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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत 'राष्‍ट्रपति शासन' (President's Rule) की उद्घोषणा तथा 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार, यदि राष्ट्रपति को किसी राज्य के राज्यपाल से रिपोर्ट मिलने पर या अन्यथा यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, तो राष्ट्रपति उस राज्य में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा कर सकते हैं, किंतु संसद के दोनों सदनों द्वारा इस उद्घोषणा का अनुमोदन दो महीने के भीतर साधारण बहुमत के बजाय विशेष बहुमत (विशेष बहुमत यानी कुल सदस्यों का बहुमत और उपस्थित-मतदान करने वालों का दो-तिहाई) से होना अनिवार्य है।
  2. 2. 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया था कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 356 के तहत की गई उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है और इस पर किसी भी न्यायालय में कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता, क्योंकि यह पूरी तरह से एक राजनीतिक और संप्रभु निर्णय है।
  3. 3. एस.आर. बोम्मई मामले के निर्णय में यह भी व्यवस्था दी गई थी कि राज्य विधानसभा का बहुमत परीक्षण (Floor Test) केवल राज्यपाल के राजभवन में नहीं, बल्कि अनिवार्य रूप से सदन (Assembly) के पटल पर ही किया जाना चाहिए, और यदि केंद्र सरकार बिना किसी ठोस संवैधानिक आधार के चुनी हुई राज्य सरकार को बर्खास्त करती है, तो न्यायालय उस बर्खास्तगी को रद्द करके पुरानी सरकार को बहाल (Restore) कर सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा अपनी पहली तारीख से दो महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों द्वारा 'साधारण बहुमत' (Simple Majority) से अनुमोदित किया जाना आवश्यक है, न कि विशेष बहुमत से। कथन 2 गलत है क्योंकि 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था दी थी कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे में आती है, और यदि उद्घोषणा मालाफाइड (Malafide - दुर्भावनापूर्ण), अप्रासंगिक या असंवैधानिक आधार पर की गई है, तो न्यायालय उसे रद्द कर सकता है। कथन 3 सही है क्योंकि एस.आर. बोम्मई मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रतिपादित किया था कि सरकार का बहुमत परीक्षण राज्यपाल के विवेक पर राजभवन में नहीं बल्कि विधानसभा के पटल (Floor of the House) पर होना चाहिए, और यदि उद्घोषणा को असंवैधानिक घोषित किया जाता है, तो निलंबित विधानसभा को पुनः जीवित या बहाल किया जा सकता है।
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