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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329A) के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) और चुनावी सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. निर्वाचन आयोग एक अखिल भारतीय निकाय है जो केंद्र सरकार और राज्य सरकारों दोनों के लिए चुनाव करवाता है, तथा संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया तथा उसके वेतन-भत्ते उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होते हैं।
  2. 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 126 के अनुसार, चुनाव प्रचार की समाप्ति और मतदान समाप्त होने के निर्धारित समय के बीच की 48 घंटों की 'मौन अवधि' (Silence Period) के दौरान किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में सार्वजनिक सभाओं, जुलूसों या टेलीविजन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से चुनावी सामग्री के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध होता है।
  3. 3. चुनावी वित्तपोषण में पारदर्शिता लाने के लिए शुरू की गई 'चुनावी बॉन्ड' (Electoral Bonds) योजना को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने एक ऐतिहासिक फैसले में असंवैधानिक घोषित कर दिया गया, क्योंकि न्यायालय ने माना कि यह योजना नागरिकों के सूचना के अधिकार (Article 19(1)(a)) और भ्रष्टाचारमुक्त राजनीति के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को हटाने की प्रक्रिया और उसके आधार वही हैं जो सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीश को हटाने के होते हैं, न कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के। इसके अलावा, CEC के वेतन और भत्ते सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समतुल्य होते हैं। हाल ही में पारित मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 के तहत इनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक कैबिनेट मंत्री वाली चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। कथन 2 सही है क्योंकि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत मतदान समाप्त होने के समय से ठीक पहले के 48 घंटों की अवधि को 'मौन अवधि' घोषित किया गया है, जिसमें जनसभाओं और मीडिया प्रचार पर रोक होती है। कथन 3 सही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने फरवरी 2024 के अपने ऐतिहासिक फैसले में चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था, यह मानते हुए कि यह सूचना के अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के विपरीत है।
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