संज्ञानात्मक विकास
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प्राथमिक स्तर पर गणितीय शिक्षण और उसके बोध के संदर्भ में 'वान हीले के ज्यामितीय चिंतन का सिद्धांत' (Van Hiele's Levels of Geometric Thinking) अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सिद्धांत के विभिन्न स्तरों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. स्तर 0 (दृश्यीकरण - Visualization): इस प्रारंभिक स्तर पर बच्चे ज्यामितीय आकृतियों को उनके समग्र रूप (Global Gestalt) या दिखावट के आधार पर पहचानते हैं और उनके गुणों (Properties) का विश्लेषण करने में असमर्थ होते हैं, जैसे एक आयत को केवल 'दरवाजे जैसी शक्ल' के रूप में देखना।
- 2. स्तर 2 (अनौपचारिक निगमन या अमूर्तता - Informal Deduction/Ordering): इस स्तर पर बालक आकृतियों के बीच अंतर्संबंधों को समझने लगता है और यह निष्कर्ष निकालता है कि सभी वर्ग वास्तव में विशेष प्रकार के आयत और समचतुर्भुज होते हैं।
- 3. स्तर 4 (दृढ़ता या rigor): यह ज्यामितीय चिंतन का सर्वोच्च स्तर है, जो अमूर्त ज्यामितीय प्रणालियों और विभिन्न अभिगृहित प्रणालियों (Axiomatic Systems) की तुलना करने की क्षमता से संबंधित है, और यह सामान्यतः स्कूली स्तर से आगे की अवस्था है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वान हीले (Pierre van Hiele and Dina van Hiele-Geldof) का ज्यामितीय चिंतन का सिद्धांत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस सिद्धांत के कुल 5 स्तर (स्तर 0 से स्तर 4) हैं:
- स्तर 0 (Visualization / दृश्यीकरण): बच्चे आकृतियों को समग्र रूप से पहचानते हैं, उनके आंतरिक गुणों का विश्लेषण नहीं करते। यह कथन पूर्णतः सत्य है।
- स्तर 1 (Analysis / विश्लेषण): बच्चे आकृतियों के गुणों को पहचानना शुरू करते हैं (जैसे- आयत की आमने-सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं)।
- स्तर 2 (Informal Deduction / अनौपचारिक निगमन या संबंध): इस स्तर पर बालक आकृतियों के गुणों में आपसी संबंध स्थापित करने लगते हैं और यह समझ जाते हैं कि वर्ग एक आयत भी है। यह कथन भी सही है।
- स्तर 3 (Deduction / औपचारिकता): इसमें औपचारिक प्रमाण (Proofs) और ज्यामितीय निगमनात्मक तर्क विकसित होते हैं।
- स्तर 4 (Rigor / दृढ़ता): यह ज्यामितीय चिंतन का सबसे उच्च और अमूर्त स्तर है। अतः तीनों कथन सही हैं।
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of…
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage, लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिससे वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन करने पर भी उसकी मात्रा या आयतन अपरिवर्तित रहता है।
2. मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage, लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं के वर्गीकरण (Classification), उत्क्रमणीयता (Reversibility) और तार्किक रूप से सोचने की क्षमता प्राप्त कर लेता है, बशर्ते वे वस्तुएं उसकी प्रत्यक्ष दृष्टि या अनुभव (Concrete) के दायरे में हों।
3. औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage, 11 वर्ष से आगे) में किशोरों के भीतर अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking), परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetical-Deductive Reasoning) और वैज्ञानिक सोच की क्षमता का विकास होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार 'संरक्षण' (Conservation) का तात्पर्य यह समझने की क्षमता से है कि किसी वस्तु के भौतिक स्वरूप, आकार या रूप में परिवर्तन होने पर भी उसका द्रव्यमान, भार, आयतन या संख्या अपरिवर्तित रहती है, और यह क्षमता बच्चों में औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) में ही पहली बार विकसित होती है।
2. 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-deductive Reasoning) की क्षमता का पूर्ण विकास पियाजे के सिद्धांत की अंतिम अवस्था यानी 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 11 वर्ष से वयस्कता) के दौरान होता है, जहाँ किशोर बिना किसी ठोस या मूर्त सहारे के केवल प्रतीकों और प्रस्तावों के आधार पर समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।
3. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरणों की यह विशेषता है कि ये सभी संस्कृतियों और समाजों में एक निश्चित और सार्वभौमिक क्रम में आगे बढ़ते हैं, अर्थात् कोई भी बच्चा किसी पूर्ववर्ती चरण को छोड़े बिना क्रमबद्ध रूप से ही अगली अवस्था में प्रवेश करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में, 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) की निम्नलिखित में से कौन-सी प्रमुख विशेषताएँ हैं?
1. इस अवस्था में बच्चों के भीतर 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता विकसित हो जाती है, अर्थात उन्हें यह समझ आ जाती है कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन करने से उसकी मात्रा, द्रव्यमान या आयतन अपरिवर्तित रहता है।
2. बच्चे इस चरण में 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) करने में सक्षम हो जाते हैं, जिससे वे किसी समस्या या वस्तु को केवल एक ही आयाम के बजाय एक साथ कई आयामों से देखने लगते हैं।
3. इस अवस्था के दौरान बच्चों में अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning) की पूर्ण क्षमता विकसित हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं पर विचार कीजिए:
1. इस अवस्था में बालकों के भीतर 'संरक्षण' (Conservation) का गुण विकसित हो जाता है, जिससे वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के रूप, आकार या रंग में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन या द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।
2. बच्चे वस्तुओं को उनके किसी एक गुण (जैसे केवल रंग या केवल आकार) के आधार पर वर्गीकृत करने की बजाय कई मानदंडों के आधार पर एक साथ छाँट सकते हैं, जिसे 'वर्गीकरण' (Classification) की क्षमता कहा जाता है।
3. इस अवस्था के दौरान बालक पूरी तरह से 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) और 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क' में पारंगत हो जाते हैं, और उन्हें अपने तर्कों की पुष्टि के लिए प्रत्यक्ष या भौतिक रूप से सामने मौजूद वस्तुओं की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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