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भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'सतत विकास लक्ष्य' (Sustainable Development Goals - SDGs) और 'बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Multidimensional Poverty Index - MPI) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में कुल 17 लक्ष्य और 169 लक्ष्य (Targets) शामिल हैं, जिन्हें वर्ष 2030 तक प्राप्त करने का वैश्विक लक्ष्य रखा गया है, और ये सभी लक्ष्य कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Binding) संधियाँ हैं जो सदस्य राष्ट्रों पर स्वतः लागू होती हैं।
  2. 2. नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा जारी किया जाने वाला 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक' स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन समान रूप से भारित आयामों के अंतर्गत आने वाले 12 संकेतकों (Indicators) पर आधारित होता है, जिसमें पोषण, स्कूली शिक्षा के वर्ष और बैंक खाता जैसे संकेतक शामिल हैं।
  3. 3. वैश्विक स्तर पर बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) का प्रकाशन संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड पावर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि सतत विकास लक्ष्य (SDGs) कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Binding) नहीं हैं, बल्कि ये स्वैच्छिक वैश्विक प्रतिबद्धताएँ हैं जिन्हें सदस्य राष्ट्रों को अपनी राष्ट्रीय नीतियों के माध्यम से प्राप्त करना होता है। कथन 2 सत्य है क्योंकि नीति आयोग का राष्ट्रीय MPI स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 3 मुख्य आयामों और 12 संकेतकों (जिसमें हाल ही में जोड़े गए मातृ स्वास्थ्य और जल जैसे संकेतक भी शामिल हैं) के आधार पर बहुआयामी गरीबों की पहचान करता है। कथन 3 सत्य है, वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) का प्रकाशन UNDP और OPHI द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।
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भारतीय राजव्यवस्था के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 161' के अंतर्गत 'राज्य के राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति' (Pardoning power of the Governor) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति की तरह राज्यपाल को भी किसी भी मामले में दी गई 'मृत्युदंड' (Death sentence) को माफ करने, कम करने या उसका परिहार करने की पूर्ण संवैधानिक शक्ति प्राप्त है, भले ही वह मामला राज्य सूची या समवर्ती सूची के अंतर्गत आता हो। 2. राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति का विस्तार उन सभी मामलों तक है जिन पर राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु राज्यपाल किसी 'सैन्य न्यायालय' (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड या सजा के मामले में क्षमादान की शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता है। 3. राज्यपाल द्वारा क्षमादान की शक्ति का प्रयोग करने का निर्णय पूरी तरह से उसका अपना स्वविवेक (Discretion) होता है, और इसके लिए उसे राज्य के मंत्रिपरिषद की सलाह या सहायता की कोई आवश्यकता नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? सुमेलित कीजिए: A-2 (जामा मस्जिद-शाहजहाँ), B-1 (सासाराम मकबरा-शेरशाह सूरी), C-3 (आगरा किला-अकबर), D-4 (पुराना किला-हुमायूँ/शेरशाह सूरी)। भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति' (Advisory Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि उसे प्रतीत हो कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है, जो सार्वजनिक महत्व का है, तो वह उस प्रश्न को विचार के लिए उच्चतम न्यायालय के पास परामर्श हेतु भेज सकता है। 2. उच्चतम न्यायालय के लिए यह अनिवार्य है कि वह राष्ट्रपति द्वारा परामर्श के लिए भेजे गए प्रत्येक मामले (चाहे वह संवैधानिक मामला हो या पूर्व-संविधान संधि से उत्पन्न विवाद) पर अपनी राय राष्ट्रपति को अवश्य दे। 3. उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 143 के अंतर्गत दी गई सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी नहीं होती है, और न ही यह सलाह भारत के अन्य न्यायालयों के लिए एक बाध्यकारी मिसाल (Binding Precedent) होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? विषुवत वृत्त (Equator) के संदर्भ में कौन सा कथन सही है? उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश का स्थानांतरण करने की शक्ति किसके पास है?
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