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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'केंद्र-राज्य विधायी संबंधों' (Centre-State Legislative Relations) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अंतर्गत संसद को संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि उनका बहिःक्षेत्रीय प्रभाव (Extraterritorial Operation) है।
- 2. संविधान की सातवीं अनुसूची के 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) के किसी विषय पर यदि संसद द्वारा बनाया गया कोई कानून और किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाया गया कोई कानून आपस में संघर्ष की स्थिति में आते हैं, तो संसद द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होगा, भले ही राज्य के कानून को राष्ट्रपति की स्वीकृति पहले प्राप्त हो चुकी हो।
- 3. अनुच्छेद 249 के प्रावधानों के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर यह घोषित करती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में प्रयुक्त किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर पूरे देश के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: अनुच्छेद 245 के अनुसार, संसद भारत के संपूर्ण क्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए कानून बना सकती है। संसद के कानून को इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि उसका बहिःक्षेत्रीय प्रभाव (Extraterritorial Operation) है यानी वह देश के बाहर के क्षेत्रों पर भी लागू होता है।
कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 254 के अनुसार, समवर्ती सूची के किसी विषय पर संसद और राज्य विधान-मंडल दोनों कानून बना सकते हैं। यदि दोनों के बीच असंगति होती है, तो संसदीय कानून राज्य के कानून पर प्रभावी होता है। परंतु, यदि राज्य का कानून किसी ऐसे विषय पर है और उसे विचार के लिए आरक्षित रखने के पश्चात राष्ट्रपति की अनुमति मिल जाती है, तो वह राज्य में उस विषय पर प्रभावी रहेगा (भले ही वह संसदीय कानून के विरुद्ध हो), बशर्ते संसद बाद में उसी विषय पर नया कानून बनाकर या संशोधन करके उसे निरस्त न कर दे।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 249 के अंतर्गत यदि राज्य सभा अपने उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित करती है, तो संसद को राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने की शक्ति मिलती है, लेकिन यह शक्ति 'पूरे देश के लिए' नहीं बल्कि संकल्प में विनिर्दिष्ट क्षेत्र या संपूर्ण देश के लिए हो सकती है, तथापि इस अनुच्छेद की मूल भाषा के अनुसार यह राष्ट्रीय हित में राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने का अधिकार प्रदान करता है, किंतु यहाँ 'केवल 1' सही है क्योंकि अनुच्छेद 249 के अंतर्गत राज्य सभा द्वारा पारित संकल्प एक वर्ष से अधिक प्रभावी नहीं रहता है (यद्यपि इसे आगे बढ़ाया जा सकता है), और इस संदर्भ में कथन 3 में आंशिक तकनीकी त्रुटि है। अतः केवल कथन 1 पूरी तरह सही है।
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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में वर्ष 1928 में प्रस्तुत 'नेहरू रिपोर्ट' (Nehru Report) के प्रावधानों और उससे संबंधित राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में तैयार की गई इस रिपोर्ट में भारत के लिए पूर्ण स्वायत्तता (Complete Independence) के स्थान पर 'ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत डोमिनियन स्टेटस' (Dominion Status) की मांग की गई थी, जिसका जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा नेताओं द्वारा तीव्र विरोध किया गया था।
2. इस रिपोर्ट में सांप्रदायिक निर्वाचन क्षेत्रों (Separate Electorates) को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया गया था और इसके स्थान पर केवल मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए आबादी के अनुपात में सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया था, जिसे जिन्ना द्वारा अपनी 'चौदह सूत्रीय मांग' (Fourteen Points) के माध्यम से स्वीकार कर लिया गया था।
3. मौलिक अधिकारों के संबंध में इस रिपोर्ट में पहली बार एक लिखित रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी, जिसके तहत वयस्क मताधिकार (Universal Adult Suffrage), पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मांग की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - अनुच्छेद 324 से 329A) तथा चुनाव सुधारों से संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार संसद, राज्य legislatures, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति एक 'निर्वाचन आयोग' (Election Commission) में निहित होगी, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर निर्धारित अन्य निर्वाचन आयुक्तों से मिलकर यह आयोग बनता है, और मूल संविधान में इसे एक बहु-सदस्यीय निकाय (Multi-member body) के रूप में स्थापित किया गया था।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, किंतु अन्य निर्वाचन आयुक्तों या प्रादेशिक आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 329 के अनुसार निर्वाचन मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक (Bar to interference by courts in electoral matters) लगाई गई है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानसभा के चुनाव के लिए किसी भी निर्वाचन को केवल 'निर्वाचन याचिका' (Election Petition) के माध्यम से ही उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, जिसे किसी अन्य सामान्य अदालत में सीधे प्रश्नगत नहीं किया जा सकता।
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