संज्ञानात्मक विकास
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बुद्धि की संरचना और उसके आयामों के संदर्भ में, जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) के 'बुद्धि की संरचना सिद्धांत' (Structure of Intellect Model - SOI Model) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. गिलफोर्ड के इस त्रist-आयामी (Three-Dimensional) मॉडल के अनुसार, बुद्धि कुल तीन स्वतंत्र आयामों - संक्रियाएँ (Operations), विषय-वस्तु (Contents) और उत्पाद (Products) के पारस्परिक अंतःक्रिया का परिणाम है।
- 2. मूल रूप से इस मॉडल में संक्रियाओं के 5 प्रकार, विषय-वस्तु के 4 प्रकार और उत्पादों के 6 प्रकार शामिल थे, जिनके गुणनफल से बौद्धिक क्षमताओं की कुल संख्या 5 × 4 × 6 = 120 बनती थी, जिसे बाद में संशोधित करके 150 और फिर 180 कर दिया गया।
- 3. इस मॉडल के अंतर्गत 'अभिसारी चिंतन' (Convergent Thinking) को विषय-वस्तु आयाम के अंतर्गत रखा गया है, जबकि 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) को संक्रियाओं (Operations) के अंतर्गत एक प्रमुख मानसिक संक्रिया माना गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि जे.पी. गिलफोर्ड का 'बुद्धि की संरचना सिद्धांत' तीन आयामों पर आधारित है: संक्रियाएँ (Operations), विषय-वस्तु (Contents), और उत्पाद (Products)। कथन 2 भी सही है क्योंकि मूल मॉडल में 5 (संक्रियाएँ) × 4 (विषय-वस्तु) × 6 (उत्पाद) = 120 कारक थे, जिन्हें बाद में बढ़ाकर 150 और फिर 180 कर दिया गया। कथन 3 गलत है क्योंकि 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) और 'अभिसारी चिंतन' (Convergent Thinking) दोनों को गिलफोर्ड ने 'संक्रियाओं' (Operations) आयाम के अंतर्गत रखा है, न कि विषय-वस्तु के अंतर्गत। अतः सही विकल्प (a) है।
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage, लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिससे वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन करने पर भी उसकी मात्रा या आयतन अपरिवर्तित रहता है।
2. मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage, लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं के वर्गीकरण (Classification), उत्क्रमणीयता (Reversibility) और तार्किक रूप से सोचने की क्षमता प्राप्त कर लेता है, बशर्ते वे वस्तुएं उसकी प्रत्यक्ष दृष्टि या अनुभव (Concrete) के दायरे में हों।
3. औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage, 11 वर्ष से आगे) में किशोरों के भीतर अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking), परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetical-Deductive Reasoning) और वैज्ञानिक सोच की क्षमता का विकास होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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प्राथमिक स्तर पर गणितीय शिक्षण और 'वैन हीले के ज्यामितीय चिंतन के सिद्धांत' (Van Hiele's Theory of Geometric Thinking) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्तर 1 (विश्लेषण - Analysis): इस स्तर पर बच्चे ज्यामितीय आकृतियों को केवल उनके समग्र रूप या दिखावट के आधार पर पहचानने के बजाय, उनके भागों और गुणों (Properties) का विश्लेषण करने लगते हैं, जैसे यह समझना कि एक आयत की आमने-सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं।
2. स्तर 3 (औपचारिक निगमन - Formal Deduction): इस स्तर पर बालक ज्यामितीय प्रमेयों (Theorems) की औपचारिक रचना, अभिगृहीतों (Axioms) के प्रयोग और तार्किक साक्ष्यों के बीच अंतर को भली-भांति समझने लगता है, जो कि माध्यमिक स्तर की ज्यामिति का मुख्य आधार है।
3. वैन हीले के अनुसार, ज्यामितीय चिंतन के ये सभी स्तर क्रमिक (Sequential) और पदानुक्रमित (Hierarchical) हैं, जिसका अर्थ है कि एक छात्र उच्च स्तर (जैसे स्तर 4) पर तब तक नहीं पहुँच सकता जब तक वह पिछले सभी निम्न स्तरों को पार नहीं कर लेता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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