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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं राष्ट्रीय आय के संदर्भ में, 'सकल घरेलू उत्पाद' (Gross Domestic Product - GDP) और 'सकल राष्ट्रीय उत्पाद' (Gross National Product - GNP) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की घरेलू सीमा के भीतर एक वर्ष की अवधि में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है, तथा इसमें देश के नागरिकों के साथ-साथ देश के भीतर कार्यरत विदेशी नागरिकों और कंपनियों द्वारा अर्जित आय भी शामिल होती है।
- 2. सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) की गणना करते समय GDP में विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय (Net Factor Income from Abroad - NFIA) को जोड़ा जाता है, जहाँ NFIA का अर्थ भारतीय नागरिकों द्वारा विदेशों में अर्जित आय और भारत में कार्यरत विदेशियों द्वारा अपने देश भेजी गई आय के बीच का अंतर है।
- 3. भारत के संदर्भ में, सामान्यतः 'सकल घरेलू उत्पाद' (GDP) का आकार 'सकल राष्ट्रीय उत्पाद' (GNP) के आकार से अधिक होता है, क्योंकि भारत में विदेशी नागरिकों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भेजी जाने वाली धनराशियां (Remittances), विदेशों में रह रहे भारतीयों द्वारा भारत भेजे जाने वाले प्रेषणों की तुलना में हमेशा बहुत अधिक होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: GDP किसी देश की भौगोलिक सीमा (Domestic Territory) के भीतर उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य है। इसमें देश के भीतर काम करने वाले सभी व्यक्तियों (चाहे वे भारतीय हों या विदेशी) की आय शामिल होती है।
कथन 2 सही है: GNP = GDP + विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय (NFIA)। NFIA देश के नागरिकों द्वारा विदेश में अर्जित कारक आय और विदेशियों द्वारा देश में अर्जित कारक आय का अंतर होता है।
कथन 3 गलत है: भारत के संदर्भ में, विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय (NFIA) ऋणात्मक (Negative) होती है, क्योंकि भारत में विदेशी निवेशकों और कंपनियों को जाने वाला भुगतान, विदेशों में कार्यरत भारतीयों द्वारा भारत भेजे जाने वाले प्रेषणों (Remittances) की तुलना में अधिक है या कुल मिलाकर भारत की GNP, GDP से कम होती है (क्योंकि NFIA ऋणात्मक होता है)। इसलिए GDP, GNP से अधिक नहीं बल्कि GNP, GDP से कम होती है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) और उसकी न्यायिक समीक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति कार्यपालिका की कार्यकारी शक्ति का विस्तार है, जिसका प्रयोग वह मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना अपने स्वविवेक से कर सकती है।
2. 'एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) बनाम भारत संघ' या ऐतिहासिक 'ईश्वर सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' तथा 'केहर सिंह बनाम भारत संघ (1989)' मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति की न्यायिक समीक्षा पूरी तरह से वर्जित है और इसके आदेशों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने हाल के निर्णयों में यह प्रतिपादित किया है कि यदि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका पर निर्णय लेने में अत्यधिक, अनपेक्षित और अमानवीय देरी की जाती है, तो इस प्रक्रियागत देरी (Procedural Delay) के आधार पर मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, वर्ष 1928 में प्रस्तुत 'नेहरू रिपोर्ट' (Nehru Report) की संस्तुतियों और उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में तैयार की गई इस रिपोर्ट में भारत के लिए पूर्ण स्वायत्तता या पूर्ण स्वराज्य (Complete Independence) के लक्ष्य की मांग की गई थी, जिसे ब्रिटिश संसद द्वारा बिना किसी संशोधन के स्वीकार कर लिया गया था।
2. इस रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संयुक्त निर्वाचन क्षेत्रों (Joint Electorates) का प्रस्ताव किया गया था, और मुसलमानों के लिए किसी भी प्रकार के पृथक् निर्वाचन (Separate Electorates) की मांग को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया गया था, यद्यपि जनसंख्या के आधार पर अल्पसंख्यकों के लिए सीटें आरक्षित करने का सुझाव दिया गया था।
3. नेहरू रिपोर्ट के जवाब में युवा राष्ट्रवादी नेताओं जैसे जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ने 'इन्डिपेपेंडेंस फॉर इंडिया लीग' (Independence for India League) की स्थापना की क्योंकि वे डोमिनियन स्टेटस (Dominion Status) के प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' के अंतर्गत केंद्र सरकार के कर्तव्यों और राज्यों में 'आपातकालीन प्रावधानों' के अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 355 केंद्र सरकार पर यह संवैधानिक कर्तव्य आरोपित करता है कि वह बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार इस संविधान के उपबंधों के अनुसार ही चलाई जा रही है।
2. ऐतिहासिक 'एस.आर. बोम्मय बनाम भारत संघ (1994)' मामले के निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि अनुच्छेद 355 के अंतर्गत 'आंतरिक अशांति' या 'संवैधानिक मशीनरी की विफलता' का मूल्यांकन करने और राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) लागू करने की केंद्र की शक्ति पूर्णतः अविवेकी (Absolute and Immune from Judicial Review) है।
3. यदि कोई राज्य सरकार अनुच्छेद 355 के तहत केंद्र द्वारा दिए गए किसी वैध निर्देश का पालन करने में असफल रहती है, तो केंद्र सरकार के पास इस आधार पर अनुच्छेद 356 का प्रयोग करके उस राज्य की मंत्रिपरिषद को बर्खास्त करने और राष्ट्रपति शासन लागू करने की संवैधानिक शक्ति प्राप्त हो जाती है, जैसा कि अनुच्छेद 365 में प्रावधानित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, 'हरित सकल घरेलू उत्पाद' (Green GDP) और 'पर्यावरणीय लेखांकन' (Environmental Accounting) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित सकल घरेलू उत्पाद (Green GDP) किसी अर्थव्यवस्था के कुल उत्पादन का वह माप है जो पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में से प्राकृतिक संसाधनों के क्षय (Depletion of natural resources) और पर्यावरण प्रदूषण के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान (Environmental degradation costs) को घटाकर प्राप्त किया जाता है।
2. 'संयुक्त राष्ट्र' की 'सीवेज' (SEEA - System of Environmental-Economic Accounting) रूपरेखा पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानक है, जो आर्थिक और पर्यावरणीय डेटा को एकीकृत करके सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति को मापने में सहायता करती है।
3. पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की तुलना में Green GDP का उच्च होना इस बात का प्रतीक होता है कि देश में आर्थिक विकास पर्यावरण की कीमत पर तीव्र गति से हो रहा है और प्राकृतिक पूंजी का बड़े पैमाने पर क्षरण हो रहा है।
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