Civil services
Asked 2 months ago · Viewed 13 times
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और जैव विविधता संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की स्थापना 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के तहत चेन्नई, तमिलनाडु में एक सांविधिक (Statutory) और स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और जैव विविधता अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े मामलों को विनियमित करना है।
- 2. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत देश के प्रत्येक स्तर पर स्थानीय निकायों द्वारा 'जैव विविधता प्रबंधन समितियों' (Biodiversity Management Committees - BMCs) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जिनका प्रमुख कार्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौधों और पशुओं की नस्लों, सूक्ष्मजीवों और पारंपरिक ज्ञान से संबंधित 'लोक जैव विविधता रजिस्टरों' (People's Biodiversity Registers - PBRs) को तैयार करना और उनका रखरखाव करना है।
- 3. जैव विविधता अधिनियम के अंतर्गत किसी भी भारतीय नागरिक, कंपनी या संस्थान को देश के भीतर जैविक संसाधनों का उपयोग करने या उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान का व्यावसायिक लाभ उठाने के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है, भले ही वह व्यक्ति या संस्था भारत का मूल निवासी क्यों न हो।
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की स्थापना जैविक विविधता अधिनियम, 2002 (Biological Diversity Act, 2002) के अंतर्गत पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक एवं स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी, और इसका मुख्यालय चेन्नई में स्थित है। यह अधिनियम भारत के मप्र एवं रियो कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (CBD) के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए बनाया गया था।
कथन 2 सही है: अधिनियम की धारा 41 के अनुसार स्थानीय निकायों (जैसे पंचायत और नगर पालिकाएं) को अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर 'जैव विविधता प्रबंधन समितियों' (BMCs) का गठन करना अनिवार्य है। इन समितियों का मुख्य उत्तरदायित्व स्थानीय लोगों के परामर्श से 'लोक जैव विविधता रजिस्टर' (People's Biodiversity Registers - PBRs) तैयार करना है, जिसमें जैव संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण किया जाता है।
कथन 3 गलत है: जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अनुसार, भारत के नागरिकों, स्थानीय लोगों या समुदायों तथा भारत में पंजीकृत कंपनियों/संस्थानों को देश के भीतर जैविक संसाधनों का उपयोग करने या उनके अनुसंधान (Research) के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य *नहीं* है; यह पूर्व अनुमति और लाभ-बंटवारा (Access and Benefit Sharing - ABS) मुख्य रूप से विदेशी नागरिकों, विदेशी कंपनियों, अनिवासी भारतीयों (NRIs), या विदेशी नियंत्रित संस्थाओं पर लागू होता है, हालांकि भारतीय नागरिकों को व्यावसायिक उपयोग के लिए राज्य जैव विविधता बोर्डों (SSBBs) को केवल सूचित करना होता है, न कि हर मामले में NBA से पूर्व अनुमति लेनी पड़ती है। अतः कथन 3 गलत है।
अगला प्रश्न →
भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) और…
← पिछला प्रश्न
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय…
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'वित्तीय संबंधों' (Financial Relations - Articles 268-293) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 268 के तहत कुछ ऐसे शुल्क (जैसे औषधीय और प्रसाधन तैयारियों पर उत्पाद शुल्क) हैं, जिन्हें संघ द्वारा लगाया और कलेक्ट किया जाता है, किंतु उनका संग्रहण उस राज्य के भीतर से होने के कारण उस राजस्व का पूर्ण हिस्सा उस संबंधित राज्य को ही सौंप दिया जाता है।
2. अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघ द्वारा लगाए और संगृहीत किए जाने वाले सभी कर और शुल्क (कुछ विशिष्ट उपकरों, सरचार्ज आदि को छोड़कर) केंद्र और राज्यों के बीच 'वित्त आयोग' (Finance Commission) की सिफारिशों के आधार पर वितरित किए जाते हैं, और इस प्रकार प्राप्त होने वाला राजस्व भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) का हिस्सा नहीं बनता है।
3. अनुच्छेद 275 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ से उन राज्यों को वित्तीय सहायता (Grants-in-aid) दे, जिन्हें संसद की दृष्टि में वित्तीय सहायता की आवश्यकता है, तथा असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के कल्याण के लिए इस अनुच्छेद के अंतर्गत अनिवार्य रूप से विशेष अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, 'हरित सकल घरेलू उत्पाद' (Green GDP) और 'पर्यावरणीय लेखांकन' (Environmental Accounting) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित सकल घरेलू उत्पाद (Green GDP) किसी अर्थव्यवस्था के कुल उत्पादन का वह माप है जो पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में से प्राकृतिक संसाधनों के क्षय (Depletion of natural resources) और पर्यावरण प्रदूषण के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान (Environmental degradation costs) को घटाकर प्राप्त किया जाता है।
2. 'संयुक्त राष्ट्र' की 'सीवेज' (SEEA - System of Environmental-Economic Accounting) रूपरेखा पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानक है, जो आर्थिक और पर्यावरणीय डेटा को एकीकृत करके सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति को मापने में सहायता करती है।
3. पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की तुलना में Green GDP का उच्च होना इस बात का प्रतीक होता है कि देश में आर्थिक विकास पर्यावरण की कीमत पर तीव्र गति से हो रहा है और प्राकृतिक पूंजी का बड़े पैमाने पर क्षरण हो रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - Articles 324-329A) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार संसद, राज्य legislatures, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति एक 'निर्वाचन आयोग' (Election Commission) में निहित है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं जितने राष्ट्रपति समय-समय पर निर्धारित करें।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना कभी नहीं हटाया जा सकता।
3. अनुच्छेद 326 के अंतर्गत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के लिए निर्वाचन 'वयस्क मताधिकार' (Adult Suffrage) के आधार पर होते हैं, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति जो भारत का नागरिक है और कानून द्वारा निर्धारित न्यूनतम आयु (वर्तमान में 18 वर्ष) प्राप्त कर चुका है, वह किसी भी आधार पर (जैसे धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान) मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' के अंतर्गत 'पंचायतों' (Panchayats - Articles 243-243O) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंचायतों से संबंधित प्रावधानों को 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, जिसके तहत संविधान में 'भाग IX' और 'ग्यारहवीं अनुसूची' (Eleventh Schedule) को अंतःस्थापित किया गया, जिसमें पंचायतों की कार्यप्रणाली के लिए 29 विशिष्ट विषयों को शामिल किया गया है।
2. इस भाग के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर तीन-स्तरीय (Three-tier) पंचायत प्रणाली का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु बीस लाख से कम जनसंख्या वाले किसी राज्य के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह मध्यवर्ती स्तर की पंचायत का गठन करे।
3. पंचायतों की सभी स्तरों की कुल सीटों में से कम-से-कम एक-तिहाई (33%) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होनी अनिवार्य हैं, तथा यह आरक्षण केवल प्रत्यक्ष रूप से चुने जाने वाले सदस्यों तक सीमित है, न कि पंचायतों के अध्यक्षों (Chairpersons) के पदों पर।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है।
3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.