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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक वित्त' (Public Finance) और 'राजकोषीय समेकन' (Fiscal Consolidation) के दायरे में आने वाले 'राजकोषीय घाटे' (Fiscal Deficit) और 'प्रभावी राजस्व घाटे' (Effective Revenue Deficit) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit) पारंपरिक राजस्व घाटे और केंद्र सरकार द्वारा राज्यों तथा स्वायत्त निकायों को पूंजीगत संपत्तियों के सृजन के लिए दिए जाने वाले अनुदानों के बीच का अंतर होता है, जिसे पहली बार वर्ष 2011-2012 के केंद्रीय बजट में पेश किया गया था ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि राजस्व व्यय का कितना हिस्सा वास्तव में उपभोग के लिए है न कि पूंजी निर्माण के लिए।
  2. 2. राजकोषीय घाटा सरकार की कुल प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) और कुल व्यय के बीच का अंतर होता है, और राजकोषीय घाटे का उच्च स्तर हमेशा अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति (Inflation) को प्रत्यक्ष और तत्काल रूप से जन्म देता है, भले ही सरकार द्वारा लिए गए उधार का उपयोग पूरी तरह से उत्पादक बुनियादी ढांचे (Productive Infrastructure) के विकास में किया गया हो।
  3. 3. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के संशोधित प्रावधानों के तहत सरकार का यह लक्ष्य निर्धारित किया गया था कि वह राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3 प्रतिशत तक सीमित करे, किंतु असाधारण आर्थिक परिस्थितियों या महामारी जैसे झटकों के कारण इस लक्ष्य से विचलन (Deviation) की अनुमति देने के लिए अधिनियम में एक 'एस्केप क्लॉज' (Escape Clause) का प्रावधान भी शामिल है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit) पारंपरिक राजस्व घाटे में से पूंजीगत संपत्तियों के सृजन के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तथा अन्य निकायों को दिए गए अनुदानों को घटाकर निकाला जाता है। इसे रंगराजन समिति की सिफारिश पर 2011-12 के बजट में पेश किया गया था ताकि यह देखा जा सके कि राजस्व व्यय का कितना भाग वास्तविक उपभोग में जा रहा है। कथन 2 गलत है: राजकोषीय घाटे का उच्च स्तर हमेशा मुद्रास्फीति को जन्म नहीं देता है। यदि सरकार द्वारा लिए गए ऋण का उपयोग उत्पादक परिसंपत्तियों (जैसे सड़कें, बंदरगाह, बिजली संयंत्र आदि) के निर्माण में किया जाता है, तो यह दीर्घकाल में उत्पादन क्षमता को बढ़ाता है और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। मुद्रास्फीति मुख्य रूप से तब बढ़ती है जब राजकोषीय घाटे का वित्तपोषण अत्यधिक मात्रा में अप्रतिबंधित मुद्रा मुद्रण (Monetization) या अनुत्पादक खपत व्यय के माध्यम से किया जाता है। कथन 3 सही है: FRBM अधिनियम, 2003 (संशोधित) के तहत राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3% तक लाने का लक्ष्य रखा गया था, और इसमें मंदी, राष्ट्रीय सुरक्षा या कृषि संकट जैसी असाधारण स्थितियों के लिए 'एस्केप क्लॉज' (Escape Clause) का प्रावधान है जिसके तहत लक्ष्यों से विचलन की अनुमति मिलती है।
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