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जीन पियाजे
Asked 2 months ago · Viewed 17 times

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के दौरान बालक में 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'आरक्षण/पलटावी गुण' (Reversibility) का विकास हो जाता है, जिससे वह किसी वस्तु या समस्या को केवल एक आयाम से देखने के बजाय उसके कई पहलुओं पर एक साथ विचार कर सकता है।
  2. 2. पियाजे के अनुसार 'स्किमा' (Schema) ज्ञान के संगठित पैटर्न या मानसिक संरचनाएँ होती हैं, जिनमें नए अनुभवों को शामिल करने की प्रक्रिया को 'समावेशन' (Assimilation) कहा जाता है, जबकि मौजूदा स्कीमा में बदलाव करके नए अनुभव के अनुकूल ढलने की प्रक्रिया को 'समायोजन' (Accommodation) कहा जाता है।
  3. 3. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरणों का क्रम संवेदी-गामक अवस्था से शुरू होकर औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था पर समाप्त होता है, और इन चरणों की विकासात्मक अनुक्रमिकता (Developmental Sequence) सार्वभौमिक होती है, जिसे बदला या टाला नहीं जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संबंध में पूरी तरह से सत्य हैं। 1. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7 से 11 वर्ष) में बच्चे विकेंद्रीकरण (Decentration) और पलटाव (Reversibility) की क्षमता हासिल कर लेते हैं। 2. स्कीमा, समावेशन (Assimilation) और समायोजन (Accommodation) संज्ञानात्मक अनुकूलन (Adaptation) की मूल अवधारणाएँ हैं जो बिल्कुल सही परिभाषित की गई हैं। 3. पियाजे के चरणों का अनुक्रम (Sensory-motor, Preoperational, Concrete operational, Formal operational) सार्वभौमिक और अपरिवर्तनीय होता है।
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