BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
6 views

भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण' (Ocean Thermal Energy Conversion - OTEC) और इसके तकनीकी तथा पर्यावरणीय पहलुओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. OTEC तकनीक महासागरीय सतह के गर्म जल (जो सूर्य द्वारा गर्म होता है) और गहरे समुद्र के ठंडे जल के बीच के तापमान अंतर का उपयोग करके विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करती है, जिसके लिए सामान्यतः कम से कम 20 डिग्री सेल्सियस का तापमान अंतर आवश्यक होता है।
  2. 2. 'बंद चक्र' (Closed-cycle) OTEC प्रणालियों में, काम करने वाले तरल पदार्थ (Working fluid) के रूप में अमोनिया या क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे कम क्वथनांक वाले द्रवों का उपयोग किया जाता है, जो महासागरीय सतह के गर्म जल की ऊष्मा से वाष्पीकृत होकर टरबाइन को घुमाते हैं।
  3. 3. OTEC संयंत्रों के संचालन से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों में गहरे समुद्र के पोषक तत्वों से भरपूर ठंडे जल का सतह पर आना शामिल है, जिससे स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उत्पादकता (प्राकृतिक फाइटोप्लांकटोन प्रस्फूटन) में वृद्धि हो सकती है, किंतु इससे आसपास के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण (OTEC) तकनीक महासागरीय सतह के गर्म जल (लगभग 25°C) और गहरे समुद्र (लगभग 1000 मीटर नीचे) के ठंडे जल (लगभग 5°C) के बीच के तापमान अंतर (लगभग 20°C या अधिक) का उपयोग करती है। कथन 2 सही है: 'बंद चक्र' (Closed-cycle) OTEC प्रणालियों में अमोनिया जैसे कम क्वथनांक वाले द्रवों का उपयोग किया जाता है। सतह के गर्म जल की ऊष्मा से यह द्रव वाष्प में बदल जाता है और टरबाइन को चलाता है, जिसके बाद गहरे समुद्र के ठंडे जल द्वारा इसे वापस संघनित (Condense) कर दिया जाता है। कथन 3 गलत है: OTEC संयंत्रों के संचालन से गहरे समुद्र का पोषक तत्वों से युक्त जल सतह पर आता है, जिससे फाइटोप्लांकटोन की वृद्धि तो हो सकती है, किंतु इसके कई संभावित नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव भी होते हैं, जैसे गहरे समुद्र के जीवों का विस्थापन, थर्मल प्रदूषण, और अमोनिया जैसे जहरीले कार्यशील द्रवों के रिसाव का जोखिम। अतः यह कहना गलत है कि इससे कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
Share:

Related Questions

IPL इतिहास में 200 विकेट लेने वाले पहले तेज गेंदबाज कौन बने हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति और 'कॉलेजियम प्रणाली' (Collegium System) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा मुख्य न्यायमूर्ति (CJI) और सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के ऐसे अन्य न्यायाधीशों के परामर्श से की जाएगी जिन्हें राष्ट्रपति इस प्रयोजन के लिए आवश्यक समझे। 2. 'द्वितीय न्यायाधीश मामला' (Second Judges Case, 1993) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया कि 'परामर्श' (Consultation) का अर्थ 'सहमति' (Concurrence) है, और मुख्य न्यायमूर्ति का परामर्श कॉलेजियम की सिफारिशों के अनुरूप होना चाहिए, जिसमें मुख्य न्यायमूर्ति के साथ सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होंगे। 3. राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम, 2014 को उच्चतम न्यायालय द्वारा उसके चौथे न्यायाधीश मामले (2015) में इस आधार पर असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) सिद्धांत का उल्लंघन करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और उससे संबंधित विधिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना वर्ष 2010 में 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम' के तहत की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों का प्रभावी और तीव्र गति से निपटारा करना है। 2. यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित सख्त न्यायिक प्रक्रियाओं और नियमों से पूरी तरह बाध्य है, और इसे अपने समक्ष आने वाले मामलों की सुनवाई करते समय 'नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) का पालन करने की आवश्यकता नहीं होती है। 3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्णयों या आदेशों के विरुद्ध अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में की जा सकती है, क्योंकि इसके आदेशों को चुनौती देने के लिए देश के उच्च न्यायालयों (High Courts) के अपीलीय क्षेत्राधिकार को पूरी तरह से वर्जित किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'अनुच्छेद 21' (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) तथा इसके न्यायिक विस्तार के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता' के अधिकार में न केवल शारीरिक अस्तित्व का संरक्षण शामिल है, बल्कि मानवीय गरिमा के साथ जीने का अधिकार, स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, और त्वरित सुनवाई का अधिकार भी इसके व्यापक दायरे में निहित है। 2. वर्ष 1978 के ऐतिहासिक 'मेनका गांधी बनाम भारत संघ' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया था कि अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को केवल 'विधี द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) के आधार पर छीना जा सकता है, और इसमें अमेरिकी संविधान की तरह 'विधि की उचित प्रक्रिया' (Due Process of Law) के सिद्धांतों को शामिल नहीं किया जा सकता है। 3. निजता का अधिकार (Right to Privacy) को सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा 'के. एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ' (2017) के निर्णय में अनुच्छेद 21 और भाग III के अन्य स्वतंत्रताओं के अंतर्गत एक अंतर्निहित मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.