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Indian Polity
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मौलिक अधिकार किस भाग में हैं?

Detailed Explanation

भाग 3।
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भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) तथा चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और ऐसे अन्य निर्वाचन आयुक्तों, यदि कोई हों, की नियुक्ति का प्रावधान है, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा बनाई गई विधियों के अधीन नियुक्त किया जाता है। 2. वर्ष 1993 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पश्चात् निर्वाचन आयोग को एक बहु-सदस्यीय निकाय बना दिया गया, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य निर्वाचन आयुक्त शामिल हैं, और निर्णय लेते समय यदि मतों में भिन्नता हो, तो बहुमत का नियम लागू होता है जिसमें तीनों सदस्यों की शक्तियाँ और वेतन-भत्ते समान होते हैं। 3. 'दिनेश गोस्वामी समिति' (1990) का संबंध चुनाव सुधारों से था, जिसने मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के संबंध में कॉलेजियम प्रणाली की सिफारिश की थी तथा सरकारी धन या वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने की बात कही थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकारिता, प्रशासनिक नियंत्रण तथा अधीनस्थ न्यायपालिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के अलावा सामान्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन पर भी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और इस संदर्भ में उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता सर्वोच्च न्यायालय की अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक व्यापक है। 2. अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अनुसार राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग के परामर्श से की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाला व्यक्ति कम से कम पाँच वर्ष का अधिवक्ता होना चाहिए। 3. अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों (जिनमें जिला न्यायालय और उनके अधीनस्थ अन्य न्यायिक अधिकारी शामिल हैं) पर नियंत्रण का अधिकार, जिसमें उनकी पोस्टिंग, पदोन्नति और छुट्टियों का अनुदान शामिल है, पूरी तरह से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है, न कि राज्य सरकार के कार्यकारी विभागों में। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) की संरचना, स्वतंत्रता और कृतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या संयुक्त लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, और इन आयोगों के सदस्यों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि आयोग के कम से कम आधे सदस्य ऐसे व्यक्ति होंगे जो भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हों। 2. संघ लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को उसके पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य को हटाने की शक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल में निहित होती है, बशर्ते राष्ट्रपति द्वारा कदाचार के आधार पर उच्चतम न्यायालय में जाँच कराए जाने का आदेश पारित किया गया हो। 3. संविधान के अनुच्छेद 321 के अंतर्गत संसद या राज्य का विधानमंडल, क्रमशः संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग को अपने अधीन आने वाले स्थानीय प्राधिकारियों, सार्वजनिक निगमों या अन्य निikayon (bodies) की सेवाओं से संबंधित कृतियों को सौंपने के लिए विधि बना सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की प्रस्तावना में वर्णित शब्दों और उनके ऐतिहासिक व दार्शनिक संदर्भ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रस्तावना में प्रयुक्त 'गणराज्य' (Republic) शब्द का तात्पर्य यह है कि भारत का राज्याध्यक्ष (राष्ट्रपति) एक वंशानुगत monarch न होकर जनता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक निश्चित अवधि के लिए चुना गया व्यक्ति होता है। 2. प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व (Liberty, Equality, and Fraternity) के आदर्शों को 1789 की फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution) से प्रेरित होकर शामिल किया गया था, जो सामाजिक और राजनीतिक जीवन के मूल मंत्र माने जाते हैं। 3. 'समाजवादी' और 'पंथनिरपेक्ष' शब्दों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से प्रस्तावना में जोड़ा गया था, और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार इन शब्दों का आशय यह है कि राज्य का अपना कोई राजकीय धर्म नहीं होगा और सभी धर्मों को राज्य स्तर पर समान संरक्षण प्राप्त होगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री के संवैधानिक दायित्वों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्य के राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग अपनी इच्छा या स्वविवेक से नहीं कर सकता, बल्कि यह मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही संभव है, और यदि राज्यपाल किसी ऐसे विषय पर अध्यादेश जारी करता है जिसके लिए राज्य विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने हेतु राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Previous Sanction) आवश्यक थी, तो राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना अध्यादेश प्रख्यापित नहीं कर सकता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, और ऐसे मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (During the Pleasure of the Governor) पद धारण करते हैं, तथा संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि किसी राज्य का मुख्यमंत्री बनने वाले व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि नियुक्ति के समय वह राज्य विधानमंडल के किसी न किसी सदन का सदस्य अवश्य होना चाहिए। 3. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा अनुच्छेद 165 के तहत की जाती है, और महाधिवक्ता को राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे मतदान (Voting) करने का कोई अधिकार नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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