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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) के अंतर्गत 'समुद्री संरक्षित क्षेत्रों' (Marine Protected Areas) और 'राष्ट्रीय जलीय जीव' (National Aquatic Animal) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधित रूप में) के तहत किसी भी क्षेत्र को 'समुद्री अभ्यारण्य' (Marine Sanctuary) या राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने की शक्ति केवल केंद्र सरकार के पास होती है, और राज्य सरकारों का इसमें कोई विधिक अधिकार नहीं होता है।
- 2. भारत की प्रसिद्ध 'गंगा नदी डॉल्फ़िन' (Gangetic River Dolphin) को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत सर्वोच्च विधिक संरक्षण प्रदान किया गया है, और इसे वर्ष 2009 में भारत का 'राष्ट्रीय जलीय जीव' घोषित किया गया था।
- 3. वन्यजीव संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 के पश्चात, इस अधिनियम की मूल अनुसूचियों की संख्या को कम करके अब केवल दो अनुसूचियाँ (एक वन्यजीवों के लिए और एक पादप प्रजातियों के लिए) कर दिया गया है, जो संकटग्रस्त प्रजातियों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत किसी क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान या अभ्यारण्य (चाहे वह स्थलीय हो या समुद्री) घोषित करने की शक्ति राज्य सरकार के पास भी होती है (और कुछ विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार भी कर सकती है), न कि केवल केंद्र सरकार के पास। कथन 2 सत्य है: गंगा नदी डॉल्फ़िन (Platanista gangetica) को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में रखा गया है और अक्टूबर 2009 में गंगा नदी की डॉल्फ़िन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था। कथन 3 असत्य है: वन्यजीव संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 के द्वारा अधिनियम की अनुसूचियों की संख्या को 6 से घटाकर 4 कर दिया गया है (सामान्य प्रजातियों और संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए चार अनुसूचियाँ और पौधों के संरक्षण के लिए एक अलग अनुसूची), न कि केवल दो अनुसूचियाँ।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) और उनके निर्माण तथा जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराएँ महासागरीय जल का एक निश्चित दिशा में बड़े पैमाने पर सतत प्रवाह है, जो पृथ्वी के घूर्णन (Coriolis Force), प्रचलित हवाओं (Prevailing Winds), तापमान और लवणता में भिन्नता तथा महाद्वीपीय तटरेखाओं के आकार से प्रभावित होती हैं।
2. उत्तरी गोलार्ध में कोरिऑलिस बल के प्रभाव से महासागरीय धाराएँ अपनी मूल दिशा से दाईं ओर (Clockwise) और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Anti-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं, जो ग्याइरस (Gyres) के निर्माण के लिए उत्तरदायी है।
3. ठंडी महासागरीय धाराएँ उन क्षेत्रों में वर्षा में वृद्धि करती हैं जहाँ से वे गुजरती हैं, क्योंकि ठंडा जल वाष्पीकरण को अत्यधिक बढ़ावा देता है, जिसके परिणामस्वरूप तटीय क्षेत्रों में घने जंगलों और उष्णकटिबंधीय मरुस्थलों का निर्माण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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गांधी-इरविन समझौते को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment - EIA) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित NGT एक विशेष निकाय है जो पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और मामलों के प्रभावी व त्वरित निपटान के लिए कार्य करता है, तथा इसे दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है।
2. NGT के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले किसी भी पर्यावरण संबंधी आदेश, निर्णय या पुरस्कार से व्यथित व्यक्ति इस अधिकरण के आदेश के विरुद्ध 90 दिनों के भीतर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, क्योंकि उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता इस अधिनियम के तहत वर्जित है।
3. पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) भारत में पहली बार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत विधיक रूप से वर्ष 1994 में अधिसूचित किया गया था, और इसके तहत किसी भी नई विकास परियोजना के निर्माण से पहले उसके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत में 'सिविल सेवा' (Civil Services) का जनक किसे माना जाता है?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण' (National Ganga River Basin Authority - NGRBA) और वर्तमान में कार्यरत 'राष्ट्रीय गंगा परिषद' (National Ganga Council) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) की स्थापना वर्ष 2009 में 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986' की धारा 3(3) के तहत एक योजना के रूप में की गई थी, जिसके अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री होते हैं।
2. वर्ष 2016 में NGRBA को विघटित कर दिया गया और इसके स्थान पर 'राष्ट्रीय गंगा परिषद' (National Ganga Council) का गठन किया गया, जिसे गंगा नदी के पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन के लिए समग्र और बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाने का पूर्ण वैधानिक अधिकार प्राप्त है।
3. राष्ट्रीय गंगा परिषद में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों को इसके पदेन सदस्यों के रूप में शामिल किया गया है, और इसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री (Union Minister of Jal Shakti) द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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