BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
5 views

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में वर्ष 1928 में प्रस्तुत 'नेहरू रिपोर्ट' (Nehru Report) के प्रावधानों और उससे संबंधित राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में तैयार की गई इस रिपोर्ट में भारत के लिए पूर्ण स्वायत्तता (Complete Independence) के स्थान पर 'ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत डोमिनियन स्टेटस' (Dominion Status) की मांग की गई थी, जिसका जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा नेताओं द्वारा तीव्र विरोध किया गया था।
  2. 2. इस रिपोर्ट में सांप्रदायिक निर्वाचन क्षेत्रों (Separate Electorates) को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया गया था और इसके स्थान पर केवल मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए आबादी के अनुपात में सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया था, जिसे जिन्ना द्वारा अपनी 'चौदह सूत्रीय मांग' (Fourteen Points) के माध्यम से स्वीकार कर लिया गया था।
  3. 3. मौलिक अधिकारों के संबंध में इस रिपोर्ट में पहली बार एक लिखित रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी, जिसके तहत वयस्क मताधिकार (Universal Adult Suffrage), पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मांग की गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: नेहरू रिपोर्ट (1928) ने भारत के लिए 'डोमिनियन स्टेटस' की मांग की थी। उस समय कांग्रेस के भीतर जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा और आमूल-चूल परिवर्तनवादी नेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया था क्योंकि वे 'पूर्ण स्वराज्य' (Complete Independence) से कम कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। कथन 2 गलत है: नेहरू रिपोर्ट में सांप्रदायिक निर्वाचन क्षेत्रों को खारिज कर दिया गया था और केवल संयुक्त निर्वाचन क्षेत्रों (Joint Electorates) में अल्पसंख्यकों के लिए आबादी के आधार पर सीटों के आरक्षण की बात कही गई थी, लेकिन मुहम्मद अली जिन्ना ने इस रिपोर्ट का पुरजोर विरोध किया था और अपनी 'चौदह सूत्रीय मांग' (1929) में पृथक निर्वाचन क्षेत्रों की मांग को फिर से प्रमुखता से रखा था। कथन 3 सही है: नेहरू रिपोर्ट में पहली बार भारत के भावी संविधान के लिए एक 'डिफ़ाइन' मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) की सूची की वकालत की गई थी, जिसमें वयस्क मताधिकार, महिला समानता और स्वतंत्रता के अधिकार शामिल थे।
Share:

Related Questions

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की 'रिट अधिकारक्षेत्र' (Writ Jurisdiction) तथा 'सार्वजनिक हित याचिका' (PIL) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को केवल 'मूल अधिकारों' (Fundamental Rights) के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह इसका एक मूल अधिकार क्षेत्र (Original Jurisdiction) है, जिसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों के हनन होने पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। 2. 'लोकूश कुमार बनाम बिहार राज्य' या ऐतिहासिक 'पी. एन. भगवती' के दौर की न्यायिक सक्रियता के परिणामों के तहत, भारत में 'सार्वजनिक हित याचिका' (PIL) की अवधारणा को विकसित किया गया, जिसके अंतर्गत 'लोकस स्टैंडी' (Locus Standi - यानी मुकदमेबाजी का अधिकार) के पारंपरिक कठोर नियम को शिथिल किया गया, जिससे किसी भी जनहितैषी व्यक्ति या संस्था द्वारा समाज के उपेक्षित और असहाय वर्गों की ओर से अदालत में याचिका दायर की जा सके। 3. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 32 के तहत प्रदत्त रिट अधिकारक्षेत्र सर्वोच्च न्यायालय की 'संविधान की मूल संरचना' (Basic Structure) का एक अभिन्न अंग है, और संसद द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से भी सर्वोच्च न्यायालय की इस शक्ति को छीना या समाप्त नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986' (Environment (Protection) Act, 1986) और इसके अंतर्गत विहित शक्तियों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 को वर्ष 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के तुरंत बाद और संयुक्त राष्ट्र की स्टॉकहोम मानव पर्यावरण संगोष्ठी (1972) के निर्णयों को कार्यान्वित करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 253 के तहत संसद द्वारा अधिनियमित किया गया था। 2. इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार को देश में पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार करने तथा प्रदूषण को रोकने, नियंत्रित करने और कम करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने की व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं, जिसमें किसी भी उद्योग, संचालन या प्रक्रिया को विनियमित या प्रतिबंधित करना भी शामिल है। 3. इस अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा स्थापित 'राष्ट्रीय तटीय जोन प्रबंधन प्राधिकरण' (NCZMA) और इसके अधीन राज्य प्राधिकरणों को देश के तटीय क्षेत्रों में तटीय विनियमन जोन (CRZ) अधिसूचना के उल्लंघन से संबंधित मामलों में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने या आपराधिक अभियोजन शुरू करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके आदेशों के विरुद्ध किसी भी सिविल न्यायालय में वाद दायर किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, 'संसद की वित्तीय समितियों' (Financial Committees) — अर्थात् प्राक्कलन समिति (Estimates Committee), लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) और सार्वजनिक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) — के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लोक लेखा समिति में कुल 30 सदस्य होते हैं, जिनमें से 20 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के आधार पर एकल संक्रमणीय मत द्वारा चुने जाते हैं, तथा इस समिति का अध्यक्ष हमेशा विपक्षी दल से ही नियुक्त किया जाना संविधान द्वारा अनिवार्य किया गया है। 2. प्राक्कलन समिति देश की सबसे बड़ी वित्तीय समिति है जिसमें 30 सदस्य होते हैं और इसके सभी 30 सदस्य केवल लोकसभा से ही निर्वाचित होते हैं; इसमें राज्यसभा को कोई प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं होता है, तथा इस समिति का मुख्य कार्य बजट में अनुमानित खर्चों की जांच करना और सार्वजनिक व्यय में मितव्ययिता लाने के लिए सुझाव देना है। 3. सार्वजनिक उपक्रम समिति का गठन वर्ष 1964 में कृष्ण मेनन समिति की संस्तुति पर किया गया था, जिसमें कुल 22 सदस्य (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से) होते हैं, और इस समिति का अध्यक्ष हमेशा राज्यसभा के सदस्यों में से ही चुना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पंचायतों - अनुच्छेद 243 से 243-O) और '73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में 'भाग IX' और 'ग्यारहवीं अनुसूची' जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकारों और उत्तरदायित्वों से संबंधित कुल 29 कार्यात्मक मदें (Functional items) शामिल हैं। 2. इस अधिनियम के तहत प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली की स्थापना का प्रावधान किया गया है, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन न करने की छूट दी गई है। 3. पंचायतों के सभी स्तरों पर अध्यक्ष (Chairperson) के पदों के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के वास्ते आरक्षण का प्रावधान किया गया है, तथा महिलाओं के लिए सभी स्तरों पर कुल सीटों और अध्यक्षों के पदों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई (33%) से कम न होने वाला आरक्षण अनिवार्य किया गया है, जिसमें एससी/एसटी महिलाओं के लिए उप-आरक्षण भी शामिल है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पंचायतों - अनुच्छेद 243 से 243O) और '73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान में 'ग्यारहवीं अनुसूची' जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों के प्रशासनिक नियंत्रण के लिए कुल 29 कार्यात्मक विषयों (Functional Items) का उल्लेख किया गया है, और इन विषयों पर विधि बनाकर पंचायतों को शक्ति प्रदान करना राज्यों के लिए अनिवार्य (Mandatory) कर दिया गया है। 2. इस अधिनियम के तहत प्रत्येक राज्य में पंचायतों के त्रि-स्तरीय (Three-tier) ढांचे का प्रावधान किया गया है, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर (Intermediate level) की पंचायत का गठन न करने की छूट दी गई है। 3. पंचायतों के सभी स्तरों पर प्रत्यक्ष चुनावों के माध्यम से भरे जाने वाले कुल स्थानों में से कम से कम एक-तिहाई (यानी 35 प्रतिशत) स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे, तथा यह आरक्षण अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.