त्वरित लिंक्स
Civil services
5 views
भारतीय पर्यावरण कानून और 'केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' (CPCB) के गठन, क्षेत्राधिकार एवं कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की स्थापना जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों के अंतर्गत एक सांविधिक (Statutory) निकाय के रूप में की गई थी, जिसे बाद में वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत भी शक्तियाँ और कार्य सौंपे गए।
- 2. CPCB देश में राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (National Ambient Air Quality Standards - NAAQS) को अधिसूचित करने और जल निकायों की गुणवत्ता के मानदंडों को निर्धारित करने के लिए वैधानिक रूप से अधिकृत है, और यह केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को पर्यावरण से जुड़े मामलों पर तकनीकी सलाह भी देता है।
- 3. जल अधिनियम, 1974 के अंतर्गत CPCB के पास यह पूर्ण और अंतिम शक्ति है कि वह देश के किसी भी राज्य में स्थित औद्योगिक इकाइयों को बिना किसी पूर्व चेतावनी या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) के परामर्श के सीधे तौर पर बंद करने या उनकी बिजली-पानी की आपूर्ति हमेशा के लिए काटने का प्रत्यक्ष आदेश जारी कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की स्थापना सितंबर 1974 में जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अंतर्गत एक कार्यकारी और सांविधिक निकाय के रूप में की गई थी। बाद में इसे वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत भी शक्तियां और उत्तरदायित्व प्रदान किए गए।
कथन 2 सही है: CPCB देश भर में राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) तय करने, जल प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण संरक्षण के संबंध में केंद्र सरकार को सलाह देने के लिए वैधानिक रूप से उत्तरदायी और अधिकृत है।
कथन 3 गलत है: हालांकि CPCB के पास उद्योगों को निर्देश जारी करने की शक्ति है, लेकिन जल अधिनियम और वायु अधिनियम के तहत सीधे तौर पर बिना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) के समन्वय/सलाह या वैधानिक प्रक्रिया के उद्योगों की बिजली-पानी काटने या उन्हें पूरी तरह बंद करने का अत्यधिक मनमाना और एकतरफा अधिकार इसके पास नहीं होता है; ऐसे मामलों में संबंधित राज्य बोर्डों और विहित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत केंद्र सरकार सीधे निर्देश दे सकती है, लेकिन CPCB की अपनी सीमाएँ हैं।
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की उद्घोषणा और इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, और वर्ष 1978 के 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा यह प्रावधान किया गया कि 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर भी आपातकाल की घोषणा की जा सकती है (इससे पहले इस आधार के लिए 'आंतरिक अशांति' शब्द का प्रयोग किया जाता था)।
2. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त सभी छह मौलिक अधिकार स्वतः (Suo motu) निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए राष्ट्रपति द्वारा किसी अलग औपचारिक आदेश की आवश्यकता नहीं होती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह एक आदेश जारी करके राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को छोड़कर, अन्य किसी भी मौलिक अधिकार को निलंबित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राजा राममोहन राय द्वारा प्रकाशित बंगाली समाचार पत्र कौन सा था?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की स्वतंत्रता, शक्तियों और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) तथा अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एवं निष्कासन प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (2) के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन रहते हुए राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023' के पारित होने से पहले तक इस विषय पर संसद द्वारा कोई विस्तृत मूल कानून नहीं बनाया गया था, जिससे यह नियुक्ति पूरी तरह से कार्यपालिका के कार्यकारी विवेक पर निर्भर थी।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर 'उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश' को हटाया जाता है (अर्थात संसद के दोनों सदनों द्वारा साबित कदाचार या असमर्थता के विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के आधार पर)।
3. अन्य निर्वाचन आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को उनके पद से मुख्य निर्वाचन आयुक्त की लिखित सिफारिश के बिना किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया जा सकता है, क्योंकि यह संवैधानिक सुरक्षा उन्हें कार्यपालिका के किसी भी मनमाने राजनीतिक दबाव से पूरी तरह सुरक्षित रखती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की उद्घोषणा और उसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर की जा सकती है, तथा मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे बाद में '44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978' द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
2. राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी की जा सकती है जब संघ के मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा—जिसमें प्रधानमंत्री और कैबिनेट स्तर के अन्य मंत्री शामिल हैं—इस आशय का लिखित निर्णय राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए, और यह पूर्व-लिखित संसूचन संविधान में अनिवार्य किया गया है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा का संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से 'एक महीने' के भीतर विशेष बहुमत (Special Majority) द्वारा अनुमोदन किया जाना अनिवार्य है, अन्यथा यह आपातकाल स्वतः समाप्त हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' के अंतर्गत 'राजभाषा' (Official Language - अनुच्छेद 343 से 351) तथा आठवीं अनुसूची के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप (1, 2, 3...) होगा, बशर्ते संसद विधि द्वारा अंग्रेजी भाषा के प्रयोग को अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंधित कर सकती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 351 में यह निर्देश दिया गया है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसके रूप में हस्तक्षेप किए बिना, हिंदुस्तानी में और आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भारत की अन्य भाषाओं के रूप में प्रयुक्त शब्दावली को आत्मसात करे।
3. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में कुल 22 भाषाएँ कर दिया गया है, और किसी भी भाषा को इस अनुसूची में शामिल करने के लिए संविधान में कोई निश्चित मानदंड या वैज्ञानिक पात्रता निर्धारित की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.