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भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'मूल्य संवर्धन कर' (Value Added Tax - VAT) और 'वस्तु एवं सेवा कर' (Goods and Services Tax - GST) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मूल्य संवर्धन कर (VAT) एक बहु-बिंदु कर प्रणाली थी जिसमें कर के ऊपर कर (Cascading Effect / Tax on Tax) लगने की समस्या का पूरी तरह से समाधान हो गया था क्योंकि इसके तहत विनिर्माण से लेकर खुदरा बिक्री तक के प्रत्येक चरण पर भुगतान किए गए कर का पूर्ण इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit - ITC) हर स्थिति में अंतर-राज्यीय व्यापार के दौरान भी उपलब्ध होता था।
  2. 2. भारत में 'वस्तु एवं सेवा कर' (GST) को लागू करने के लिए संविधान में '101वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2016' पारित किया गया, जिसके अंतर्गत संविधान में अनुच्छेद 246A जोड़ा गया, जो संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों को वस्तुओं या सेवाओं पर कर लगाने की समवर्ती शक्ति प्रदान करता है।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 279A के प्रावधानों के अंतर्गत गठित 'GST परिषद्' (GST Council) एक संवैधानिक निकाय है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं, और इसमें प्रत्येक राज्य के वित्त मंत्री या कर मंत्री इसके सदस्य होते हैं, तथा परिषद् में कोई भी निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा लिया जाता है, जिसमें केंद्र का मत भार (Weightage) कुल डाले गए मतों का एक-तिहाई और राज्यों का दो-तिहाई होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: वैट (VAT) प्रणाली ने पारंपरिक बिक्री कर (Sales Tax) प्रणाली की तुलना में कर-पर-कर (Cascading Effect) को काफी हद तक कम किया था, किंतु यह व्यवस्था अंतर-राज्यीय व्यापार (Inter-state trade) के मामलों में पूरी तरह प्रभावी नहीं थी। अंतर-राज्यीय बिक्री पर केंद्रीय बिक्री कर (CST) लगता था जिसका इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ आसानी से नहीं मिल पाता था, जिससे कैस्केडिंग प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था। कथन 2 सही है: भारत में 'वस्तु एवं सेवा कर' (GST) को लागू करने के लिए '101वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2016' पारित किया गया। इसके तहत संविधान में नया अनुच्छेद 246A जोड़ा गया, जो संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों को (केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं सहित) वस्तु या सेवाओं पर कर लगाने की समवर्ती शक्ति (Concurrent Power) प्रदान करता है, सिवाय अंतर-राज्यीय व्यापार के जिस पर केवल संसद कानून बनाती है (अनुच्छेद 269A)। कथन 3 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत स्थापित 'GST परिषद्' एक संवैधानिक निकाय है जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं। परिषद् में निर्णय लेने की प्रक्रिया के संबंध में यह प्रावधान है कि प्रत्येक निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम तीन-चौथाई (75%) बहुमत से लिया जाता है, न कि दो-तिहाई बहुमत से। इसके अलावा, केंद्रीय मत का भार कुल डाले गए मतों का एक-तिहाई (1/3) और सभी राज्यों के मतों का भार कुल डाले गए मतों का दो-तिहाई (2/3) होता है।
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