त्वरित लिंक्स
Civil services
5 views
भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत् विकास के संदर्भ में, भारत में 'राष्ट्रीय हरित बॉन्ड' (Sovereign Green Bonds) तथा इसके फ्रेमवर्क एवं सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (SGrBs) का मुख्य उद्देश्य देश में सार्वजनिक क्षेत्र के ऐसे हरित प्रोजेक्ट्स के लिए संसाधन जुटाना है जो कार्बन तीव्रता (Carbon Intensity) को कम करने में सहायक हों, और इन बॉन्ड्स के माध्यम से जुटाई गई राशि का उपयोग जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा परियोजनाओं या बड़े पैमाने पर पनबिजली (Hydroelectric Power > 25 MW) परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए भी पूरी तरह से किया जा सकता है।
- 2. 'केंद्रीय वित्त मंत्रालय' द्वारा जारी संप्रभु हरित बॉन्ड फ्रेमवर्क (Sovereign Green Bond Framework) के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा की जाती है।
- 3. भारत के इस ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क के तहत जिन पात्र परियोजनाओं (Eligible Green Projects) को शामिल किया गया है, उनमें नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ परिवहन और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन जैसी श्रेणियाँ शामिल हैं, किंतु इसमें परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power) से जुड़ी परियोजनाओं और वाणिज्यिक वानिकी को पूर्णतः बाहर रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है: भारत के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क के तहत जुटाई गई धनराशि का उपयोग उन परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए नहीं किया जा सकता है जो जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा उत्पादन से जुड़ी हों। इसके अलावा, 25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली बड़ी पनबिजली परियोजनाओं को भी इस फ्रेमवर्क के तहत पात्र हरित परियोजनाओं की श्रेणी से बाहर रखा गया है।
कथन 2 असत्य है: सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क के क्रियान्वयन और देखरेख के लिए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (आर्थिक मामलों के विभाग) के अंतर्गत 'हरित वित्तपोषण कार्य समिति' (Green Finance Working Committee) का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Adviser) करते हैं, न कि पर्यावरण मंत्री द्वारा।
कथन 3 सत्य है: भारत के संप्रभु हरित बॉन्ड फ्रेमवर्क के अंतर्गत नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, हरित भवन, टिकाऊ जल प्रबंधन, प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण, और स्वच्छ परिवहन जैसी पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं को शामिल किया गया है। साथ ही, इसके मानदंडों के अनुसार परमाणु ऊर्जा से संबंधित परियोजनाओं, बड़े पैमाने पर बायोमास से जुड़े विवादित मुद्दों, और वाणिज्यिक वानिकी (जिससे जैव विविधता को खतरा हो) को स्पष्ट रूप से पात्र परियोजनाओं की सूची से बाहर रखा गया है।
Related Questions
→
मार्च 2026 के लिए 'ICC मेंस प्लेयर ऑफ द मंथ' का पुरस्कार किस भारतीय क्रिकेटर ने जीता है?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की उद्घोषणा और उसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत में या उसके किसी भाग पर कर सकता है, और यह उद्घोषणा केवल 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर की जा सकती है, 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल पूरे देश में लागू नहीं किया जा सकता है।
2. मूल संविधान में आंतरिक अशांति (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था, जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा प्रतिस्थापित करके 'सशस्त्र विद्रोह' किया गया, तथा यह भी अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा ऐसी उद्घोषणा तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) का निर्णय उसे लिखित रूप में संसूचित न किया जाए।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से एक महीने के भीतर विशेष बहुमत (Special Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है, और एक बार अनुमोदित होने के बाद यह आपातकाल अनिश्चित काल तक चल सकता है, बशर्ते कि प्रत्येक छह महीने पर इसे संसद द्वारा पुनः अनुमोदित कराया जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-क' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51A) और उससे संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें से 11वां मूल कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था।
2. संविधान के अनुच्छेद 51A(g) के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करे और उसका संवर्द्धन करे तथा प्राणीमात्र के प्रति दयाभाव रखे, और यह प्रावधान केवल नागरिकों तक सीमित न होकर राज्य के विरुद्ध भी एक न्यायोचित (Justiciable) दायित्व के रूप में सीधे न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय है।
3. यद्यपि मूल कर्तव्य प्रकृति में गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं, तथापि सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि विधियों की संवैधानिक वैधता की न्यायसंगतता का निर्धारण करते समय अदालतें इस बात को ध्यान में रख सकती हैं कि क्या वह विधि किसी मूल कर्तव्य को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बनाई गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
अशोक के अभिलेख मुख्य रूप से किस लिपि में लिखे गए हैं?
→
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21-A को किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.