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बच्चों के सामाजिक विकास (Social Development) और समाजीकरण की प्रक्रिया के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. समाजीकरण की प्रक्रिया में 'प्राथमिक समाजीकरण' (Primary Socialization) का मुख्य अभिकर्ता (Agent) परिवार को माना जाता है, जहाँ बच्चा शैशवावस्था और प्रारंभिक बाल्यावस्था के दौरान भाषा, संस्कृति और बुनियादी मूल्यों को सीखता है।
- 2. 'द्वितीयक समाजीकरण' (Secondary Socialization) के अंतर्गत विद्यालय, सहकर्मी समूह (Peer Group), मीडिया और पड़ोस आते हैं, जो बच्चे के बड़े होने पर उसके दृष्टिकोण, सामाजिक भूमिकाओं और औपचारिक नियमों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- 3. लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-Conventional Level) पर समाजीकरण और नैतिकता का आधार पूरी तरह से सामाजिक मानदंडों और कानूनों का बिना किसी आलोचना के आँख बंद कर पालन करना होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि परिवार को बाल विकास और समाजीकरण की प्रक्रिया में सबसे पहला और प्राथमिक अभिकर्ता माना जाता है, जहाँ बच्चा अपने जीवन की शुरुआत में बुनियादी सामाजिक व्यवहार सीखता है। कथन 2 सही है क्योंकि विद्यालय, सहकर्मी समूह, जनसंचार माध्यम (मीडिया) और खेल के मैदान द्वितीयक समाजीकरण के प्रमुख साधन हैं जो उत्तर बाल्यावस्था और किशोरावस्था में बच्चे के विकास को प्रभावित करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Level) पर व्यक्ति नियमों का पालन आँख बंद करके नहीं करता, बल्कि वह सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों और विवेक के आधार पर सामाजिक कानूनों का मूल्यांकन करने की क्षमता रखता है। बिना आलोचना के नियमों का पालन करना 'रूढ़िगत स्तर' (Conventional Level) या 'पूर्व-रूढ़िगत स्तर' की विशेषता हो सकता है, उत्तर-रूढ़िगत स्तर की नहीं। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-गर्भीय विभाजन के अंतर्गत 'विंध्यन पर्वतीय क्षेत्र' (Vindhyan Region) और उसके भौतिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी और दक्षिणी हिस्से में स्थित यह क्षेत्र मुख्य रूप से विंध्यन क्रम की प्राचीन बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और शेल (Shale) जैसी अवसादी चट्टानों से निर्मित है, जो सोनभद्र और मिर्जापुर जिलों तक विस्तृत हैं।
2. इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ जैसे बेलन, कनहर और रिहंद उत्तर प्रदेश के पठारी भाग से बहती हुई सोन नदी में मिलती हैं, और इन नदियों की घाटियों में प्राचीन पाषाण युगीन (Prehistoric) सभ्यता के महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए हैं।
3. विंध्यन क्षेत्र की जलवायु अर्ध-शुष्क होने के कारण यहाँ वनों का विस्तार बहुत कम पाया जाता है और कृषि योग्य भूमि का प्रतिशत उत्तर प्रदेश के मैदानी भागों की तुलना में काफी अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IV में वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (Directive Principles of State Policy - DPSP) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हावर्ड गार्डनर (Howard Gardner) द्वारा प्रतिपादित 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences: भाषाई, तार्किक-गणितीय, स्थानिक, संगीतात्मक, शारीरिक-गतिक, अंतर्व्यक्तिगत, अंतराव्यक्तिगत और प्रकृतिवादी) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), 'टेम्पोरल लोब' (Temporal Lobe), 'सेरिबैलम' (Cerebellum) और 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobes) के बीच विशिष्ट डोमेन प्रसंस्करण, समानांतर न्यूरल नेटवर्क सक्रियण, और संज्ञानात्मक मॉड्यूलरिटी (Modular Theory of Mind) की सक्रियण गतिकी, तथा रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) के 'बुद्धि के त्र-तंत्रीय सिद्धांत' (Triarchic Theory: विश्लेषणात्मक, रचनात्मक और व्यावहारिक बुद्धि) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, डिफरेंशियल-कॉग्निटिव पेडागोजी (Differential-Cognitive Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुआयामी क्षमताओं, समस्या-समाधान कौशल व समग्र संज्ञानात्मक लचीलेपन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'वाक्य भेद' तथा 'वाच्य' (Voice) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रचना (बनावट) के आधार पर वाक्यों के तीन मुख्य भेद होते हैं—सरल वाक्य (Simple Sentence), संयुक्त वाक्य (Compound Sentence) और मिश्र वाक्य (Complex Sentence), जहाँ मिश्र वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य और एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्य (जैसे संज्ञा, विशेषण और क्रियाविशेषण उपवाक्य) होते हैं जो 'जो', 'कि', 'चूँकि', 'यद्यपि' जैसे व्यधिकरण योजकों से जुड़े होते हैं।
2. 'कर्मवाच्य' (Passive Voice) का प्रयोग केवल अकर्मक क्रियाओं के साथ ही संभव है, क्योंकि इसमें क्रिया का सीधा संबंध कर्म से न होकर हमेशा कर्ता की प्रधानता और उसके लिंग-वचन पर आधारित होता है।
3. 'मोहन ने पत्र लिखा' (कर्तृवाच्य) वाक्य को जब कर्मवाच्य में बदला जाता है, तो उसका रूप 'मोहन द्वारा पत्र लिखा गया' बनता है, जिसमें क्रिया का लिंग और वचन कर्म ('पत्र', जो कि पुल्लिंग और एकवचन है) के अनुसार निर्धारित होता है न कि कर्ता के अनुसार।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा और अधिगम' (Motivation and Learning) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs: शारीरिक सुरक्षा से लेकर आत्म-सिद्धि तक) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'इंसुला' (Insula), 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (vmPFC), और 'लिम्बिक सिस्टम' (Limbic System - विशेष रूप से अमिकडाला और हाइपोथैलेमस) के बीच होमियोस्टैटिक विनियमन, भावनात्मक सुरक्षा, और आंतरिक-बाह्य अभिप्रेरणा की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डेसी और रिचर्ड रायन (Deci and Ryan) के 'आत्म-निर्णय सिद्धांत' (Self-Determination Theory: स्वायत्तता, सक्षमता और संबद्धता) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-मोटिवेशनल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Motivational Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में आंतरिक अभिप्रेरणा, मनोवैज्ञानिक कल्याण व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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