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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'जैविक ऑक्सीजन मांग' (Biological Oxygen Demand - BOD) और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD) किसी जलीय निकाय में मौजूद सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया) द्वारा कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के लिए उपभोग की जाने वाली घुलित ऑक्सीजन की मात्रा को दर्शाती है, और BOD का उच्च स्तर यह संकेत देता है कि जल में कार्बनिक प्रदूषण अत्यधिक मात्रा में मौजूद है।
- 2. जैसे-जैसे किसी जल निकाय में BOD का स्तर बढ़ता है, जल में 'घुलित ऑक्सीजन' (Dissolved Oxygen - DO) की सांद्रता में तेजी से गिरावट आती है, जिससे जलीय जीवों, विशेष रूप से मछलियों का दम घुटने लगता है और उनकी मृत्यु होने लगती है।
- 3. BOD माप की मानक प्रक्रिया के तहत जल के नमूने को 20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठीक 48 घंटे के लिए अंधेरे में रखा जाता है, ताकि प्रकाशसंश्लेषण के कारण शैवाल द्वारा ऑक्सीजन के उत्पादन या उपभोग को रोका जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD) पानी में कार्बनिक पदार्थों को तोड़ने के लिए एरोबिक सूक्ष्मजीवों द्वारा उपयोग की जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा है। उच्च BOD मान अधिक प्रदूषण और कम ऑक्सीजन उपलब्धता का संकेत देता है। कथन 2 सही है: अधिक BOD का सीधा अर्थ है कि सूक्ष्मजीव पानी में घुली हुई ऑक्सीजन का अत्यधिक उपभोग कर रहे हैं, जिससे जलीय जीवों के लिए 'घुलित ऑक्सीजन' (DO) की भारी कमी हो जाती है और जलीय जीवन खतरे में पड़ जाता है। कथन 3 गलत है: BOD परीक्षण के मानक प्रोटोकॉल के अनुसार, जल के नमूने को अंधेरे में 20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठीक 48 घंटे के लिए नहीं, बल्कि **5 दिनों (5-day BOD या BOD5)** के लिए रखा जाता है, ताकि प्रकाशसंश्लेषण से होने वाले किसी भी ऑक्सीजन के प्रभाव को समाप्त किया जा सके।
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चर्चा में रहा एलिफेंटा द्वीप, जहाँ 1,500 साल पुराना जलाशय मिला है, भारत के किस राज्य में स्थित है?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) तथा उनके निर्माण और प्रभाव को नियंत्रित करने वाले कारकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय जलधाराओं का मुख्य संचालक बल (Primary driving force) पृथ्वी का घूर्णन (Rotation of the Earth) है, और महासागरीय धाराओं की दिशा को विक्षेपित करने में कोरियोलिस बल (Coriolis force) उत्तरी गोलार्ध में उन्हें दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मोड़ देता है।
2. समुद्र के पानी के घनत्व में भिन्नता भी महासागरीय परिसंचरण का एक प्रमुख कारक है; ठण्डा और अधिक खारा जल भारी होने के कारण नीचे बैठता है और गहरे समुद्र की धाराओं (Deep Ocean Currents) का निर्माण करता है, जिन्हें 'थर्मोहेलाइन परिसंचरण' (Thermohaline Circulation) कहा जाता है।
3. पृथ्वी के भूमध्य रेखा (Equator) से ध्रुवों की ओर बहने वाली महासागरीय जलधाराएँ ठंडी जलधाराएँ (Cold Currents) होती हैं, जो संबंधित तटीय क्षेत्रों के तापमान को कम करती हैं और प्रायः उन क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण (Desertification) को बढ़ावा देती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ की कार्यपालिका - राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन तथा महाभियोग की प्रक्रिया) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति के निर्वाचकगण (Electoral College) में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं, और इसके साथ ही दिल्ली और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों को भी 70वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा इस निर्वाचकगण में शामिल किया गया था।
2. राष्ट्रपति के चुनाव में उत्पन्न होने वाले सभी शंकाओं और विवादों की जाँच और उनका विनिश्चय केवल और केवल भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाता है, और निर्वाचन आयोग का यह निर्णय अंतिम होता है जिसे किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 61 के अनुसार राष्ट्रपति पर 'संविधान के अतिक्रमण' के आधार पर केवल संसद के किसी भी सदन में महाभियोग का आरोप लगाया जा सकता है, बशर्ते कि ऐसा आरोप लगाने वाला संकल्प उस सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित किया गया हो, और इस प्रक्रिया में संसद के मनोनीत (Nominated) सदस्य भी मतदान में भाग लेते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत संविधान संशोधन प्रक्रिया और इससे संबंधित प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन करने की शक्ति केवल संसद को प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए विधेयक को संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Permission) लेना अनिवार्य होता है।
2. संविधान के कुछ विशिष्ट प्रावधानों (जैसे राष्ट्रपति के निर्वाचन, संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार, या सातवीं अनुसूची की सूचियाँ) में संशोधन करने के लिए न केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (Special Majority) से पारित होना आवश्यक है, बल्कि कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से उनका अनुसमर्थन (Ratification) किया जाना भी अनिवार्य है।
3. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह व्यवस्था दी थी कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत अपनी संशोधन शक्ति का प्रयोग करते हुए संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, यहाँ तक कि वह संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) में भी परिवर्तन या संशोधन कर सकती है, बशर्ते वह विशेष बहुमत से पारित हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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