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पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन किस अनुच्छेद के अंतर्गत आता है?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 48A पर्यावरण की रक्षा और सुधार से संबंधित है।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) तथा इससे संबंधित विधिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना वर्ष 2010 में 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रभावी और त्वरित प्रवर्तन के लिए एक सांविधिक निकाय के रूप में की गई थी, और यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के सख्त नियमों से बंधा नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है। 2. NGT अधिनियम, 2010 की अनुसूची-I के तहत प्रदत्त शक्तियों के अनुसार, यह अधिकरण 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986', 'वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980', और 'लोक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991' सहित कुल सात प्रमुख पर्यावरण-संबंधी विधियों के अंतर्गत आने वाले मामलों की सुनवाई करने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत है, किंतु 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' और 'अनुसूचित जातियों और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006' इसके अधिकार क्षेत्र से बाहर रखे गए हैं। 3. NGT के किसी भी आदेश, निर्णय या पुरस्कार के विरुद्ध अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में ही 90 दिनों की अवधि के भीतर दाखिल की जा सकती है, और अधिकरण के निर्णयों को राज्यों के उच्च न्यायालयों के समक्ष रिट अधिकारक्षेत्र (Writ Jurisdiction) के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 371' और इसके विभिन्न खंडों के तहत देश के कुछ विशेष राज्यों के लिए दिए गए 'विशेष उपबंधों' (Special Provisions) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 371-A के तहत नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिसके अनुसार संसद का कोई भी अधिनियम नागालैंड की धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं, नागा प्रथागत कानून और प्रक्रिया, तथा भूमि व उसके संसाधनों के स्वामित्व एवं हस्तांतरण से संबंधित मामलों में तब तक लागू नहीं होगा जब तक कि नागालैंड की विधानसभा इसके लिए संकल्प पारित नहीं करती है। 2. अनुच्छेद 371-D के तहत आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के संबंध में विशेष उपबंध किए गए हैं, जिसके अंतर्गत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राज्य में शैक्षिक संस्थानों और सार्वजनिक रोजगार में विशिष्ट क्षेत्रों के लोगों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु आदेश जारी कर सकता है तथा इसके लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरणों की स्थापना का प्रावधान कर सकता है। 3. अनुच्छेद 371-H के तहत मिजोरम राज्य के लिए विशेष प्रावधान के अंतर्गत राज्यपाल को कानून और व्यवस्था के रखरखाव के संबंध में एक विशेष उत्तरदायित्व सौंपा गया है, और इस मामले में राज्यपाल अपने मंत्रिपरिषद से परामर्श करने के बाद भी अपने 'स्वविवेक' (Discretion) के अनुसार निर्णय लेता है, जिसका निर्णय अंतिम होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? असहयोग आंदोलन किस वर्ष प्रारंभ किया गया? Arabian Sea से खोजी गई नई Deep-Sea Fish Species का नाम क्या है? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और जैव विविधता संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की स्थापना 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के तहत चेन्नई, तमिलनाडु में एक सांविधिक (Statutory) और स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और जैव विविधता अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े मामलों को विनियमित करना है। 2. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत देश के प्रत्येक स्तर पर स्थानीय निकायों द्वारा 'जैव विविधता प्रबंधन समितियों' (Biodiversity Management Committees - BMCs) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जिनका प्रमुख कार्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौधों और पशुओं की नस्लों, सूक्ष्मजीवों और पारंपरिक ज्ञान से संबंधित 'लोक जैव विविधता रजिस्टरों' (People's Biodiversity Registers - PBRs) को तैयार करना और उनका रखरखाव करना है। 3. जैव विविधता अधिनियम के अंतर्गत किसी भी भारतीय नागरिक, कंपनी या संस्थान को देश के भीतर जैविक संसाधनों का उपयोग करने या उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान का व्यावसायिक लाभ उठाने के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है, भले ही वह व्यक्ति या संस्था भारत का मूल निवासी क्यों न हो।
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