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मार्च 2026 के लिए 'ICC मेंस प्लेयर ऑफ द मंथ' का पुरस्कार किस भारतीय क्रिकेटर ने जीता है?
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Detailed Explanation
यशस्वी जायसवाल ने मार्च 2026 के लिए 'ICC मेंस प्लेयर ऑफ द मंथ' का पुरस्कार जीता है।
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भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, 'वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन' और 'होम रूल लीग आंदोलन' (Home Rule League Movement) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार द्वारा की गई थी, और इसी अधिवेशन में कांग्रेस के नरम दल तथा गर्म दल के बीच समझौता हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप उग्रवादी नेताओं की कांग्रेस में पुनः वापसी हुई।
2. इसी लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच एक ऐतिहासिक समझौता (जिसे लखनऊ पैक्ट कहा जाता है) हुआ, जिसमें कांग्रेस ने पहली बार मुसलमानों के लिए 'पृथक् निर्वाचक मंडल' (Separate Electorates) की मांग को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया था।
3. वर्ष 1916 में ही एनी विसेंट और बाल गंगाधर तिलक द्वारा अलग-अलग होम रूल लीग की स्थापना की गई थी, जिनका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर तत्काल रूप से 'पूर्ण स्वराज्य' (Complete Independence) प्राप्त करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule) और उससे संबंधित 'एस. आर. बोम्बाई बनाम भारत संघ' (1994) के ऐतिहासिक निर्णय के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एस. आर. बोम्बाई मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की जा सकती है, और यदि यह उद्घोषणा असंवैधानिक या दुर्भावनापूर्ण पाई जाती है, तो न्यायपालिका विघटित की गई विधानसभा को पुनर्जीवित कर सकती है और निलंबित राज्य सरकार को बहाल कर सकती है।
2. इस ऐतिहासिक निर्णय में यह भी निर्धारित किया गया कि किसी राज्य सरकार के बहुमत का परीक्षण (Floor Test) राज्यपाल के राजभवन में नहीं, बल्कि राज्य विधानसभा के पटल पर ही किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बहुमत का वास्तविक आकलन सदन के अंदर हो।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की तरह ही, राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसके जारी होने की तारीख से एक महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, और यदि इस अवधि के दौरान लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो यह उद्घोषणा बिना किसी अनुमोदन के स्वतः समाप्त हो जाती है और राज्यसभा की स्वीकृति इस स्थिति में मान्य नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency - Article 352) तथा इसके प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के संबंध में युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह (Armed Rebellion) के आधार पर की जा सकती है, और मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द का ही प्रयोग किया गया था जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन (1978) के माध्यम से बदला गया था।
2. जब राष्ट्रीय आपातकाल प्रवर्तन में होता है, तब अनुच्छेद 358 के तहत अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए किसी अलग आदेश की आवश्यकता नहीं होती है, किंतु यह निलंबन केवल तभी प्रभावी होता है जब आपातकाल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर घोषित किया गया हो, न कि सशस्त्र विद्रोह के आधार पर।
3. राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 359 के अंतर्गत एक पृथक आदेश जारी करके भाग III द्वारा प्रदत्त अन्य मूल अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन को न्यायालयों में प्रवर्तित कराने के अधिकार को निलंबित किया जा सकता है, और यह आदेश संपूर्ण देश या उसके किसी विशिष्ट क्षेत्र तक सीमित हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (DPSP - अनुच्छेद 36 से 51) और उनके वर्गीकरण तथा प्रभावों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हालांकि संविधान में DPSP को स्पष्ट रूप से विभिन्न विचारधाराओं (जैसे समाजवादी, गांधीवादी और उदार-बौद्धिक) में वर्गीकृत नहीं किया गया है, तथापि उनके प्रावधानों के आधार पर अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतों का संगठन) और अनुच्छेद 43 (कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन) जैसी व्यवस्थाएं गांधीवादी विचारधारा के सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
2. संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार, नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और देश के लिए कानून बनाते समय इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, तथा यदि राज्य इनका उल्लंघन करता है, तो किसी भी नागरिक द्वारा देश के उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में प्रवर्तन (Enforcement) के लिए याचिका दायर की जा सकती है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स मामला, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान की नींव 'मौलिक अधिकारों' और 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' के बीच संतुलन की रथ के दो पहियों पर टिकी है, और मौलिक अधिकारों को DPSP पर पूर्ण प्राथमिकता दी गई है, जिससे DPSP को कभी भी प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-A' के अंतर्गत 'मूल कर्तव्य' (Fundamental Duties - अनुच्छेद 51A) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में अंतःस्थापित किया गया था।
2. मूल कर्तव्य केवल भारत के नागरिकों पर ही लागू होते हैं, और इनमें से कुछ कर्तव्य प्रकृति में नैतिक हैं जबकि अन्य नागरिक कर्तव्य हैं, किंतु संविधान में इन्हें न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय (Justiciable) बनाया गया है अर्थात इनके उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय से रिट जारी करवाई जा सकती है।
3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 द्वारा संविधान में एक नया मूल कर्तव्य (खंड 'k') जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य (Ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करना माता-पिता या संरक्षक का कर्तव्य होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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