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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूमध्यरेखीय जलवायु' (Equatorial Climate) और इससे संबंधित पारिस्थितिकीय विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भूमध्यरेखीय जलवायु क्षेत्र में वर्ष भर उच्च तापमान और अत्यधिक वर्षा होती है, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ दैनिक तापांतर (Diurnal Range of Temperature) वार्षिक तापांतर (Annual Range of Temperature) की तुलना में बहुत अधिक होता है।
- 2. यहाँ प्रचुर वर्षा और सूर्य के प्रकाश के कारण सदाबहार वनों (Evergreen Forests) का विकास होता है, जिन्हें 'सिल्वा' (Selvas) कहा जाता है, और इन वनों में पेड़ों की आपस में घनी छत (Canopy) होने के कारण सूर्य का प्रकाश धरातल तक नहीं पहुँच पाता है, जिससे धरातलीय वनस्पति बहुत कम होती है।
- 3. अत्यधिक लीचिंग (Leaching) प्रक्रिया के कारण भूमध्यरेखीय क्षेत्रों की मिट्टी (विशेषकर लेटराइट मिट्टी) पोषक तत्वों से भरपूर और कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ होती है, जिससे यहाँ गहन कृषि (Intensive Agriculture) बड़े पैमाने पर की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही नहीं है: भूमध्यरेखीय क्षेत्रों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यहाँ का वार्षिक तापांतर (Annual Range of Temperature) बहुत ही कम (लगभग 2 से 3 डिग्री सेल्सियस) होता है, जबकि बादलों के हटने, उच्च तापमान और समुद्री/स्थानीय प्रभावों के कारण दैनिक तापांतर (Diurnal Range of Temperature) वार्षिक तापांतर की तुलना में अधिक होता है। हालांकि, कथन का मुख्य भाग 'दैनिक तापांतर का वार्षिक तापांतर से अधिक होना' सही है, लेकिन यह भौगोलिक शब्दावली और संदर्भ के अनुसार आंशिक रूप से भ्रमित कर सकता है, फिर भी पारंपरिक रूप से भूमध्यरेखीय जलवायु में दैनिक तापांतर वार्षिक तापांतर से अधिक होता है; किंतु कथन 3 के गलत होने के कारण विकल्प का चयन देखना होगा। आइए गहराई से समझें: कथन 3 स्पष्ट रूप से गलत है क्योंकि अत्यधिक और भारी वर्षा के कारण 'लीचिंग' (Leaching - पोषक तत्वों का पानी के साथ रिसकर नीचे चले जाना) की प्रक्रिया होती है, जिससे यहाँ की मिट्टी पोषक तत्वों (ह्यूमस और उपजाऊ तत्वों) से विहीन हो जाती है और कृषि के लिए कम उपजाऊ होती है। कथन 2 बिल्कुल सही है: भूमध्यरेखीय वनों को 'सिल्वा' कहा जाता है, यहाँ सघन वितान (Canopy) पाया जाता है जो सूर्य के प्रकाश को ज़मीन पर पहुँचने से रोकता है, जिससे झाड़ियाँ और अधोवनस्पति (Undergrowth) कम होती है। चूँकि कथन 3 गलत है और कथन 1 के संदर्भ में वार्षिक तापांतर अत्यंत कम होता है, अतः केवल कथन 2 सही है।
Related Questions
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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, 'गदर पार्टी' (Ghadar Party) और उसके इतिहास से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गदर पार्टी की स्थापना वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को (एस्टोरिया) में सोहन सिंह भाकना द्वारा की गई थी, और लाला हरदयाल इसके प्रमुख नेताओं और विचारकों में से एक थे जिन्होंने इसके साप्ताहिक पत्र 'गदर' के संपादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
2. गदर पार्टी के सदस्यों का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को समाप्त करने के लिए भारत में एक हिंसक सशस्त्र विद्रोह (Armed Revolution) भड़काना था, जिसके लिए उन्होंने पहले विश्व युद्ध के दौरान 'कोमागाटा मारू' घटना से प्रेरणा लेते हुए बड़े पैमाने पर धन जुटाया और विदेशों से हथियारों की तस्करी की।
3. प्रथम विश्व युद्ध के छिड़ जाने के बाद, गदर पार्टी ने अपने अधिकांश कार्यकर्ताओं को ब्रिटिश सेना के भारतीय सैनिकों के बीच विद्रोह भड़काने और 'गदर क्रांति' को अंजाम देने के लिए चुपचाप भारत लौटने का आह्वान किया, किंतु खुफिया एजेंसियों द्वारा इस योजना का समय से पहले पता लगा लिए जाने के कारण यह विद्रोह बड़े पैमाने पर असफल हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत संविधान संशोधन की प्रक्रिया और 'संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध को जोड़ने, संशोधित करने या निरसित करने की शक्ति प्राप्त है, और इस अनुच्छेद के अधीन संविधान संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Permission) लेना अनिवार्य होता है।
2. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' के ऐतिहासिक मामले में उच्चतम न्यायालय की 13-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह व्यवस्था दी थी कि संसद की संविधान संशोधन की शक्ति असीमित नहीं है और वह अनुच्छेद 368 के तहत संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) को नष्ट या क्षीण नहीं कर सकती है।
3. न्यायिक समीक्षा (Judicial Review), संविधान का संघीय स्वरूप (Federal Character), और पंथनिरपेक्षता (Secularism) जैसे सिद्धांत संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं, और संविधान के 'भाग III' द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को संसद द्वारा किसी भी परिस्थिति में संशोधित या सीमित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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उपग्रह (Satellite) किसे कहते हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 131' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय की 'मूल आरंभिक अधिकारिता' (Original Jurisdiction) के दायरे और उसकी सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय की मूल आरंभिक अधिकारिता उसे केंद्र सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच अथवा दो या अधिक राज्यों के बीच किसी भी कानूनी विवाद में सुनवाई करने का अनन्य अधिकार प्रदान करती है।
2. यह अधिकारिता तब भी लागू होती है जब कोई विवाद किसी ऐसी संधि, समझौते, प्रसंविदा, सनद या अन्य पूर्व-संवैधानिक दस्तावेजों से उत्पन्न होता है जो संविधान के लागू होने से पहले निष्पादित किए गए थे और जो उसके लागू होने के बाद भी प्रवर्तन में बने हुए हैं।
3. किसी भी निजी नागरिक, कंपनी या राज्य के बाहर के व्यक्ति द्वारा केंद्र सरकार या किसी अन्य राज्य के विरुद्ध दायर किए गए नागरिक या संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मुकदमों को भी अनुच्छेद 131 के दायरे में उच्चतम न्यायालय की मूल अधिकारिता के अंतर्गत सीधे सुना जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
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