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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' (Article 143) के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के 'सलाहकार क्षेत्राधिकार' (Advisory Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह कानून या तथ्य के किसी ऐसे प्रश्न पर, जो सार्वजनिक महत्व का हो, उच्चतम न्यायालय की राय मांग सकता है, और उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए ऐसे किसी भी प्रश्न पर अपनी राय देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य (Compulsory) होता है।
- 2. यदि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 143 के तहत कोई मामला उच्चतम न्यायालय को परामर्श के लिए भेजा जाता है, तो न्यायालय को इस पर विचार करने के लिए कम से कम 5 (पाँच) न्यायाधीशों की संविधान पीठ (Constitution Bench) का गठन करना अनिवार्य होता है।
- 3. उच्चतम न्यायालय द्वारा सलाहकार क्षेत्राधिकार के अंतर्गत दी गई सलाह (Advice) राष्ट्रपति के लिए किसी भी स्थिति में बाध्यकारी नहीं होती है, और न ही यह सलाह भारतीय न्यायिक मिसाल (Judicial Precedent) के रूप में अन्य अदालतों के लिए बाच्य होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत, यदि सार्वजनिक महत्व का कोई प्रश्न उत्पन्न होता है, तो राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय से परामर्श ले सकता है। किंतु, यदि मामला किसी पूर्व-संविधान संधि, समझौते या सनद से संबंधित है, तो न्यायालय के लिए राय देना अनिवार्य (Compulsory) है; परंतु सामान्य लोक महत्व के मामलों में उच्चतम न्यायालय के लिए राय देना अनिवार्य नहीं है, वह राष्ट्रपति को परामर्श देने से इनकार भी कर सकता है।
कथन 2 गलत है: संविधान या सर्वोच्च न्यायालय नियम, 2013 के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 143 के तहत भेजे गए किसी भी संदर्भ (Reference) पर सुनवाई के लिए कम से कम 5 न्यायाधीशों की पीठ का होना तभी अनिवार्य होता है जब मामला अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या (Interpretation of Constitution) से जुड़ा हो, अन्यथा प्रत्येक सलाहकार संदर्भ के लिए स्वतः 5 न्यायाधीशों की पीठ होना अनिवार्य नियम नहीं है।
कथन 3 सही है: उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 143 के अंतर्गत दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी (Binding) नहीं होती है। राष्ट्रपति उस सलाह को मानने के लिए स्वतंत्र है। इसके अलावा, यह सलाह केवल एक परामर्श होती है, इसलिए यह अन्य अदालतों के लिए कड़ाई से न्यायिक मिसाल (Binding Precedent) नहीं बनती है। अतः केवल कथन 3 सही है।
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भारतीय राजव्यवस्था के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 161' के अंतर्गत 'राज्य के राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति' (Pardoning power of the Governor) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की तरह राज्यपाल को भी किसी भी मामले में दी गई 'मृत्युदंड' (Death sentence) को माफ करने, कम करने या उसका परिहार करने की पूर्ण संवैधानिक शक्ति प्राप्त है, भले ही वह मामला राज्य सूची या समवर्ती सूची के अंतर्गत आता हो।
2. राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति का विस्तार उन सभी मामलों तक है जिन पर राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु राज्यपाल किसी 'सैन्य न्यायालय' (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड या सजा के मामले में क्षमादान की शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता है।
3. राज्यपाल द्वारा क्षमादान की शक्ति का प्रयोग करने का निर्णय पूरी तरह से उसका अपना स्वविवेक (Discretion) होता है, और इसके लिए उसे राज्य के मंत्रिपरिषद की सलाह या सहायता की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सुहरावर्दी सिलसिले के प्रमुख संस्थापक कौन थे?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की स्वायत्तता, शक्तियों और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित हालिया वैधानिक संशोधनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (2) के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा इस संबंध में बनाए गए कानून के अधीन की जाती है, और मूल संविधान में ही इनके कार्यकाल तथा निष्कासन की प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के समान पूर्णतः सुरक्षित किया गया था।
2. 'अनूप बर्नवाल बनाम भारत संघ (2023)' के ऐतिहासिक मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह निर्णय दिया था कि जब तक संसद इस विषय पर कोई कानून नहीं बनाती, तब तक प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक उच्च-स्तरीय समिति राष्ट्रपति को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की सिफारिश करेगी।
3. सर्वोच्च न्यायालय के 2023 के निर्देश के पश्चात संसद द्वारा अधिनियमित 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023' के तहत चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटा दिया गया है, और अब इस समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 371' (Article 371) के अंतर्गत विभिन्न राज्यों के लिए किए गए विशेष प्रावधानों और उनके उद्देश्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 371-A के तहत नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिसके अनुसार संसद का कोई भी अधिनियम नागाओं के धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं, नागा रूढ़िगत कानून और प्रथाओं, तथा रूढ़िगत कानून के अनुसार सिविल या आपराधिक न्याय के प्रशासन से संबंधित मामलों में तब तक लागू नहीं होगा जब तक कि नागालैंड राज्य की विधानसभा एक प्रस्ताव द्वारा ऐसा निर्णय न ले।
2. अनुच्छेद 371-D के तहत आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के संबंध में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश तथा राज्य सरकार के सेवाओं में स्थानीय कैडर के आरक्षण के लिए विशेष निर्देश देने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित की गई है।
3. अनुच्छेद 371-F के अंतर्गत सिक्किम राज्य के संबंध में यह विशेष प्रावधान किया गया है कि सिक्किम के मूल निवासियों (लेप्चा, भूटिया आदि) के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए राज्यपाल के पास कानून और व्यवस्था के रखरखाव के संबंध में अंतिम और विशेष उत्तरदायित्व है, जिसके लिए वह मंत्रिपरिषद की सलाह से स्वतंत्र होकर कार्य कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था में 'भुगतान संतुलन' (Balance of Payments - BoP) और इसके घटकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भुगतान संतुलन के 'चालू खाता' (Current Account) के अंतर्गत दृश्य वस्तुओं (Merchandise Goods) के व्यापार के साथ-साथ अदृश्य वस्तुओं (Services), प्रेषण (Remittances) और निवेश आय को शामिल किया जाता है, तथा चालू खाता घाटा (CAD) तब उत्पन्न होता है जब देश की कुल विदेशी मुद्रा प्राप्तियां (Receipts) उसके कुल विदेशी भुगतानों (Payments) से अधिक हो जाती हैं।
2. 'पूंजी खाता' (Capital Account) देश के उन सभी अंतरराष्ट्रीय लेन-देन को दर्ज करता है जो देश की परिसंपत्तियों या देनदारियों (Assets and Liabilities) को प्रभावित करते हैं, जिसके अंतर्गत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI), विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) को शामिल किया जाता है।
3. आधिकारिक आरक्षित खाता (Official Reserve Account) भुगतान संतुलन का एक अनिवार्य हिस्सा है, और यदि चालू खाते और पूंजी खाते का कुल योग शून्य नहीं होता है, तो इस असंतुलन को पूरा करने या समायोजित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा भंडारों (Foreign Exchange Reserves) में परिवर्तन के माध्यम से इसका समायोजन किया जाता है।
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