प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक कालीन शिक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वैदिक कालीन शिक्षा में शिक्षा की शुरुआत 'उपसंमपदा संस्कार' के माध्यम से होती थी, जिसके पश्चात छात्र को 'भिक्षुक' कहा जाता था और वह अपना गृहस्थ जीवन त्यागकर गुरुकुल में प्रवेश करता था।
- 2. बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली में अध्ययन की शुरुआत 'प्रव्रज्या संस्कार' (Pravrajya Ritual) के साथ होती थी, जो लगभग 8 वर्ष की आयु में संपन्न होता था और इसके बाद छात्र को 'सामणेर' (Novice) कहा जाता था।
- 3. मध्यकालीन (मुस्लिम) शिक्षा प्रणाली में प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत 'मक्तब' (Maktab) संस्थाओं से होती थी, जहाँ बच्चों को बिस्मिल्लाह ख्वानी संस्कार (Bismillah Khwani Ceremony) के पश्चात शिक्षा दी जाती थी, जो सामान्यतः 4 वर्ष, 4 महीने और 4 दिन की आयु में होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि वैदिक कालीन शिक्षा में औपचारिक शिक्षा की शुरुआत 'उपनीत संस्कार' या 'उपनयन संस्कार' (Upayana/Upnayan Sanskar) के माध्यम से होती थी, न कि 'उपसंमपदा संस्कार' से। उपसंमपदा संस्कार बौद्ध धर्म से संबंधित है जो उच्च शिक्षा या भिक्षु बनने के समय (लगभग 20 वर्ष की आयु में) होता था। वैदिक काल में गुरुकुल में प्रवेश पाने वाले छात्र को 'ब्रह्मचारी' कहा जाता था।
कथन 2 सत्य है क्योंकि बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली में प्राथमिक या प्रारंभिक शिक्षा में प्रवेश के लिए 'प्रव्रज्या संस्कार' अनिवार्य था, जो लगभग 8 वर्ष की आयु में होता था। इस संस्कार के बाद छात्र को 'सामणेर' (सामनेर) कहा जाता था।
कथन 3 सत्य है क्योंकि मुस्लिम या मध्यकालीन शिक्षा प्रणाली में प्राथमिक शिक्षा के केंद्र 'मक्तब' होते थे। शिक्षा आरंभ करने से पूर्व 'बिस्मिल्लाह ख्वानी' नामक एक विशेष संस्कार आयोजित किया जाता था, जो आमतौर पर बच्चे की आयु 4 वर्ष, 4 महीने और 4 दिन होने पर संपन्न होता था। उच्च शिक्षा के केंद्र 'मदरसा' कहलाते थे।