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भारतीय इतिहास के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान मुद्रा प्रणाली, बाजार नियंत्रण और आर्थिक सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सल्तनत काल में इल्तुतमिश ने सबसे पहले शुद्ध अरबी सिक्कों की शुरुआत की थी, जिसके तहत उसने चांदी का 'टका' (Tanka) और तांबे का 'जीतल' (Jital) प्रचलन में लाया, तथा इन दोनों सिक्कों के बीच निश्चित विनिमय दर स्थापित की।
  2. 2. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा लागू की गई बाजार नियंत्रण नीति का मुख्य उद्देश्य अपनी एक विशाल और स्थायी सेना को कम वेतन पर बनाए रखना था, जिसके लिए उसने बाजार में खाद्यान्न, वस्त्र, घोड़ों और दासों के मूल्य तय करने के साथ-साथ 'दीवान-ए-रियासत' (Diwan-i-Riyasat) और 'शहना-ए-मंडी' (Shahna-i-Mandi) नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी।
  3. 3. मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा शुरू की गई 'प्रतीक मुद्रा' (Token Currency) योजना अपनी दूरदर्शिता और व्यापक सफलता के कारण सल्तनत काल की सबसे बड़ी आर्थिक उपलब्धि मानी जाती है, क्योंकि उसने सोने और चांदी की कमी से निपटने के लिए तांबे और पीतल के सिक्के चलाए जिन्हें लोगों ने पूरी ईमानदारी से स्वीकार किया और कभी जाली सिक्के नहीं बनाए गए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इल्तुतमिश ने सबसे पहले शुद्ध अरबी सिक्कों का प्रचलन किया। उसने चांदी का 'टका' और तांबे का 'जीतल' चलाया, जो सल्तनत काल की मानक मुद्रा प्रणाली का आधार बने। कथन 2 सही है: अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण नीति का मुख्य उद्देश्य कम वेतन में एक विशाल सेना का रखरखाव करना था। उसने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कठोर उपाय किए और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' जैसे अधिकारियों की नियुक्ति की। कथन 3 गलत है: मुहम्मद बिन तुगलक की प्रतीक मुद्रा (Token Currency) योजना सल्तनत काल की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक थी। तांबे और कांस्य के सिक्के चलाने के इस प्रयोग में सरकार टक्साल पर नियंत्रण नहीं रख पाई, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर जाली सिक्के (Counterfeit coins) ढाले जाने लगे और पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा गई।
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