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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, 'व्यक्तिगत सत्याग्रह' (Individual Satyagraha - 1940-41) के उद्देश्यों, उसकी रणनीति और ऐतिहासिक महत्व के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा ब्रिटिश सरकार के इस दावे को चुनौती देने के लिए की गई थी कि भारत के लोगों ने बिना किसी शर्त के द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश युद्ध प्रयासों का समर्थन किया है।
  2. 2. इस सत्याग्रह के तहत चुने जाने वाले सत्याग्रही को पहले से ही व्यापक पैमाने पर जनता को जुटाने (Mass mobilization) की अनुमति थी, ताकि ब्रिटिश विरोधी प्रदर्शनों से पूरे देश में एक साथ प्रशासनिक तंत्र ठप हो जाए।
  3. 3. आचार्य विनोबा भावे इस आंदोलन के पहले व्यक्तिगत सत्याग्रही थे, और जवाहरलाल नेहरू दूसरे सत्याग्रही थे, जिन्हें युद्ध के खिलाफ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: अगस्त प्रस्ताव (1940) के अस्वीकार होने के बाद और ब्रिटिश सरकार के इस दावे को चुनौती देने के लिए कि भारत ने स्वेच्छा से युद्ध का समर्थन किया है, महात्मा गांधी ने सीमित और प्रतीकात्मक रूप से 'व्यक्तिगत सत्याग्रह' की शुरुआत की थी। कथन 2 गलत है: व्यक्तिगत सत्याग्रह व्यापक जन आंदोलन नहीं था। इसकी रणनीति अत्यंत चयनात्मक और अनुशासित थी। इसमें सामूहिक प्रदर्शन या बड़े पैमाने पर भीड़ जुटाने के बजाय एक समय में केवल एक ही व्यक्ति (सत्याग्रही) द्वारा युद्ध के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से भाषण देकर अपनी गिरफ्तारी दी जाती थी, ताकि ब्रिटिश दमनकारी नीतियों के शिकार हुए बिना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार भी सुरक्षित रखा जा सके। कथन 3 सही है: आचार्य विनोबा भावे को महात्मा गांधी द्वारा पहले व्यक्तिगत सत्याग्रही के रूप में चुना गया था, और पंडित जवाहरलाल नेहरू दूसरे सत्याग्रही थे। दोनों को ब्रिटिश सरकार विरोधी भाषण देने के लिए गिरफ्तार किया गया था।
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