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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों (Centre-State Legislative Relations) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार, संसद को संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, तथा संसद द्वारा बनाए गए कानून इस आधार पर अवैध नहीं ठहराए जा सकते कि उनका बहिर्क्षेत्रीय प्रवर्तन (Extraterritorial Operation) है।
  2. 2. अनुच्छेद 249 के तहत यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित करती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को देश के संपूर्ण राज्य क्षेत्र के लिए उस विषय पर विधि बनाने की शक्ति मिल जाती है, और यह संकल्प अनिश्चित काल तक प्रभावी रहता है जब तक कि राज्य सभा इसे रद्द नहीं करती।
  3. 3. जब किसी राज्य में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू होता है, तब उस राज्य की विधायिका की विधि निर्माण की शक्तियाँ संसद में निहित हो जाती हैं, तथा राष्ट्रपति शासन समाप्त होने के बाद संसद द्वारा बनाए गए ऐसे कानून तब तक प्रभावी रहते हैं जब तक संबंधित राज्य विधानमंडल द्वारा उन्हें स्पष्ट रूप से निरस्त नहीं कर दिया जाता।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार, संसद भारत के संपूर्ण क्षेत्र या उसके किसी हिस्से के लिए कानून बना सकती है। संसद के कानूनों को इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि उनका बहिर्क्षेत्रीय प्रवर्तन (Extraterritorial operation) है, अर्थात् वे कानून जो भारत के बाहर के क्षेत्रों पर भी प्रभाव डालते हैं, वैध हैं। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा के संकल्प द्वारा संसद को राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने की शक्ति मिलती है, किंतु ऐसा प्रत्येक संकल्प एक बार में अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए ही प्रभावी रहता है, हालांकि इसे आवश्यकतानुसार आगे बढ़ाया जा सकता है (यह अनिश्चित काल तक अपने आप प्रभावी नहीं रहता)। कथन 3 गलत है: राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) के दौरान संसद को राज्य सूची पर कानून बनाने की शक्ति मिलती है, किंतु राष्ट्रपति शासन के समाप्त होने या समाप्त होने के बाद संसद द्वारा बनाए गए ऐसे कानून स्वतः निष्प्रभावी नहीं होते, बल्कि वे तब तक प्रभावी रहते हैं जब तक कि संबंधित राज्य विधानमंडल द्वारा उन्हें परिवर्तित, निरस्त या संशोधित नहीं किया जाता। हालांकि, यहाँ 'जब तक निरस्त नहीं किया जाता' शब्द भ्रामक हो सकते हैं, किंतु मुख्य रूप से अनुच्छेद 249 की समयासीमा और राष्ट्रपति शासन के विधायी प्रभाव के तकनीकी पहलुओं के संदर्भ में कथन 2 और 3 गलत हैं।
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