BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
7 views

भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill - Article 110) तथा वित्तीय विधेयकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार, कोई विधेयक धन विधेयक तभी माना जाता है जब उसमें केवल और केवल करों के अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन, भारत सरकार द्वारा धन उधार लेने, संचित निधि या लोक लेखा से धन जमा करने या निकालने से संबंधित सभी या कोई विशिष्ट मामले शामिल हों।
  2. 2. लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) द्वारा किसी विधेयक को धन विधेयक के रूप में प्रमाणित किया जाना अंतिम होता है, और इस प्रमाण-पत्र को देश के किसी भी न्यायालय में या संसद के दोनों सदनों में चुनौती नहीं दी जा सकती है, किंतु इस निर्णय की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) पर कोई प्रतिबंध नहीं है यदि प्रक्रियागत कोई गंभीर धोखाधड़ी या असंवैधानिक उल्लंघन हुआ हो।
  3. 3. राज्य विधानमंडल के संदर्भ में, किसी विधेयक को धन विधेयक घोषित करने का अंतिम अधिकार राज्य के राज्यपाल (Governor) के पास होता है, क्योंकि राज्य की संचित निधि से धन निकालने के लिए राज्यपाल की पूर्व अनुशंसा अनिवार्य होती है और राज्य विधानसभा अध्यक्ष की इसमें कोई भूमिका नहीं होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत कोई विधेयक धन विधेयक तभी होता है जब उसमें अनन्य रूप से कर लगाने, कर हटाने, सरकार द्वारा ऋण लेने, संचित निधि या लोक लेखा के समव्यवहार से जुड़े विशिष्ट प्रावधान शामिल होते हैं। यदि इसमें कोई अन्य गैर-धन विषय भी शामिल कर दिया जाए, तो वह धन विधेयक नहीं रहता है। कथन 2 सही है: लोकसभा अध्यक्ष का यह प्रमाण-पत्र कि कोई विधेयक धन विधेयक है, अंतिम होता है। हालांकि, 'मोहम्मद सईद सिद्दीकी बनाम राज्य (2014)' और हालिया न्यायिक प्रवृत्तियों के अनुसार, यदि अध्यक्ष के इस निर्णय में प्रक्रिया का कोई गंभीर उल्लंघन या असंवैधानिक कृत्य शामिल है, तो सर्वोच्च न्यायालय उसकी न्यायिक समीक्षा कर सकता है, हालांकि सामान्य मामलों में यह अंतिम होता है। कथन 3 गलत है: राज्य विधानमंडल के मामले में भी, किसी विधेयक को धन विधेयक घोषित करने की शक्ति राज्य विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) के पास होती है, न कि राज्यपाल के पास। राज्यपाल केवल विधेयक को प्रस्तुत करने के लिए अपनी पूर्व अनुशंसा (Prior Recommendation) प्रदान करते हैं।
Share:

Related Questions

राजा राममोहन राय के प्रयासों से सती प्रथा का अंत किस गवर्नर जनरल के कार्यकाल में हुआ? भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक वित्त' (Public Finance) और 'राजकोषीय समेकन' (Fiscal Consolidation) के दायरे में आने वाले 'राजकोषीय घाटे' (Fiscal Deficit) और 'प्रभावी राजस्व घाटे' (Effective Revenue Deficit) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit) पारंपरिक राजस्व घाटे और केंद्र सरकार द्वारा राज्यों तथा स्वायत्त निकायों को पूंजीगत संपत्तियों के सृजन के लिए दिए जाने वाले अनुदानों के बीच का अंतर होता है, जिसे पहली बार वर्ष 2011-2012 के केंद्रीय बजट में पेश किया गया था ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि राजस्व व्यय का कितना हिस्सा वास्तव में उपभोग के लिए है न कि पूंजी निर्माण के लिए। 2. राजकोषीय घाटा सरकार की कुल प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) और कुल व्यय के बीच का अंतर होता है, और राजकोषीय घाटे का उच्च स्तर हमेशा अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति (Inflation) को प्रत्यक्ष और तत्काल रूप से जन्म देता है, भले ही सरकार द्वारा लिए गए उधार का उपयोग पूरी तरह से उत्पादक बुनियादी ढांचे (Productive Infrastructure) के विकास में किया गया हो। 3. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के संशोधित प्रावधानों के तहत सरकार का यह लक्ष्य निर्धारित किया गया था कि वह राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3 प्रतिशत तक सीमित करे, किंतु असाधारण आर्थिक परिस्थितियों या महामारी जैसे झटकों के कारण इस लक्ष्य से विचलन (Deviation) की अनुमति देने के लिए अधिनियम में एक 'एस्केप क्लॉज' (Escape Clause) का प्रावधान भी शामिल है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में यह कहा गया है कि भारत का एक राष्ट्रपति होगा? भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों को किस देश के संविधान से लिया गया है? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' तथा 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत केंद्र की बाध्यताओं और राष्ट्रपति शासन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 355 केंद्र सरकार पर यह संवैधानिक कर्तव्य आरोपित करता है कि वह बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार ही चलाई जा रही है। 2. 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 355 के अंतर्गत आंतरिक अशांति या संवैधानिक तंत्र की विफलता के आधार पर किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की शक्ति का प्रयोग करने से पूर्व केंद्र सरकार के लिए यह अनिवार्य है कि वह राज्य सरकार को पहले एक औपचारिक चेतावनी जारी करे और उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दे, सिवाय उन अत्यधिक असाधारण मामलों के जहाँ तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो। 3. अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा के पश्चात संसद के दोनों सदनों द्वारा इसका अनुमोदन दो महीने के भीतर साधारण बहुमत के बजाय केवल विशेष बहुमत (अर्थात उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) से ही किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.