Civil services
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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व शब्दावली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सल्तनत काल में 'इक्ता' (Iqta) व्यवस्था एक प्रकार का राजस्व वितरण तंत्र था, जिसके तहत सैन्य कमांडरों और गवर्नरों (जिन्हें मुक्ती या वली कहा जाता था) को विशिष्ट क्षेत्र आवंटित किए जाते थे, और वे इन क्षेत्रों से राजस्व एकत्र करके अपने सैनिकों का वेतन भुगतान करने के बाद शेष राशि (जिसे 'फवाजिल' कहा जाता था) केंद्रीय राजकोष में जमा करते थे।
- 2. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में कृषि भूमि की पैमाइश के आधार पर लगान निर्धारण की प्रणाली को अनिवार्य किया गया था, तथा इस दौरान 'बिसवा' को भूमि की माप की इकाई के रूप में प्रयोग किया जाता था, और किसानों से सीधे कर वसूलने के लिए 'मुकद्दम', 'खुट' और 'चौधरी' जैसे ग्रामीण मध्यस्थों के विशेष अधिकारों और रियायत समाप्त कर दी गई थीं।
- 3. सल्तनत काल में भू-राजस्व के अतिरिक्त गैर-मुसलमानों से वसूले जाने वाले धार्मिक कर को 'जकात' कहा जाता था, जबकि युद्ध के दौरान लूटी गई संपत्ति (गनीमत) में से सुल्तान का हिस्सा चार-फिफ्थ (80%) होता था और शेष एक-फिफ्थ (20%) भाग सैनिकों में वितरित किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: सल्तनत काल में इक्ता प्रणाली प्रशासनिक और राजस्व संग्रह की एक प्रमुख पद्धति थी। मुक्ती या वली इसके प्रभारी होते थे, जो राजस्व वसूलकर सेना का खर्च चलाने के बाद बचा हुआ अतिरिक्त धन ('फवाजिल') केंद्रीय खजाने में जमा करते थे।
कथन 2 सही है: अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी राजस्व नीतियों के तहत पैमाइश (विश्व/बिसवा इकाई के रूप में) को अनिवार्य किया और खुद, मुकद्दम व चौधरी जैसे ग्रामीण मध्यस्थों के विशेषाधिकारों को छीन लिया ताकि किसानों से सीधे कर वसूला जा सके।
कथन 3 गलत है: 'जकात' मुसलमानों से उनकी संपत्ति का एक निश्चित प्रतिशत (धार्मिक कर्तव्य के रूप में) लिया जाने वाला दान/कर था, जबकि गैर-मुसलमानों से 'जिज़िया' कर वसूला जाता था। इसके अलावा, युद्ध की लूट (गनीमत) का नियम इसके विपरीत था—सुल्तान का हिस्सा एक-फिफ्थ (20%) होता था और चार-फिफ्थ (80%) भाग सैनिकों में बांटा जाता था (शरियत के अनुसार, हालांकि अलाउद्दीन और मुहम्मद बिन तुगलक ने इसे उलट दिया था, परंतु सामान्य परिभाषा के अनुसार भी गनीमत का मुख्य हिस्सा सैनिकों का होता था और जकात की परिभाषा यहाँ अशुद्ध है)। अतः कथन 3 गलत है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के…
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, महासागरीय धाराओं (Ocean Currents) को प्रभावित करने वाले कारकों और 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) जैसी प्रमुख धाराओं की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति और उनकी दिशा मुख्य रूप से प्रचलित हवाओं (Prevailing Winds), पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न कोरिओलिस बल (Coriolis Force), महाद्वीपीय तटरेखाओं के अवरोध तथा जल के घनत्व (Density) में भिन्नता से निर्धारित होती है।
2. उत्तरी अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होने वाली 'गल्फ स्ट्रीम' एक ठंडी जलधारा है, जो मैक्सिको की खाड़ी से उत्पन्न होकर उत्तर की ओर बहती है और ब्रिटिश द्वीपों के पश्चिमी तट तक पहुँचकर वहाँ के तापमान को अत्यधिक ठंडा कर देती है।
3. पृथ्वी के घूर्णन के कारण कोरिओलिस बल के प्रभाव से महासागरीय धाराएँ उत्तरी गोलार्ध में अपनी मूल दिशा से दाईं ओर (Clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Anti-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) और लोक सेवाओं से संबंधित प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर देती है कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो संसद विधि द्वारा एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं (जिनमें न्यायिक सेवा भी शामिल हो सकती है) के सृजन का उपबंध कर सकती है।
2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और यद्यपि वे केंद्र सरकार के नियंत्रण में विभिन्न संवर्गों (Cadres) में कार्य करते हैं, तथापि उन्हें किसी भी राज्य सरकार द्वारा बिना राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति के सेवा से बर्खास्त (Dismiss) या पदच्युत किया जा सकता है।
3. अनुच्छेद 315 के तहत संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग (UPSC) और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का प्रावधान किया गया है, तथा संविधान यह भी अनुमति देता है कि दो या अधिक राज्य सहमत हों तो संसद कानून द्वारा उन राज्यों के लिए एक संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) का गठन कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों और 'अवशिष्ट शक्तियों' (Residuary Powers) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार, संसद को किसी भी ऐसे विषय के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में शामिल नहीं है, और इस अवशिष्ट विधायी शक्ति के अंतर्गत कर लगाने (Taxation) से संबंधित विषय शामिल नहीं किए गए हैं।
2. कनाडा के संविधान के विपरीत, जहाँ अवशिष्ट शक्तियाँ प्रांतीय (राज्य) सरकारों में निहित हैं, भारतीय संविधान में अवशिष्ट शक्तियों को केंद्र सरकार (संसद) में निहित किया गया है, जो भारत के अर्ध-संघीय (Quasi-federal) स्वरूप को और अधिक सुदृढ़ करती है।
3. भारत सरकार अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935) के अंतर्गत भी अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ गवर्नर-जनरल के अधीन थीं, न कि प्रांतीय विधानमंडलों के पास, और भारतीय संविधान निर्माताओं ने इसी ऐतिहासिक प्रशासनिक निरंतरता को ध्यान में रखते हुए केंद्र को अवशिष्ट शक्तियाँ प्रदान की हैं।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन' (NMCG) और 'नमामि गंगे कार्यक्रम' के प्रावधानों और संस्थागत तंत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की स्थापना 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986' के अंतर्गत वर्ष 2011 में एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में की गई थी, जिसे बाद में 'राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण' (NGRBA) के स्थान पर गठित 'राष्ट्रीय गंगा परिषद' (National Ganga Council) के समग्र नियंत्रण और अधीक्षण के अधीन रखा गया है।
2. 'नमामि गंगे कार्यक्रम' एक समेकित केंद्रीय क्षेत्र की पहल (Central Sector Initiative - 100% funding by Central Government) है, जिसका उद्देश्य गंगा नदी के प्रदूषण को प्रभावी ढंग से समाप्त करना तथा उसके संरक्षण और पुनर्जीवन को सुनिश्चित करना है, और इसके तहत नदी बेसिन में किसी भी राज्य सरकार या स्थानीय निकाय को वित्तीय सहायता प्रदान करने का कोई प्रावधान नहीं है।
3. राष्ट्रीय गंगा परिषद (NGC), जिसकी अध्यक्षता देश के प्रधानमंत्री करते हैं, गंगा नदी बेसिन के प्रदूषण निवारण और पुनर्जीवन से संबंधित मामलों की समीक्षा के लिए सर्वोच्च नीति निर्माण निकाय है, और इसके सदस्यों में संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्रालयों के मंत्री शामिल होते हैं।
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हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है।
3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए।
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