होता था, जबकि 'विहार' बौद्ध भिक्षुओं के निवास और विश्राम के लिए बनाए गए आवासीय कक्ष होते थे।
- 2. अधिकांश प्रारंभिक चैत्य गृहों और विहारों का निर्माण चट्टानों को काटकर (Rock-cut architecture) किया गया था, जिनमें पश्चिमी भारत की गुफाएँ (जैसे कार्ले, भजा, अजंता और एलोरा) प्रमुख उदाहरण हैं, और इनमें लकड़ी के तत्वों (Wooden facades) का अनुकरण करने की अनूठी विशेषता पाई जाती है।
- 3. हीनयान (Theravada) और महायान (Mahayana) दोनों ही बौद्ध परंपराओं के काल में चैत्य और विहारों की वास्तुकला में कोई परिवर्तन नहीं आया, तथा महायान काल के दौरान भी विहारों में केवल साधारण आवासीय कक्ष ही बनाए गए, जिनमें बुद्ध की मूर्तियों या पूजा स्थलों के लिए किसी भी प्रकार के गर्भगृह या कक्ष का प्रावधान नहीं किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: प्राचीन बौद्ध वास्तुकला में 'चैत्य' एक आयताकार प्रार्थना कक्ष (Prayer Hall) होता था, जिसके अंत में आमतौर पर एक छोटा स्तूप बना होता था। वहीं 'विहार' बौद्ध भिक्षुओं के रहने और अध्ययन करने के लिए बनाए गए आवासीय मठ (Monastic Residence) होते थे।
कथन 2 सही है: पश्चिमी भारत की चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएँ (Rock-cut architecture) बौद्ध स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। कार्ले, भजा, एलोरा, अजंता और कन्हेरी जैसी गुफाओं में चैत्य और विहार दोनों का निर्माण किया गया है। प्रारंभिक चट्टान-काटकर बनाई गई संरचनाओं में लकड़ी की वास्तुकला का अनुकरण (Imitation of wooden beams and ribs) स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
कथन 3 गलत है: महायान बौद्ध धर्म के उदय के साथ ही बौद्ध वास्तुकला में महत्वपूर्ण परिवर्तन आए। महायान काल में बुद्ध की मूर्तियों की पूजा शुरू हुई, जिसके कारण विहारों और चैत्यों की वास्तुकला में भी बदलाव आया। विहारों के भीतर अब बुद्ध की मूर्तियों को स्थापित करने के लिए गर्भगृह (Sanctum sanctorum) और प्रार्थना कक्षों का निर्माण किया जाने लगा, जिससे वे केवल साधारण आवासीय कक्ष न रहकर बड़े मठ परिसरों में परिवर्तित हो गए।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पंचायतों से संबंधित प्रावधान) तथा '73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992' के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं की शक्तियों, प्राधिकारों और उत्तरदायित्वों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के 'अनुच्छेद 243G' के तहत राज्यों के विधानमंडलों को यह शक्ति प्रदान की गई है कि वे विधि द्वारा पंचायतों को ऐसे शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकते हैं जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, जिसमें ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों से संबंधित मामलों के संबंध में योजनाओं की तैयारी और उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी शामिल है।
2. '73वें संविधान संशोधन' के उपबंधों के अनुसार, पंचायतों के लिए यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य किया गया है कि वे अपने स्तर पर आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए वार्षिक योजनाओं का निर्माण करें, किंतु केंद्र सरकार या राज्य सरकारों के लिए यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है कि वे इन योजनाओं को अपनी केंद्रीय या राज्य क्षेत्रीय योजनाओं में शामिल करें।
3. 'सुप्रीम कोर्ट' के विभिन्न निर्णयों और संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, ग्यारहवीं अनुसूची में उल्लिखित 29 विषयों का हस्तांतरण पंचायतों को किया जाना राज्यों के लिए एक स्वैच्छिक (Discretionary) मामला है, और यदि कोई राज्य सरकार इनमें से कुछ या सभी विषयों को पंचायतों को हस्तांतरित नहीं करती है, तो इसे भारतीय संविधान के मूल ढांचे या अनुच्छेद 243G का उल्लंघन नहीं माना जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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