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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 243G' और '11वीं अनुसूची' के अंतर्गत 'पंचायती राज संस्थाओं' (PRIs) के विकेंद्रीकरण और वित्तीय स्वायत्तता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में जोड़े गए अनुच्छेद 243G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा 11वीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के कार्यान्वयन से संबंधित उत्तरदायित्व सौंपे गए हैं, किंतु इन विषयों पर कानून बनाने या कार्य सौंपने की शक्ति पूरी तरह से संसद के पास निहित है।
  2. 2. राज्य के वित्त आयोग (State Finance Commission) का गठन प्रत्येक पांच वर्ष की समाप्ति पर अनुच्छेद 243I के तहत राज्यपाल द्वारा किया जाता है, जिसका मुख्य कार्य राज्य और पंचायतों के बीच करों, शुल्कों, टोल और फीसों के शुद्ध प्राप्तियों के वितरण तथा पंचायतों को दिए जाने वाले अनुदानों के संबंध में राज्यपाल को संस्तुति करना है।
  3. 3. पंचायतों के खातों की लेखा परीक्षा (Audit of accounts) के संबंध में संविधान ने यह स्पष्ट प्रावधान किया है कि राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, पंचायतों द्वारा लेखे रखे जाने और उनकी लेखा परीक्षा किए जाने से संबंधित प्रावधान कर सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत पंचायतों को 11वीं अनुसूची के 29 विषयों पर कार्य सौंपने की शक्ति **राज्य के विधान-मंडल** को दी गई है, न कि संसद को। राज्य विधानसभाएं कानून बनाकर पंचायतों को स्वशासन की इकाइयां के रूप में कार्य करने के लिए शक्तियां और अधिकार प्रदान करती हैं। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 243I के अनुसार राज्यपाल प्रत्येक पांच वर्ष की समाप्ति पर एक वित्त आयोग का गठन करता है जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और करों के विभाजन एवं अनुदानों पर संस्तुति देता है। कथन 3 सत्य है; अनुच्छेद 243J के तहत राज्य का विधान-मंडल विधि द्वारा पंचायतों के खातों के रखरखाव और उनकी लेखा-परीक्षा (Audit) के लिए उपबंध कर सकता है।
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