त्वरित लिंक्स
Civil services
5 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVI' (कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध - अनुच्छेद 330 से 342क) के अंतर्गत अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के अनुसार, लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात में किया जाता है, तथा 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 द्वारा इस आरक्षण की अवधि को बढ़ाकर वर्ष 2030 तक कर दिया गया है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 338क के तहत गठित 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' (NCST) के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तों और पदावधि का निर्धारण करने की शक्ति संसद के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 342क के अनुसार, राष्ट्रपति किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, राज्यपाल (या उस राज्य के प्रशासक) से परामर्श करने के पश्चात्, लोक अधिसूचना द्वारा उन सामाजिक और शैक्षणिक जातियों को निर्दिष्ट कर सकता है जिन्हें उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में 'सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग' (SEBC) माना जाएगा, तथा किसी जाति को इस सूची में जोड़ने या हटाने की अंतिम शक्ति केवल संसद में निहित है, राष्ट्रपति में नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 330 (लोकसभा में SC/ST आरक्षण) और अनुच्छेद 332 (विधानसभाओं में SC/ST आरक्षण) के तहत सीटों का आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात में होता है। मूल रूप से यह प्रावधान 70 वर्षों के लिए था, जिसे 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 (वर्ष 2018 का विधेयक) द्वारा बढ़ाकर 25 जनवरी 2030 तक कर दिया गया है।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 338क के अंतर्गत गठित 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' (NCST) के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा की शर्तें और पदावधि का निर्धारण करने की शक्ति **राष्ट्रपति** के पास है, न कि संसद के पास।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 342क के खंड (1) के अनुसार, राष्ट्रपति किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, राज्यपाल से परामर्श के बाद, लोक अधिसूचना द्वारा सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) को निर्दिष्ट कर सकता है। किंतु, इस सूची में किसी जाति या जनजाति को **संशोधित (जोड़ने या हटाने) करने की शक्ति संसद के पास** होती है (अनुच्छेद 342क के खंड (2) के तहत), न कि राष्ट्रपति के पास अकेले अधिसूचना जारी करने की। यहाँ कथन में कहा गया है कि 'अंतिम शक्ति केवल संसद में निहित है, राष्ट्रपति में नहीं' जो तकनीकी रूप से सूची में संशोधन के संदर्भ में सही है, परंतु राष्ट्रपति की अधिसूचना की प्रारंभिक भूमिका और 102वें/105वें संविधान संशोधन के संदर्भ में यह स्पष्ट है कि SEBC की केंद्रीय सूची में संशोधन संसद द्वारा कानून बनाकर किया जाता है। तथापि, कथन 1 एकमात्र पूर्णतः तथ्यात्मक और सही विकल्प है क्योंकि कथन 2 में राष्ट्रपति की जगह संसद बताया गया है और कथन 3 में राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना और संसद द्वारा कानून के बीच की प्रक्रिया को आंशिक रूप से भ्रमित किया गया है। अतः केवल कथन 1 सही है।
Related Questions
→
भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'एल नीनो सदर्न ऑसिलेशन' (ENSO) के 'ला नीना' (La Niña) चरण और इसके भारतीय मानसून पर पड़ने वाले प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ला नीना की स्थिति के दौरान, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के केंद्रीय और पूर्वी भागों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे पूर्वी हवाएं (Trade Winds) अत्यधिक कमजोर हो जाती हैं।
2. ला नीना के प्रभावस्वरूप भारतीय उपमहाद्वीप पर मानसूनी हवाओं का संचरण मजबूत होता है, जिससे सामान्यतः देश के अधिकांश हिस्सों में औसत से अधिक वर्षा (Above-normal rainfall) दर्ज की जाती है।
3. यद्यपि ला नीना भारतीय कृषि और जल संसाधन के लिए आमतौर पर अनुकूल माना जाता है, तथापि यह उत्तर-पश्चिम भारत और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में अत्यधिक बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' और 'भाग IX-A' के अंतर्गत स्थानीय स्वशासन (पंचायतों और नगरपालिकाओं) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा क्रमशः पंचायतों और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया, जिसके तहत संविधान में ग्यारहवीं और बारहवीं अनुसूचियाँ जोड़ी गईं, जिनमें पंचायतों के लिए 29 और नगरपालिकाओं के लिए 18 कार्यात्मक विषय (Functional Items) शामिल किए गए हैं।
2. संविधान के अनुच्छेद 243-I के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, हर पाँच वर्ष की समाप्ति पर, पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए एक 'राज्य वित्त आयोग' (State Finance Commission) का गठन करेगा, जो पंचायतों और नगरपालिकाओं के बीच करों, शुल्कों और टोल के वितरण के सिद्धांतों की संस्तुति करता है।
3. 74वें संविधान संशोधन द्वारा यह अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक राज्य में जिला स्तर पर 'जिला योजना समिति' (District Planning Committee - DPC) और महानगरीय क्षेत्रों के लिए 'महानगरीय योजना समिति' (Metropolitan Planning Committee - MPC) का गठन किया जाएगा, जो जिले या महानगर के विकास के लिए एक समेकित विकास योजना (Draft Development Plan) तैयार करेगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'अनुच्छेद 21' (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) तथा 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' और 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' की अवधारणाओं के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया (Procedure established by law) के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं, जिसका अर्थ है कि यह अवधारणा मुख्य रूप से विधायिका द्वारा बनाई गई प्रक्रिया की वैधता की जाँच करती है, न कि उस कानून के न्यायसंगत या उचित होने की।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 1978 के ऐतिहासिक 'मेनका गांधी मामले' के उपरांत 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' के पारंपरिक दायरे का विस्तार किया और अमेरिकी संविधान से प्रेरित होकर 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' (Due process of law) के सिद्धांतों को भी इसके भीतर समाहित कर लिया, जिसके तहत अब न्यायालय यह भी परीक्षण करता है कि कानून केवल निष्पक्ष और स्पष्ट ही नहीं, बल्कि न्यायसंगत, तर्कसंगत और गैर-मनमाने ढंग से बनाया गया है या नहीं।
3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मिलने वाले अधिकारों की सुरक्षा केवल भारतीय नागरिकों के लिए ही उपलब्ध है, तथा आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अनुच्छेद 21 को किसी भी स्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
वायुमंडल की किस परत में ऊंचाई के साथ तापमान बढ़ता है?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule) की उद्घोषणा और उसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा केवल तभी कर सकता है जब उसे राज्यपाल से रिपोर्ट प्राप्त होती है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य का शासन इस संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, और राज्यपाल की इस रिपोर्ट के बिना राष्ट्रपति अपनी प्रेरणा से यह उद्घोषणा नहीं कर सकता है।
2. राष्ट्रपति शासन की प्रत्येक उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी जारी होने की तारीख से 'दो मास' के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है, और यदि इस अवधि के दौरान लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो यह उद्घोषणा लोकसभा के पुनर्गठन के बाद अपनी पहली बैठक से 30 दिनों तक प्रवृत्त बनी रहती है, बशर्ते इस बीच राज्यसभा द्वारा इसका अनुमोदन कर दिया गया हो।
3. सर्वोच्च न्यायालय के 'एस.आर. बोम्बाई वाद (1994)' के निर्णय के अनुसार, राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे में आती है, और यदि यह उद्घोषणा दुर्भावनापूर्ण (Mala fide) पाई जाती है या अप्रासंगिक आधारों पर आधारित होती है, तो न्यायालय विघटित विधानसभा को पुनर्जीवित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.