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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय आमंत्रण परिसंचरण' (Oceanic Conveyor Belt / Thermohaline Circulation) और इसके वैश्विक जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. थर्मोहेलाइन परिसंचरण (THC) एक वैश्विक महासागरीय धाराओं का पैटर्न है जो समुद्र के तापमान (Thermo) और लवणता (Haline) में अंतर के कारण संचालित होता है, और यह भूमध्य रेखा से ध्रुवों तक और इसके विपरीत दिशा में ऊष्मा तथा पोषक तत्वों के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  2. 2. उत्तर अटलांटिक महासागर में ग्रीनलैंड के पास ठंडे और अत्यधिक लवणयुक्त पानी के नीचे डूबने (Sinking) की प्रक्रिया इस वैश्विक परिसंचरण तंत्र को शुरू करने और बनाए रखने के लिए एक मुख्य 'इंजन' या चालक बल (Driver) के रूप में कार्य करती है।
  3. 3. ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर (Ice Sheet) के पिघलने से उत्तर अटलांटिक महासागर में बड़े पैमाने पर मीठे (स्वच्छ) पानी का प्रवेश होता है, जिससे वहाँ के पानी का घनत्व बढ़ जाता है और यह थर्मोहेलाइन परिसंचरण की गति को और अधिक तीव्र कर देता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: थर्मोहेलाइन परिसंचरण (Thermohaline Circulation - THC) तापमान (Thermo) और लवणता (Haline) के अंतर से घनत्व में परिवर्तन द्वारा संचालित महासागरीय धाराओं का एक विशाल वैश्विक नेटवर्क है। यह पृथ्वी की जलवायु को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाता है। कथन 2 सही है: उत्तर अटलांटिक महासागर में (विशेषकर ग्रीनलैंड और नॉर्वेजियन सागर के पास) सतह का गर्म पानी जब ध्रुवीय ठंडी हवाओं के संपर्क में आता है, तो वह ठंडा होकर सघन हो जाता है और भारी होने के कारण समुद्र की तली में बैठ जाता है (Deep Water Formation)। यही 'डाउनवेलिंग' प्रक्रिया वैश्विक कन्वेयर बेल्ट को संचालित करती है। कथन 3 गलत है: ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्रीनलैंड की बर्फ पिघलने से उत्तर अटलांटिक महासागर में मीठे (अलवण) पानी की भारी मात्रा प्रवेश करती है, जिससे वहाँ के पानी का घनत्व बढ़ नहीं जाता बल्कि कम (घट) जाता है। कम घनत्व के कारण पानी नीचे नहीं डूब पाता, जिससे थर्मोहेलाइन परिसंचरण कमजोर या बाधित हो जाता है।
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