BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
5 views

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 108' के अंतर्गत संसद के 'संयुक्त अधिवेशन' (Joint Sitting) के प्रावधानों और इसकी कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 108 के अनुसार, किसी साधारण विधेयक (Ordinary Bill) को पारित करने को लेकर लोकसभा और राज्यसभा के बीच गतिरोध उत्पन्न होने पर राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक आहूत कर सकता है, और यह प्रावधान धन विधेयक (Money Bill) तथा संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill) दोनों पर समान रूप से लागू होता है।
  2. 2. यदि संयुक्त बैठक के लिए राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो भी वह संयुक्त बैठक आहूत की जा सकती है और लोकसभा के विघटन से संयुक्त बैठक का प्रस्ताव व्यपगत (Lapse) नहीं होता है।
  3. 3. संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष (Speaker) द्वारा की जाती है, और यदि अध्यक्ष अनुपस्थित हैं, तो लोकसभा के उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) तथा उनकी भी अनुपस्थिति में राज्यसभा के उपसभापति (Deputy Chairman) द्वारा की जाती है, किंतु राज्यसभा के सभापति (Chairman) कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक केवल 'साधारण विधेयकों' (Ordinary Bills) या 'वित्तीय विधेयकों' (Financial Bills) के संदर्भ में बुलाई जा सकती है। यह प्रावधान 'धन विधेयक' (Money Bill - अनुच्छेद 110) और 'संविधान संशोधन विधेयक' (Constitutional Amendment Bill - अनुच्छेद 368) पर लागू नहीं होता है। धन विधेयक के मामले में लोकसभा के पास एकाधिकार होता है, जबकि संविधान संशोधन विधेयक को दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित होना अनिवार्य होता है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 108(5) के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक आहूत करने के अपने आशय की सूचना देने के बाद, यदि लोकसभा का विघटन भी हो जाता है, तब भी संयुक्त बैठक आयोजित की जा सकती है और विधेयक व्यपगत नहीं होता है। कथन 3 सही है: संविधान के अनुच्छेद 118(4) के अनुसार, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा की जाती है। यदि अध्यक्ष अनुपस्थित हैं, तो लोकसभा के उपाध्यक्ष और उनकी भी अनुपस्थिति में राज्यसभा के उपसभापति पीठासीन होते हैं। चूँकि राज्यसभा के सभापति (भारत के उपराष्ट्रपति) सदन के सदस्य नहीं होते हैं, इसलिए वे कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकते।
Share:

Related Questions

भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) के संचरण, छाया क्षेत्रों (Shadow Zones) तथा पृथ्वी के आंतरिक भाग के घनत्व और अवस्था के निर्धारण में उनकी भूमिका के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं जो ध्वनि तरंगों के समान चट्टानों में संपीड़न (Compression) और विरलन (Rarefaction) पैदा करती हैं, और ये ठोस, तरल तथा गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, हालांकि तरल माध्यम से गुजरने पर इनका अपवर्तन (Refraction) होता है। 2. द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं जो प्रकाश तरंगों के समान माध्यम के कणों के संचरण की दिशा के समकोण पर कंपन करती हैं, और ये केवल ठोस पदार्थों के माध्यम से ही गमन कर सकती हैं तथा तरल या पिघले हुए बाह्य क्रोड (Outer Core) में प्रवेश करते ही पूरी तरह से विलुप्त हो जाती हैं। 3. भूकंपीय तरंगों के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि पृथ्वी का आंतरिक कोर (Inner Core) अत्यधिक तापमान के कारण तरल अवस्था में है, जबकि बाह्य कोर (Outer Core) अत्यधिक दबाव के कारण ठोस लोहे और निकेल से बनी एक कठोर अवस्था में स्थित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? बेन स्टोक्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की, यह किस देश के खिलाड़ी हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) और उसकी न्यायिक समीक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति कार्यपालिका की कार्यकारी शक्ति का विस्तार है, जिसका प्रयोग वह मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना अपने स्वविवेक से कर सकती है। 2. 'एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) बनाम भारत संघ' या ऐतिहासिक 'ईश्वर सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' तथा 'केहर सिंह बनाम भारत संघ (1989)' मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति की न्यायिक समीक्षा पूरी तरह से वर्जित है और इसके आदेशों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है। 3. सर्वोच्च न्यायालय ने हाल के निर्णयों में यह प्रतिपादित किया है कि यदि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका पर निर्णय लेने में अत्यधिक, अनपेक्षित और अमानवीय देरी की जाती है, तो इस प्रक्रियागत देरी (Procedural Delay) के आधार पर मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-A' के अंतर्गत 'मूल कर्तव्य' (Fundamental Duties - अनुच्छेद 51A) तथा 'स्वर्ण सिंह समिति' (Swaran Singh Committee) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से रूसी संविधान (तत्कालीन सोवियत संघ) से प्रेरणा लेकर संविधान में जोड़ा गया था, और मूल रूप से स्वर्ण सिंह समिति ने केवल 8 मूल कर्तव्यों को शामिल करने की सिफारिश की थी, किंतु संसद ने संशोधन करते समय इनकी संख्या बढ़ाकर 10 कर दी थी। 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A के तहत वर्तमान में कुल 11 मूल कर्तव्य शामिल हैं, जिनमें 11वाँ मूल कर्तव्य वर्ष 2002 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से जोड़ा गया, जो 6 से 14 वर्ष की आयु के अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करने के माता-पिता या संरक्षक के कर्तव्य से संबंधित है। 3. मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) नहीं है, अर्थात इनके उल्लंघन या अनुपालन न करने पर सीधे तौर पर किसी भी न्यायालय द्वारा कोई कानूनी दंड या प्रवर्तनीय रिट (Writ) जारी नहीं की जा सकती है, जब तक कि संसद द्वारा इसके क्रियान्वयन के लिए कोई विशिष्ट दंडात्मक विधि न बनाई गई हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? अफ्रीका के विषुवत रेखीय क्षेत्र में पाई जाने वाली लंबी और मोटी घास को क्या कहते हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.