Civil services
Asked 2 months ago · Viewed 18 times
भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, 'हरित सकल घरेलू उत्पाद' (Green GDP) और 'पर्यावरणीय लेखांकन' (Environmental Accounting) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हरित सकल घरेलू उत्पाद (Green GDP) किसी अर्थव्यवस्था के कुल उत्पादन का वह माप है जो पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में से प्राकृतिक संसाधनों के क्षय (Depletion of natural resources) और पर्यावरण प्रदूषण के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान (Environmental degradation costs) को घटाकर प्राप्त किया जाता है।
- 2. 'संयुक्त राष्ट्र' की 'सीवेज' (SEEA - System of Environmental-Economic Accounting) रूपरेखा पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानक है, जो आर्थिक और पर्यावरणीय डेटा को एकीकृत करके सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति को मापने में सहायता करती है।
- 3. पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की तुलना में Green GDP का उच्च होना इस बात का प्रतीक होता है कि देश में आर्थिक विकास पर्यावरण की कीमत पर तीव्र गति से हो रहा है और प्राकृतिक पूंजी का बड़े पैमाने पर क्षरण हो रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 'हरित सकल घरेलू उत्पाद' (Green GDP) पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद का एक संशोधित रूप है, जिसमें आर्थिक विकास के कारण प्राकृतिक संसाधनों की खपत, वनोन्मूलन, मृदा क्षरण और प्रदूषण से होने वाली क्षति के पर्यावरणीय लागत को घटा दिया जाता है। यह सतत विकास का सटीक आकलन प्रदान करता है।
कथन 2 सही है: संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग द्वारा विकसित 'पर्यावरणीय-आर्थिक लेखांकन प्रणाली' (SEEA - System of Environmental-Economic Accounting) एक अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानक है जो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच के अंतर्संबंधों को मापने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है।
कथन 3 गलत है: पारंपरिक GDP की तुलना में Green GDP का कम (निम्न) होना यह दर्शाता है कि आर्थिक विकास पर्यावरण की भारी कीमत पर हो रहा है और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन अत्यधिक है। यदि Green GDP और पारंपरिक GDP के बीच का अंतर कम है, तो इसका अर्थ है कि विकास अधिक टिकाऊ (Sustainable) है। चूँकि कथन 3 में Green GDP के उच्च होने को पर्यावरणीय क्षति से जोड़ा गया है, इसलिए यह कथन गलत है।
अगला प्रश्न →
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ…
← पिछला प्रश्न
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय…
Related Questions
→
भारतीय इतिहास और मध्यकालीन प्रशासन के संदर्भ में, 'दहसाल प्रणाली' (Dahshala System) या 'टोडरमल बंदोबस्त' (Todar Mal's Bandobast) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस प्रणाली को मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल के दौरान उनके वित्त मंत्री राजा टोडरमल द्वारा वर्ष 1580 में पूर्ण रूप से लागू किया गया था, जो कि पिछले दस वर्षों (1570-1580) के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और औसत बाजार कीमतों के आंकड़ों पर आधारित थी।
2. इस व्यवस्था के अंतर्गत भूमि को उसकी उर्वरता के आधार पर चार श्रेणियों - पोलज, परती, चाचर और बंजर - में वर्गीकृत किया गया था, जिसमें 'पोलज' वह भूमि थी जिस पर वर्ष में दो बार लगातार फसलें उगाई जाती थीं और इसे कभी भी खाली नहीं छोड़ा जाता था।
3. दहसाल प्रणाली भू-राजस्व निर्धारण की 'जब्ती प्रणाली' (Zabti System) का ही एक परिष्कृत रूप थी, जिसमें राजस्व का नकद भुगतान (Cash payment) अनिवार्य किया गया था, और इस व्यवस्था के लागू होने से साम्राज्य को कृषि आय की अनिश्चितता से मुक्ति मिली तथा राजकोषीय स्थिरता प्राप्त हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय इतिहास और मध्यकालीन प्रशासन के संदर्भ में, सल्तनत कालीन और मुगलकालीन राजस्व व्यवस्था तथा 'मंसबदारी प्रणाली' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मुगल सम्राट अकबर द्वारा आरम्भ की गई मंसबदारी प्रणाली में 'जात' और 'सवार' पद यह निर्धारित करते थे कि संबंधित मंसबदार का व्यक्तिगत दर्जा (पदानुक्रम) क्या है और उसे अपने सैन्य दल में कितने घोड़ों और घुड़सवार सैनिकों का रखरखाव करना होगा, तथा इस व्यवस्था की मूल प्रेरणा मंगोलों की सैन्य और प्रशासनिक संरचना (दशमलव प्रणाली) से ली गई थी।
2. सल्तनत काल के दौरान अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सैन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 'हुलिया' (सैनिकों का वर्णनात्मक रिकॉर्ड) रखने और 'चेहरा व दाग' (घोड़ों को दागने) की प्रथा को सख्ती से लागू किया था, और कृषि भूमि पर सीधे कर निर्धारण के लिए उसने 'खराज' की दर को बढ़ाकर उपज का आधा (50 प्रतिशत) कर दिया था।
3. मुगल शासनकाल में 'मदद-ए-मामाश' (या सयूरगल) राज्य द्वारा विद्वानों, धार्मिक व्यक्तियों और जरूरतमंदों को दी जाने वाली कर-मुक्त भूमि अनुदान थी, जिसे वंशानुगत (Hereditary) रूप से किसी भी परिस्थिति में बदला नहीं जा सकता था और औरंगजेब के शासनकाल में इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) और उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराएँ महासागरों में जल के एक स्थान से दूसरे स्थान पर एक निश्चित दिशा में निरंतर प्रवाह को दर्शाती हैं, तथा कोरियॉolis बल (Coriolis Force) के प्रभाव के कारण ये धाराएँ उत्तरी गोलार्ध में अपनी मूल दिशा से दाईं ओर (Clockwise) और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Anti-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं।
2. 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक ठंडी महासागरीय धारा है जो अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होती है और पश्चिमी यूरोप के तटीय क्षेत्रों के तापमान को अत्यधिक ठंडा करने के लिए उत्तरदायी होती है।
3. अटलांटिक महासागर में उत्तर से आने वाली ठंडी 'लैब्राडोर धारा' (Labrador Current) और दक्षिण से आने वाली गर्म 'गल्फ स्ट्रीम' के मिलने से न्यूफाउंडलैंड के तट के पास 'ग्रैंड बैंक' का निर्माण होता है, जो दुनिया के सबसे समृद्ध मछली पकड़ने (Fishing grounds) के क्षेत्रों में से एक है क्योंकि यहाँ गर्म और ठंडी धाराओं का मिलन प्लवक (Plankton) के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और जैव विविधता संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की स्थापना 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के तहत चेन्नई, तमिलनाडु में एक सांविधिक (Statutory) और स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और जैव विविधता अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े मामलों को विनियमित करना है।
2. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत देश के प्रत्येक स्तर पर स्थानीय निकायों द्वारा 'जैव विविधता प्रबंधन समितियों' (Biodiversity Management Committees - BMCs) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जिनका प्रमुख कार्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौधों और पशुओं की नस्लों, सूक्ष्मजीवों और पारंपरिक ज्ञान से संबंधित 'लोक जैव विविधता रजिस्टरों' (People's Biodiversity Registers - PBRs) को तैयार करना और उनका रखरखाव करना है।
3. जैव विविधता अधिनियम के अंतर्गत किसी भी भारतीय नागरिक, कंपनी या संस्थान को देश के भीतर जैविक संसाधनों का उपयोग करने या उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान का व्यावसायिक लाभ उठाने के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है, भले ही वह व्यक्ति या संस्था भारत का मूल निवासी क्यों न हो।
→
हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है।
3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.