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UPTET
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) और बाल-केन्द्रित शिक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य बालकों के साथ-साथ विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) को एक ही छत के नीचे बिना किसी भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, जिसके लिए 'भेदभाव रहित वातावरण' और 'अनुकूलित पाठ्यक्रम' (Adapted Curriculum) का होना अनिवार्य है।
  2. 2. 'निशक्तजन अधिकार अधिनियम, 2016' (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के अंतर्गत विकलांगता के प्रकारों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है, तथा इसमें शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश के लिए न्यूनतम आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है।
  3. 3. जॉन डीवी (John Dewey) द्वारा प्रतिपादित 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) और 'करके सीखना' (Learning by Doing) का सिद्धांत समावेशी कक्षाओं के लिए अनुपयुक्त है, क्योंकि यह केवल प्रतिभाशाली बालकों के मानसिक विकास पर ही बल देता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि समावेशी शिक्षा का मूल आधार सभी बच्चों को उनकी योग्यताओं या अक्षमताओं से परे एक समान शैक्षिक अवसर प्रदान करना है, जिसमें लचीला पाठ्यक्रम और अनुकूलित शिक्षण पद्धतियाँ शामिल हैं। कथन 2 भी सही है; 'निशक्तजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPwD Act, 2016) के तहत विकलांगता की श्रेणियों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है और उच्च शिक्षण संस्थानों में न्यूनतम 5% आरक्षण का प्रावधान किया गया है। कथन 3 गलत है क्योंकि जॉन डीवी की 'प्रगतिशील शिक्षा' और 'करके सीखना' का सिद्धांत समावेशी शिक्षा का आधारस्तंभ है, जो सभी बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर देता है, न कि केवल प्रतिभाशाली बालकों पर।
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