शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, राजनीतिक ढांचे तथा पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश राज्य में 'क्षेत्र पंचायतों' (Khetriya Panchayats) के प्रमुख (ब्लॉक प्रमुख) का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा किया जाता है, जबकि जिला पंचायत के अध्यक्ष का निर्वाचन संबंधित जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है।
- 2. उत्तर प्रदेश में 'नगर निगमों' के महापौर (Mayor) का चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के माध्यम से सीधे शहर के पंजीकृत मतदाताओं द्वारा किया जाता है, और महापौर नगर निगम की 'कार्रवाई समिति' (Executive Committee) का पदेन अध्यक्ष होता है।
- 3. उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल में 'विधान परिषद' (Legislative Council) एक स्थायी सदन है, जिसके सदस्यों की कुल संख्या 100 है, और इसका गठन सर्वप्रथम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के अंतर्गत किया गया था जिसके सदस्यों का निर्वाचन विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों (जैसे स्नातक, शिक्षक, स्थानीय निकाय और विधानसभा) के माध्यम से होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि उत्तर प्रदेश में 'क्षेत्र पंचायतों' के प्रमुख (ब्लॉक प्रमुख) का चुनाव प्रत्यक्ष जनता द्वारा नहीं किया जाता है, बल्कि क्षेत्र पंचायतों के निर्वाचित सदस्यों (बीडीसी सदस्यों) द्वारा अपने में से ही अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। कथन 2 सत्य है क्योंकि उत्तर प्रदेश के नगर निगमों के महापौर का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से शहर के मतदाताओं द्वारा होता है और महापौर नगर निगम की कार्यकारी समिति का पदेन अध्यक्ष होता है। कथन 3 सत्य है क्योंकि उत्तर प्रदेश विधान परिषद एक स्थायी सदन है जिसमें कुल 100 सदस्य हैं और इसका गठन अनुच्छेद 171 के तहत विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों के माध्यम से होता है। अतः केवल कथन 2 और 3 सही हैं।
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली, वैदिक काल के गुरुकुल और उत्तर प्रदेश में स्थित प्रमुख प्राचीन शिक्षा केंद्रों व आश्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के वर्तमान 'बलिया' जिले के समीप स्थित प्राचीन काल में महर्षि भृगु का 'भृगु क्षेत्र' और 'नैमिषारण्य' (वर्तमान सीतापुर जिला) वैदिक काल से ही तपस्या, पुराण कथाओं और शिक्षा के प्रमुख केंद्र रहे हैं, जहाँ महर्षि शौनकादि ऋषियों ने हजारों शिष्यों को शिक्षा प्रदान की थी।
2. वाराणसी (ऋषिपत्तनम/काशी) प्राचीन काल से ही उपनिषद कालीन दर्शन, व्याकरण और बौद्ध शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र रहा है, जहाँ काशी के राजा अजातशत्रु और उपनिषद काल के प्रसिद्ध दार्शनिक गार्गी व याज्ञवल्क्य के संवादों का उल्लेख मिलता है।
3. प्राचीन काल में 'सारनाथ' केवल बौद्ध धर्म का ही नहीं, बल्कि वज्रयान और महायान संप्रदायों से जुड़े शिक्षण का भी एक प्रतिष्ठित केंद्र था, जिसका उल्लेख चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) के यात्रा वृत्तांतों में भी विस्तार से मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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बिहार के छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी) की संपूर्ण क्रांति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन की शुरुआत मूल रूप से छात्रों द्वारा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' के गठन के साथ हुई थी।
2. जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए दो मुख्य शर्तें रखी थीं—पहला यह कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा और दूसरा यह कि इसका प्रभाव केवल बिहार राज्य तक ही सीमित रहेगा, राष्ट्रीय राजनीति में इसका कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
3. गांधी मैदान, पटना में 5 जून 1974 को ऐतिहासिक जनसभा के दौरान जयप्रकाश नारायण ने सत्ता परिवर्तन और व्यवस्था परिवर्तन के लिए 'सम्पूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का आह्वान किया था, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक कालीन शिक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वैदिक काल में उच्च शिक्षा पूरी करने वाले छात्रों को उनकी अध्ययन अवधि के आधार पर तीन श्रेणियों - 'विद्यार्थी', 'स्नातक' और 'वसु' में विभाजित किया जाता था, तथा इस काल में महिलाओं को उपनयन संस्कार का अधिकार था और उन्हें 'ब्रह्मवादिनी' या 'सद्योवधू' के रूप में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की स्वतंत्रता थी।
2. गुरुकुल में शिक्षा की समाप्ति पर छात्र के घर लौटने से पूर्व 'समावर्तन संस्कार' का आयोजन किया जाता था, जिसके संपन्न होने के बाद छात्र को 'स्नातक' कहा जाता था और वह समाज में प्रवेश करने के लिए योग्य माना जाता था।
3. वैदिक कालीन शिक्षा प्रणाली का मुख्य उद्देश्य केवल भौतिक संपदा और व्यावसायिक कौशल अर्जित करना था, और इसमें नैतिक तथा आध्यात्मिक विकास को कोई विशेष स्थान नहीं दिया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक कालीन शिक्षा के विभिन्न पक्षों, संस्कारों तथा समावर्तन समारोह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वैदिक कालीन शिक्षा प्रणाली में छात्र के औपचारिक अध्ययन की शुरुआत 'उपनयन संस्कार' (Upanayana Sanskara) के माध्यम से होती थी, जो सामान्यतः वर्ण के आधार पर 8 से 12 वर्ष की आयु में संपन्न होता था और इसके पश्चात बालक को 'द्विज' (Dvij) कहा जाता था।
2. शिक्षा की समाप्ति के उपरांत गुरुकुल से अपने घर लौटने वाले छात्र के लिए 'समावर्तन संस्कार' (Samavartana Sanskara) का आयोजन किया जाता था, जिसके बाद छात्र को 'स्नातक' (Snataka) कहा जाता था और वह अपना गृहस्थ जीवन शुरू करने के लिए योग्य माना जाता था।
3. वैदिक काल में उच्च शिक्षा पूरी करने वाले छात्रों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था - 'विद्यार्थी' (जो एक वर्ष तक अध्ययन करे), 'वसतु' (जो दो वर्षों तक अध्ययन करे) और 'रुद्र' (जो तीन या अधिक वर्षों तक अध्ययन करे), तथा महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा का कोई प्रावधान नहीं था और उन्हें वेदों के अध्ययन से पूर्णतः वंचित रखा जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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इनमें से किसने अपनी रिपोर्ट में 'शिक्षा के चार स्तंभों' की बात की है?
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