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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' और 'भाग IX-A' के अंतर्गत 'पंचायतों' तथा 'नगरपालिकाओं' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में जोड़ी गई ग्यारहवीं अनुसूची के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने के संबंध में कुल 29 कार्यात्मक विषय सौंपे गए हैं, तथा इस भाग के प्रावधान देश के सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों पर बिना किसी अपवाद के पूर्ण रूप से अनिवार्य रूप से लागू होते हैं।
  2. 2. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत नगरपालिकाओं के तीन प्रकार - नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम - का गठन किया जाता है, तथा प्रत्येक नगरपालिका में वार्ड समितियों (Ward Committees) का गठन उन नगरपालिकाओं के लिए अनिवार्य है जिनकी जनसंख्या दस लाख या उससे अधिक है।
  3. 3. पंचायतों और नगरपालिकाओं दोनों के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करने तथा मतदाता सूचियों को तैयार कराने की शक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा नियुक्त किए जाने वाले 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) में निहित होती है, जिसे हटाने की प्रक्रिया और शर्तें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है: यद्यपि ग्यारहवीं अनुसूची के तहत पंचायतों को 29 कार्यात्मक विषय सौंपे गए हैं, किंतु भाग IX के प्रावधान देश के सभी राज्यों पर अनिवार्य रूप से लागू नहीं होते हैं। ये प्रावधान नागालैंड, मेघालय और मिजोरम तथा कुछ अन्य क्षेत्रों (जैसे अनुसूची 5 के तहत आने वाले अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों आदि) पर लागू नहीं होते हैं या उनमें कुछ अपवादों के साथ लागू होते हैं। कथन 2 असत्य है: 74वें संशोधन के अनुसार, वार्ड समितियों का गठन उस नगरपालिका क्षेत्र के भीतर एक या अधिक वार्डों के लिए किया जा सकता है जिसकी जनसंख्या तीन लाख (3 lakh) या उससे अधिक है, न कि दस लाख। दस लाख या उससे अधिक जनसंख्या महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) के गठन से संबंधित है। कथन 3 असत्य है: राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उसे उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है (अर्थात संसद जैसी महाभियोग प्रक्रिया या राष्ट्रपति द्वारा), न कि राज्यपाल की इच्छा पर। किंतु इस कथन में त्रुटि यह है कि 'राज्य निर्वाचन आयोग' के अध्यक्ष/आयुक्त को हटाने की शर्तें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी होती हैं, परंतु प्रश्न में दिए गए समग्र संयोजन या अन्य तथ्यों के आधार पर यह कथन भी तकनीकी रूप से आंशिक रूप से भ्रामक हो सकता है, तथा कुल मिलाकर तीनों कथन गलत हैं क्योंकि कथन 1 और 2 तथ्यात्मक रूप से स्पष्ट रूप से अशुद्ध हैं। अतः सही उत्तर विकल्प (d) 'कोई भी नहीं' होगा।
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'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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