BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
5 views

भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'मूल्य संवर्धन कर' (Value Added Tax - VAT) और 'वस्तु एवं सेवा कर' (Goods and Services Tax - GST) के विधिक, संस्थागत एवं संरचनात्मक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के माध्यम से भारतीय संविधान में नया 'अनुच्छेद 246A' अंतःस्थापित किया गया, जो संसद और राज्य विधानमंडल दोनों को वस्तु एवं सेवा कर (GST) से संबंधित कानून बनाने की समवर्ती शक्ति प्रदान करता है, किंतु अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान माल या सेवाओं की आपूर्ति पर कर लगाने और वसूलने की अनन्य शक्ति केंद्र सरकार के पास होती है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 279A के प्रावधानों के अंतर्गत स्थापित 'जीएसटी परिषद' (GST Council) एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं, और इस परिषद में लिए जाने वाले प्रत्येक निर्णय के लिए कुल उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम तीन-चौथाई (75%) बहुमत का होना अनिवार्य है।
  3. 3. 'राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण' (National Anti-profiteering Authority - NAA), जिसे जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत कर कटौती का लाभ अंतिम उपभोक्ताओं तक न पहुँचाने वाली कंपनियों की जाँच के लिए स्थापित किया गया था, को हालिया विधिक संशोधनों के पश्चात 'भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग' (CCI) में विलीन (Merge) कर दिया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा संविधान में अनुच्छेद 246A जोड़ा गया, जो संसद और राज्यों को जीएसटी पर कानून बनाने की समवर्ती शक्ति देता है। अनुच्छेद 269A के तहत अंतर-राज्यीय व्यापार पर GST लगाने और वसूलने की शक्ति केंद्र के पास है। कथन 2 गलत है: 'जीएसटी परिषद' (GST Council) एक **संवैधानिक निकाय** (Constitutional Body under Article 279A) है, न कि केवल एक सांविधिक (Statutory) निकाय। परिषद में निर्णयों के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का **दो-तिहाई (67% या 2/3)** बहुमत आवश्यक होता है, न कि तीन-चौथाई। कथन 3 सही है: राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण (NAA) को दिसंबर 2022 में समाप्त कर दिया गया और इसके लंबित मामलों के निपटान की जिम्मेदारी 'भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग' (Competition Commission of India - CCI) को सौंप दी गई है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।
Share:

Related Questions

भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, प्राचीन भारतीय वास्तुकला (Ancient Indian Architecture) की 'नागर' (Nagara) और 'द्रविड' (Dravida) शैली से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नागर शैली के मंदिरों में सामान्यतः गर्भगृह के ऊपर वक्राकार या रैखिक शिखर (Curvilinear Tower) का निर्माण किया जाता है, जिसके शीर्ष पर आमलक और उसके ऊपर कलश स्थापित होता है, और यह शैली मुख्य रूप से विंध्य से लेकर कृष्णा नदी के भौगोलिक क्षेत्रों में विकसित हुई थी। 2. द्रविड शैली के मंदिरों की एक प्रमुख विशेषता 'गोपुरम' (Gopuram) यानी अलंकृत प्रवेश द्वार होती है, जो मुख्य मंदिर के विमान की ऊँचाई से भी अधिक ऊँचे और विशाल हो सकते हैं, तथा इस शैली में मंदिर परिसर के भीतर बड़े पैमाने पर जल कुंड (Water Tank) का होना अनिवार्य विशेषता रही है। 3. नागर शैली के विपरीत, द्रविड शैली के मंदिरों में पंचायतन शैली (Panchayatana Style) का प्रयोग पूरी तरह वर्जित था और किसी भी द्रविड मंदिर में मुख्य देवता के अतिरिक्त अन्य चार सहायक देवताओं के मंदिरों के निर्माण का कोई प्रावधान नहीं मिलता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे औषधीय पौधे लगाने के लिए किस नई पहल की शुरुआत की है? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' और 'अनुच्छेद 226' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारक्षेत्र (Writ Jurisdiction) एवं लोकहित याचिका (PIL) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को न केवल मौलिक अधिकारों बल्कि किसी अन्य उद्देश्य (जैसे सामान्य विधिक अधिकारों के प्रवर्तन) के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालयों का यह रिट अधिकारक्षेत्र उनका एक अनन्य (Exclusive) अधिकार है जिसे संसद विधि द्वारा भी सर्वोच्च न्यायालय को हस्तांतरित नहीं कर सकती है। 2. 'पी. एन. भगवती' के नेतृत्व में 1980 के दशक में विकसित 'लोकहित याचिका' (PIL) की अवधारणा ने पारंपरिक 'लोकस स्टैंडी' (Locus Standi - यानी केवल पीड़ित व्यक्ति द्वारा ही अदालत जाने का नियम) को शिथिल कर दिया, जिसके तहत अब समाज का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति या सामाजिक संगठन समाज के शोषित, वंचित या गरीबों के मौलिक अधिकारों के हनन के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। 3. 'चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया था कि उच्च न्यायालयों का अनुच्छेद 226 के अंतर्गत प्राप्त रिट अधिकारक्षेत्र संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का एक अभिन्न हिस्सा है, और संसद किसी भी सांविधिक न्यायाधिकरण (Tribunal) की स्थापना करके उच्च न्यायालयों के इस न्यायिक समीक्षा के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? गांधी-इरविन समझौते को किस अन्य नाम से जाना जाता है? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 110' के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill) की परिभाषा और इसके पारित होने की विधायी प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार, कोई विधेयक धन विधेयक तभी माना जाता है जब उसमें केवल ऐसे उपबंध हों जो करों के अध्यारोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन से संबंधित हों, तथा इसमें भारत की संचित निधि या आकस्मिकता निधि से धन के विनियोग या प्राप्ति से संबंधित कोई अन्य विषय शामिल नहीं हो सकता है। 2. लोकसभा के अध्यक्ष (Speaker) का यह निर्णय अंतिम होता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, और उनके इस प्रमाणन (Certification) को किसी भी न्यायालय में, या संसद के किसी भी सदन में अथवा राष्ट्रपति के समक्ष चुनौती नहीं दी जा सकती है। 3. राज्यसभा को धन विधेयक के संबंध में संशोधन करने या उसे अस्वीकार करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है, और यदि राज्यसभा चौदह दिनों की अवधि के भीतर उस विधेयक को अपनी सिफारिशों के साथ लोकसभा को वापस नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित किया हुआ माना जाएगा जिस रूप में वह लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.