BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
6 views

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - अनुच्छेद 36 से 51) के अंतर्गत उल्लिखित 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code - UCC) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार, राज्य भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह प्रावधान एक न्यायोचित (Justiciable) अधिकार है जिसे किसी भी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट (Writ) जारी करके लागू कराया जा सकता है।
  2. 2. भारत में 'समान नागरिक संहिता' की अवधारणा का तात्पर्य एक ऐसे एकल कानून से है जो देश के सभी नागरिकों पर उनके धर्म, पंथ, लिंग या जाति के भेदभाव के बिना व्यक्तिगत मामलों (जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेना) में समान रूप से लागू हो, बशर्ते कि यह संविधान के अन्य मौलिक अधिकारों के अनुकूल हो।
  3. 3. हालांकि संविधान सभा में चर्चा के दौरान डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने UCC के पक्ष में प्रबल तर्क दिए थे, किंतु संविधान सभा के भारी विरोध और समाज के विभिन्न वर्गों की धार्मिक स्वायत्तता को सुरक्षित रखने की अनिवार्यता के कारण इसे नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के रूप में शामिल किया गया, न कि एक प्रवर्तनीय (Enforceable) मौलिक अधिकार के रूप में।

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निर्देशक तत्व) के अंतर्गत उल्लिखित प्रावधान 'न्यायोचित' (Justiciable) नहीं हैं, अर्थात इन्हें संविधान के अनुच्छेद 37 के स्पष्ट निर्देशानुसार किसी भी न्यायालय द्वारा बलपूर्वक (Writ के माध्यम से) लागू नहीं कराया जा सकता है। ये देश के शासन में मौलिक हैं और राज्य के लिए कानून बनाते समय मार्गदर्शन का कार्य करते हैं। कथन 2 सत्य है क्योंकि समान नागरिक संहिता (UCC) का उद्देश्य भारत के सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और गोद लेने आदि से संबंधित मामलों में एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करना है, जो धर्म, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव न करे और संविधान के मौलिक अधिकारों (विशेषकर समानता का अधिकार और गैर-भेदभाव) के अनुरूप हो। कथन 3 आंशिक रूप से असत्य है (दूसरा भाग गलत है); संविधान सभा में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने UCC का समर्थन किया था, किंतु इसके विरोध (विशेषकर अल्पसंख्यकों और रूढ़िवादी सदस्यों की ओर से) के कारण इसे मौलिक अधिकार (जो न्यायोचित होते हैं) बनाने के बजाय नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - गैर-न्यायोचित) में रखा गया ताकि देश की तत्कालीन परिस्थितियों और विविधता को ध्यान में रखते हुए भविष्य में अनुकूल समय पर इसे लागू किया जा सके।
Share:

Related Questions

भारत के 96वें Chess Grandmaster कौन बने हैं? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम' (National Clean Air Programme - NCAP) और वायु गुणवत्ता प्रबंधन के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया NCAP देश का पहला राष्ट्रीय स्तर का ढांचा है जिसका लक्ष्य एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पीएम2.5 (PM2.5) और पीएम10 (PM10) सांद्रता में कमी लाना है, और इसमें वर्ष 2024 तक आधार वर्ष (2017) की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक की कटौती का शुरुआती लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40 प्रतिशत तक की कमी करने का लक्ष्य कर दिया गया है। 2. इस कार्यक्रम के तहत 'गैर-प्राप्ति शहर' (Non-Attainment Cities) वे शहर हैं जो पिछले पांच वर्षों के दौरान राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) का लगातार पालन करने में विफल रहे हैं, और इन शहरों के लिए विशिष्ट कार्य योजनाएं (City Action Plans) तैयार की जाती हैं। 3. NCAP के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति और वित्तीय सहायता का वितरण पूरी तरह से शहरों की वायु गुणवत्ता के वास्तविक सुधार पर आधारित नहीं है, बल्कि यह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा स्थापित 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण' (Swachh Vayu Survekshan) के अंतर्गत विभिन्न संकेतकों (जैसे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सड़क की धूल नियंत्रण आदि) पर उनके प्रदर्शन के आधार पर तय किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? सौर परिवार का मुखिया किसे माना जाता है? प्लासी का युद्ध किनके बीच लड़ा गया था? क्वो वारंटो (Quo-Warranto) का उद्देश्य क्या है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.