त्वरित लिंक्स
Civil services
4 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की संरचना, नियुक्ति प्रक्रिया और उसकी स्वतंत्रता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मूल संविधान के अनुसार, निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय (Multi-member body) था जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्त होते थे, जिन्हें बाद में कुछ राजनीतिक विवादों के कारण एक-सदस्यीय बना दिया गया और पुनः 1993 में बहु-सदस्यीय कर दिया गया।
- 2. मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा पारित एक विशिष्ट कानून के अधीन की जाती है, और संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
- 3. निर्वाचन आयोग के अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की संस्तुति (Recommendation) अनिवार्य होती है, और उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त की तरह महाभियोग जैसी जटिल प्रक्रिया के बिना केवल मुख्य चुनाव आयुक्त की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा कभी भी हटाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: मूल संविधान में निर्वाचन आयोग मूलतः एक-सदस्यीय निकाय (Single-member body) था, जिसमें केवल मुख्य चुनाव आयुक्त होते थे। 16 अक्टूबर 1989 को राष्ट्रपति ने पहली बार दो अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करके इसे बहु-सदस्यीय बनाया, जिसे बाद में कुछ समय के लिए फिर से एक-सदस्यीय कर दिया गया और अंततः 1 अक्टूबर 1993 से यह स्थायी रूप से बहु-सदस्यीय निकाय बन गया।
कथन 2 सही है: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को पद से हटाने की प्रक्रिया और आधार वही हैं जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के लिए हैं (अर्थात संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव)। हालांकि, नियुक्ति के संबंध में हालिया विधाई सुधारों (मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023) से पहले यह पूरी तरह कार्यपालिका के विवेक पर था, किंतु संवैधानिक उपबंधों के तहत CEC कीremoval प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही है।
कथन 3 गलत है: अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की संस्तुति अनिवार्य नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर ही अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाया जा सकता है, यह आधा सत्य लग सकता है किंतु तकनीकी रूप से अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की 'सिफारिश' (Recommendation) आवश्यक है, न कि केवल मुख्य चुनाव आयुक्त की 'सलाह' पर राष्ट्रपति उन्हें कभी भी अपनी इच्छा से हटा सकते हैं। इसके अलावा, अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने की संवैधानिक सुरक्षा भी उन्हें मनमाने ढंग से हटाने से रोकती है।
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' (आपात उपबंध - अनुच्छेद 352 से 360) के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) के उद्घोषणा और उसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा इस आशय का लिखित विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए, और यह उद्घोषणा संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तिथि से एक महीने के भीतर विशेष बहुमत द्वारा अनुमोदित होना अनिवार्य है।
2. राष्ट्रीय आपातकाल के प्रवृत्त होने पर संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त सभी छह मूल अधिकार स्वतः ही निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए राष्ट्रपति द्वारा किसी अलग से आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं होती है, तथा आपातकाल समाप्त होने के तुरंत बाद ये अधिकार पुनर्जीवित हो जाते हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 359 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन को किसी न्यायालय में निलंबित कर सकता है, किंतु ऐसा आदेश संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक ही सीमित हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
दिल्ली के निकट तुगलकाबाद शहर की नींव किसने रखी थी?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, 'संसद की वित्तीय समितियों' (Financial Committees) — अर्थात् प्राक्कलन समिति (Estimates Committee), लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) और सार्वजनिक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) — के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लोक लेखा समिति में कुल 30 सदस्य होते हैं, जिनमें से 20 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के आधार पर एकल संक्रमणीय मत द्वारा चुने जाते हैं, तथा इस समिति का अध्यक्ष हमेशा विपक्षी दल से ही नियुक्त किया जाना संविधान द्वारा अनिवार्य किया गया है।
2. प्राक्कलन समिति देश की सबसे बड़ी वित्तीय समिति है जिसमें 30 सदस्य होते हैं और इसके सभी 30 सदस्य केवल लोकसभा से ही निर्वाचित होते हैं; इसमें राज्यसभा को कोई प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं होता है, तथा इस समिति का मुख्य कार्य बजट में अनुमानित खर्चों की जांच करना और सार्वजनिक व्यय में मितव्ययिता लाने के लिए सुझाव देना है।
3. सार्वजनिक उपक्रम समिति का गठन वर्ष 1964 में कृष्ण मेनन समिति की संस्तुति पर किया गया था, जिसमें कुल 22 सदस्य (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से) होते हैं, और इस समिति का अध्यक्ष हमेशा राज्यसभा के सदस्यों में से ही चुना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारत का पहला स्वदेशी 'प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' (PFBR) कहाँ स्थित है, जिसने हाल ही में क्रिटिकैलिटी प्राप्त की है?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और 'धन विधेयक' (Money Bills - Article 110) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार, किसी विधेयक को धन विधेयक तभी माना जाएगा जब उसमें केवल करों के अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन, अथवा भारत की संचित निधि से धन के विनियोजन जैसे विषय शामिल हों, और यदि किसी धन विधेयक में कोई अन्य सामान्य विधाई मामला भी मिला दिया जाता है, तो भी वह धन विधेयक ही बना रहेगा।
2. धन विधेयक केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं, तथा इसे पुनःस्थापित करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफ़ारिश (Prior Recommendation) की आवश्यकता होती है।
3. राज्यसभा किसी धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती है और न ही उसमें संशोधन कर सकती है, वह उसे अधिकतम 14 दिनों की अवधि के लिए रोक सकती है, और यदि इस अवधि के भीतर राज्यसभा विधेयक को वापस नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे लोकसभा ने पारित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.